S Raj Hanu

S Raj Hanu I love cricket

बॉस, एशियन गेम्स के पहले दिन से जिस चमचमाते गोल्ड मेडल का वनवास खटक रहा था, वो आखिरकार हिंदुस्तान-पाकिस्तान के इस हाई-वो...
04/10/2026

बॉस, एशियन गेम्स के पहले दिन से जिस चमचमाते गोल्ड मेडल का वनवास खटक रहा था, वो आखिरकार हिंदुस्तान-पाकिस्तान के इस हाई-वोल्टेज महासंग्राम में आकर खत्म हुआ! और वो भी हमारे 19वें राजसी गोल्ड के रूप में! सच कहूं तो जिस पल टॉस का सिक्का अपने हक में गिरा, उसी वक्त मुझे अंदर से फील आ गया था कि आज पाकिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर बंधना एकदम तय है। वजह शीशे की तरह साफ थी पिच भयंकर मुश्किल थी, और ऐसे विकेट पर पहले बैटिंग करके स्कोरबोर्ड पर रनों का एवरेस्ट खड़ा कर देना ही आधी जंग जीतने के बराबर था। टीम इंडिया ने मैदान पर एकदम यही मास्टरमाइंड रणनीति अपनाई।

अभिषेक शर्मा (61) ने आज जिस मैच्योरिटी के साथ बैटिंग की, उसने उन तमाम आलोचकों के मुंह पर सरेआम टेप चिपका दिया जो उसे सिर्फ आंख बंद करके बल्ला घुमाने वाला लप्पेबाज मानते थे। इस लड़के ने डंके की चोट पर साबित कर दिया कि मुश्किल पिचों पर कैसे टिककर गेंदबाजों का धागा खोला जाता है। इसके बाद कप्तान श्रेयस अय्यर और ईशान किशन ने जो सूझबूझ दिखाई, वो किसी मास्टरक्लास से कम नहीं थी। कई बार टी-20 के दीवानों को ऐसी बैटिंग स्लो लग सकती है, लेकिन बॉस, जब पिच नागिन की तरह डस रही हो, तो विकेट बचाकर डेथ ओवर्स के लिए बारूद इकट्ठा करना ही सबसे फौलादी रणनीति होती है। इन दोनों ने यही किया और अंत के तूफान के लिए एक मंच सजा दिया।

और फिर एंट्री हुई तिलक वर्मा (51) और शिवम दुबे की, जिन्होंने क्रीज पर आते ही पाकिस्तानी गेंदबाजों का ऐसा गुरूर तोड़ा कि मैच का पूरा नक्शा ही पलट गया! मुझे तिलक वर्मा की बैटिंग की यही क्लास सबसे ज्यादा पसंद है। ये लड़का 3 से लेकर 7 नंबर तक कहीं भी एकदम परफेक्ट फिट हो जाता है। टी-20 में आग उगलता है, वनडे में एंकर बन जाता है, फील्डिंग में चीता है और भयंकर दबाव में भी एकदम आइसमैन रहता है। रही-सही कसर शिवम दुबे ने अपनी बाहुबली हिटिंग से पूरी कर दी। सच कहूं तो, उस सड़ी हुई पिच पर 211 रनों का वो स्कोर कागजों पर जितना दिख रहा था, असलियत में विरोधियों के लिए वो किसी माउंट एवरेस्ट से कम नहीं था।

जवाब में जब पाकिस्तानी चेज करने उतरे, तो उनकी शुरुआत इतनी रद्दी रही कि पूछिए मत। उनके कप्तान फरहान, जिन्होंने पिछली बार बुमराह पर तीन छक्के मारने के बाद पूरी डॉक्यूमेंट्री बना डाली थी, अगर आज गलती से भी जीत जाते ना बॉस, तो कसम से सीधे वेब सीरीज ही लॉन्च कर देते! लेकिन हिंदुस्तान के सामने उनके ये मुंगेरीलाल वाले ख्वाब कभी पूरे नहीं होने वाले।

हालांकि, हसन नवाज की उस 96 रनों की पारी की तारीफ करनी पड़ेगी। मुझे एक पल के लिए भी नहीं लगा कि पाकिस्तान ये मैच जीत रहा है, लेकिन इस अकेले बंदे ने मैच को एकतरफा होने से जरूर रोक लिया और आखिरी ओवरों तक खींचे रखा। खैर, इस रोमांच के पीछे रवि बिश्नोई की वो ढीली गेंदबाजी और हमारी लचर फील्डिंग का भी बड़ा हाथ था, जिसने उन्हें बेवजह की ऑक्सीजन दे दी।

इस ऐतिहासिक जीत में टीम मैनेजमेंट और वीवीएस लक्ष्मण सर के दिमाग की भी दाद देनी पड़ेगी। एक एक्स्ट्रा बल्लेबाज खिलाने का उनका दांव एकदम ब्रह्मास्त्र साबित हुआ। बाद में स्कोरकार्ड देखकर कई क्रिकेट ज्ञानी ज्ञान देंगे कि एक बॉलर कम था, लेकिन बॉस, ऐसी सड़ी हुई पिचों पर अक्सर एक बल्लेबाज की पारी ही मैच का पूरा रुख तय कर देती है। पिछले मैच में भी यही हुआ था और आज भी। लक्ष्मण सर ने पिच की जो रीडिंग की थी, वो एकदम स्पॉट-ऑन थी। उधर बुमराह शायद आज अपने चरम पर नहीं दिखे, लेकिन बुमराह का सिर्फ मैदान पर खड़ा होना ही विरोधियों की सांसें अटकाने के लिए काफी होता है। इस बंदे का वो खौफ ही है जो सामने वाले को कभी चैन से खुलकर सांस नहीं लेने देता।

सच कहूं तो इस क्रिकेट गोल्ड का सबसे बड़ा और इकलौता दावेदार सिर्फ हिंदुस्तान था। डर सिर्फ इस बात का था कि कहीं बीच में बारिश आकर सारा गुड़-गोबर ना कर दे और हमें पाकिस्तानियों के साथ अपना गोल्ड शेयर ना करना पड़ जाए। लेकिन शुक्र है ऊपर वाले का, जिसने मौसम एकदम साफ रखा और मैदान पर हिसाब-किताब बराबरी से हुआ।

अब 19 गोल्ड मेडल्स के साथ अपना डंका पदक तालिका में 5वें नंबर पर गूंज रहा है। अभी हॉकी से एक और सोने के तमगे की आस है, और कुछ और अखाड़ों में भी हमारे शेर भूखे बैठे हैं। अगर किस्मत और मेहनत ने ऐसा ही साथ दिया, तो हम चौथे नंबर तक भी छलांग लगा सकते हैं। लेकिन अंत में बस इतना ही कहूंगा बॉस गोल्ड मेडल जीतना तो हमेशा खास होता है, लेकिन पाकिस्तानियों के मुंह से वो गोल्ड मेडल छीनकर जीतने का जो गुरूर और सुकून है ना, उसकी कोई कीमत नहीं। एशियन गेम्स 2026 का ये महासंग्राम और ये जीत हर हिंदुस्तानी फैन को सदियों तक याद रहने वाली है! आज तो सच में लौंडों ने गर्दा उड़ा दिया!

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'गिल का गुनाह' ! विराट रोहित कप्तान होते तो यह गलती कभी नहीं करते !! इसीलिए कहते हैँ कपतानी सबके बस की बात नहीं ..कप्तान...
04/10/2026

'गिल का गुनाह' ! विराट रोहित कप्तान होते तो यह गलती कभी नहीं करते !! इसीलिए कहते हैँ कपतानी सबके बस की बात नहीं ..
कप्तानी सिर्फ टॉस जीत कर फैसला लेने या फील्ड पर खड़े होकर बड़े-बड़े फैसले दिखाने का नाम नहीं है, बल्कि यह समय पर सही फैसला लेने की कला है। जब दबाव सबसे ज्यादा होता है, तब कप्तान का दिमाग कितना ठंडा रहता है, वही तय करता है कि मैच का नतीजा किस तरफ झुकेगा। आज जिस तरह से मुकाबला हाथ से फिसला, उसे देखकर हर क्रिकेट प्रेमी का दिल टूटना स्वाभाविक है।

आज मैच का जो मोड़ था, वहां से कोई भी अनुभवी कप्तान टीम को जीत की दहलीज तक खींच सकता था। वेस्टइंडीज की टीम 351 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही थी, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा स्कोर है।
46 ओवर का खेल हो चुका था और आखिरी 4 ओवरों में जीत के लिए वेस्टइंडीज को 44 रनों की जरूरत थी। क्रिकेट के इस फॉर्मेट में 4 ओवर में 44 रन बनना कोई असंभव बात नहीं है, लेकिन जब आपके पास अनुभवी गेंदबाज बचे हों, तो पलड़ा हमेशा गेंदबाजी करने वाली टीम का भारी माना जाता है।

भारतीय टीम के पास इस समय सबसे अनुभवी और भरोसेमंद तेज गेंदबाज के रूप में मोहम्मद सिराज मौजूद थे, जिनके दो बेहद महत्वपूर्ण ओवर बचे हुए थे। ऐसी स्थिति में हर प्रशंसक और जानकार यही उम्मीद कर रहा था कि सिराज आकर मैच में भारत की वापसी कराएंगे या कम से कम रनों की रफ्तार पर अंकुश लगाएंगे। लेकिन मैदान पर जो फैसले देखने को मिले, उन्होंने सभी को हैरान कर दिया।

शुभमन गिल ने 47वां ओवर गेंदबाज़ी के लिए गुर्नूर बरार को थमा दिया। उस ओवर में 15 रन बन गए, जिसके बाद मैच का समीकरण बदलकर 3 ओवर में 29 रन रह गया।
दबाव अब पूरी तरह से भारतीय टीम पर आ चुका था। लेकिन इसके बावजूद हर किसी को यही लग रहा था कि अब तो कम से कम मोहम्मद सिराज को गेंद थमाई ही जाएगी। लेकिन गिल ने यहाँ पर वो फैसला लिया जिसे शायद उनकी कप्तानी करियर की सबसे बड़ी भूल के रूप में देखा जाएगा।
उन्होंने 48वां ओवर फेंकने के लिए नए नवेले गेंदबाज अंशुल कंबोज को बुला लिया, जो पहले ही अपने 8 ओवरों में 60 रन दे चुके थे और लय में नज़र नहीं आ रहे थे।
एक युवा गेंदबाज पर आखिरी ओवरों में इतना बड़ा दबाव डालना भारी पड़ गया और उस ओवर में 22 रन निकल गए। कंबोज का आंकड़ा 9 ओवर में 82 रन पहुंच गया और मैच पूरी तरह से भारत की पकड़ से बाहर होकर वेस्टइंडीज की झोली में चला गया।

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह रही कि इसके बाद भी मोहम्मद सिराज के दो ओवर बचे के बचे रह गए।
12 गेंदों में सिर्फ 7 रनों की दरकार थी और तब भी सिराज को गेंदबाजी नहीं दी गई। 49वां ओवर फेंकने के लिए नमन धीर को लाया गया। पहली ही गेंद पर छक्का पड़ा, अगली गेंद पर एक रन बना और वेस्टइंडीज ने आसानी से मैच अपने नाम कर लिया। सिराज के वो दो ओवर आखिर किसके काम आए, यह सवाल हर किसी के मन में है। लोग अब यही कह रहे हैं कि मोहम्मद सिराज के ओवर क्या घर ले जाने के लिए बचाकर रखे गए थे?

रोहित शर्मा या विराट कोहली जैसे अनुभवी कप्तान जब मैदान पर होते थे, तो वे मैच की नब्ज को बहुत अच्छे से पहचानते थे। वे जानते थे कि दबाव के इन अंतिम क्षणों में अपने सबसे अनुभवी गेंदबाज का इस्तेमाल कैसे करना है।
उन्होंने कई मौकों पर हारी हुई बाजी को पलटा है, क्योंकि उन्हें पता होता था कि संकट के समय किसे गेंद सौंपनी है। शुभमन गिल भले ही एक शानदार बल्लेबाज हों और भविष्य के बड़े सितारे हों, लेकिन कप्तानी के मामले में उन्हें अभी बहुत कुछ सीखना बाकी है।

हालांकि इस हार के बीच वेस्टइंडीज के खेल की तारीफ करनी होगी। 351 रनों का पीछा करना आसान नहीं होता, लेकिन उनके बल्लेबाजों ने बिना किसी दबाव के शानदार जज्बा दिखाया और मैच को अंत तक खींचकर ले गए।
उन्होंने हर मिले मौके का पूरा फायदा उठाया और बेहतरीन क्रिकेट खेला। वेस्टइंडीज को इस शानदार जीत की बधाई, लेकिन भारतीय प्रशंसकों के लिए यह मैच एक कड़वी सीख और कभी न भूलने वाली हार के रूप में याद रखा जाएगा।

आपकी क्या राये है बताइये ?
कमेंट मै अपनी राये दीजिए ।

ज़रा उस 9 साल की बच्ची के बारे में कल्पना कीजिए, जिसे सिर्फ इसलिए रोहतक की क्रिकेट अकादमियों से वापस लौटा दिया जाता था क...
24/09/2026

ज़रा उस 9 साल की बच्ची के बारे में कल्पना कीजिए, जिसे सिर्फ इसलिए रोहतक की क्रिकेट अकादमियों से वापस लौटा दिया जाता था क्योंकि वह लड़की थी ।
लेकिन उसके पिता ने इस जवाब को आखिरी सच मानने से इनकार कर दिया, उन्होंने उसके बाल छोटे करवाए, उसका नाम साहिल रखा और उसे अपने ही भाई के रूप में क्रिकेट खेलने भेजना शुरू कर दिया ।
एक बार तो असली साहिल के बीमार पड़ने पर उसने उसके नाम से पूरा अंडर-12 टूर्नामेंट खेला और प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट भी बनी, लेकिन किसी को पता तक नहीं चला कि असल में वह लड़की थी ।

ऐसी शुरुआत या तो किसी इंसान को तोड़ देती है या फिर उसे ऐसा बना देती है जिसे तोड़ना आसान नहीं होता, शैफाली के मामले में दूसरा हुआ ।

अक्टूबर 2024 में उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया, गेंदबाजों ने उनके खेल को पढ़ लिया था और लेग साइड पर लगातार आक्रामक शॉट खेलने की उनकी आदत धीरे-धीरे अनुमान लगाने लायक हो गई थी ।
उन्हें दोबारा घरेलू क्रिकेट में लौटना पड़ा और अपने खेल को नए सिरे से समझना पड़ा, लेकिन जब वह वापस आईं तो उनका अंदाज बदला हुआ था ।
आक्रामकता कम नहीं हुई, बल्कि खेल में समझदारी जुड़ गई, पहले की तरह हर गेंद को लेग साइड में मारने के बजाय उन्होंने सीधा मैदान के नीचे खेलने पर ज्यादा भरोसा करना शुरू किया ।

आज देखिए, उस बदलाव ने उन्हें कहां पहुंचा दिया है ।
उनकी पिछली 12 T20I पारियों में 597 रन हैं, औसत 59.7 का है और स्ट्राइक रेट 173 से ज्यादा का है। इस दौरान वह एक बार भी सिंगल डिजिट स्कोर पर आउट नहीं हुईं और सिर्फ एक बार 25 से कम का स्कोर बना। पूरे 2025 की बात करें तो उन्होंने 1280 रन बनाए और उनका स्ट्राइक रेट 165 रहा, जबकि औसत 42 से ज्यादा का रहा ।

T20I क्रिकेट में 1500 से ज्यादा रन बनाने और 140 से ज्यादा के स्ट्राइक रेट का आंकड़ा छूने वाली वह पहली महिला क्रिकेटर बनीं ।
अब वह T20I में 3000 रन का आंकड़ा भी पार कर चुकी हैं ।

और कहानी सिर्फ बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है, गेंद से भी उन्होंने 34 पारियों में 22 विकेट लिए हैं ।
उनका बॉलिंग स्ट्राइक रेट करीब 20 और इकॉनमी लगभग 6 की है। ये ऐसे आंकड़े हैं जो कई विशेषज्ञ स्पिनरों के लिए भी शानदार माने जाएंगे, जबकि शैफाली को अभी भी अक्सर पार्ट टाइम गेंदबाज के तौर पर देखा जाता है।

इन प्रदर्शनों ने उन्हें ICC T20I रैंकिंग में दुनिया की नंबर 4 खिलाड़ी तक पहुंचाया । अपनी ओपनिंग पार्टनर के साथ उन्होंने एशियन गेम्स में भारत को गोल्ड मेडल दिलाने में भी अहम भूमिका निभाई , वह लगातार सीरीज दर सीरीज टीम के लिए योगदान देती रही हैं और सबसे खास बात यह है कि वह अभी सिर्फ 22 साल की हैं ।

जिस लड़की को कभी अपने भाई की किट पहनकर मैदान पर उतरना पड़ा था, आज उसे अपने नाम से पहचान बनाने के लिए किसी पहचान की जरूरत नहीं है ।
कभी क्रिकेट में जगह बनाने के लिए उसे साहिल बनना पड़ा था, लेकिन आज शैफाली वर्मा का नाम ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है ।

नमन धीर 🎯जिनकी कहानी बताती है कि क्रिकेट में टैलेंट के साथ-साथ संघर्ष और धैर्य भी कितना जरूरी होता है ।नमन का जन्म हरिया...
21/09/2026

नमन धीर 🎯
जिनकी कहानी बताती है कि क्रिकेट में टैलेंट के साथ-साथ संघर्ष और धैर्य भी कितना जरूरी होता है ।

नमन का जन्म हरियाणा के अंबाला में हुआ था, लेकिन पिता की नौकरी के चलते उनका परिवार पंजाब के फरीदकोट में आकर बस गया ।
परिवार साधारण मध्यमवर्गीय था, उनके पिता ने पूरी जिंदगी एक मेडिकल स्टोर पर कर्मचारी के तौर पर काम किया ।
सीमित आमदनी में क्रिकेट का सामान खरीदना, क्लब की फीस भरना और टूर्नामेंट खेलने के लिए आने-जाने का खर्च उठाना परिवार के लिए आसान नहीं था ।

अंडर-16 में खेलने के बाद नमन को बड़ा झटका लगा और अगले चार साल तक चयनकर्ताओं ने उन्हें नजरअंदाज किया ।
लगातार संघर्ष और आर्थिक परेशानियों से परेशान होकर 2022 की शुरुआत में नमन ने क्रिकेट छोड़ने का मन बना लिया। उन्होंने कनाडा जाने के लिए स्थायी नागरिकता के कागजात तैयार करने तक शुरू कर दिए थे ।

लेकिन तभी उनके पिता ने उन्हें रोक लिया और कम से कम एक साल और क्रिकेट को देने के लिए कहा ।
नमन मान गए और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ ।

दिसंबर 2022 में उन्होंने रणजी ट्रॉफी में डेब्यू किया। दिसंबर 2023 में मुंबई इंडियंस ने उन्हें 20 लाख रुपये में अपने साथ जोड़ा और नवंबर 2024 में 5.25 करोड़ रुपये में रिटेन कर लिया ।

इसके बाद अभी खत्म हुई शेर-ए-पंजाब टी20 ट्रॉफी में नमन ने अपनी बल्लेबाजी से तहलका मचा दिया ।
10 मैचों की 10 पारियों में उन्होंने 655 रन बनाए। उनका औसत 72.78 और स्ट्राइक रेट 217.61 रहा। इस दौरान उन्होंने 49 चौके और 49 छक्के लगाए, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 173 रन रहा ।
यानी सिर्फ रन बनाना ही नहीं, बल्कि जिस गति से उन्होंने रन बनाए, वह भी इस प्रदर्शन को खास बनाता है ।

इस शानदार प्रदर्शन के बाद नमन को वेस्टइंडीज दौरे के लिए भारतीय टीम में जगह मिली ।
जिस खिलाड़ी ने कुछ साल पहले क्रिकेट छोड़कर कनाडा जाने की तैयारी शुरू कर दी थी, उसका आज भारतीय टीम तक पहुंचना वाकई प्रेरणादायक है ।
नमन धीर की कहानी बताती है कि कभी-कभी जिंदगी बदलने के लिए बस एक और मौका काफी होता है ।

वैभव सूर्यवंशी ने की ऐसी कुटाई कि स्लेज करने लगे तिलक वर्मा, स्टंप माइक में रिकॉर्ड हुई सारी बातचीत, भिड़ गए दोनों खिलाड...
07/09/2026

वैभव सूर्यवंशी ने की ऐसी कुटाई कि स्लेज करने लगे तिलक वर्मा, स्टंप माइक में रिकॉर्ड हुई सारी बातचीत, भिड़ गए दोनों खिलाड़ी!

तिलक वर्मा ने लिए वैभव के मजे, स्टंप माइक में कैद हुआ वाकया
साउथ जोन के कप्तान तिलक वर्मा मैच की शुरुआत से ही काफी रक्षात्मक कप्तानी करते नजर आए। उन्होंने काफी जल्दी बाउंड्री पर फील्डर फैला दिए थे, जिसका पूरा फायदा उठाते हुए वैभव ने आसानी से सिंगल-डबल चुराए और मौका मिलते ही बड़े शॉट्स लगाए। वैभव की इस निडर बल्लेबाजी को देख तिलक वर्मा खुद उनके करीब आए और स्लेजिंग के अंदाज में चुटकी लेते हुए बोले, 'क्या यार ये वाइस कप्तान...'। हालांकि, दोनों युवा खिलाड़ियों के बीच यह नोकझोंक पूरी तरह से दोस्ताना माहौल में हुई। तिलक की यह बात सुनकर 15 साल के वैभव भी मुस्कुरा दिए और दोनों मैदान पर हंसते-खिलखिलाते नजर आए। सिराज को अटैक से हटाया
आगामी अफगानिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की T20I सीरीज में नजर आने वाले वैभव सूर्यवंशी ने मोहम्मद सिराज के खिलाफ ऐसा हमला बोला कि साउथ जोन को मजबूरन सिराज को गेंदबाजी अटैक से हटाना पड़ा। वैभव ने सिराज के एक ही ओवर में दो चौके और एक गगनचुंबी छक्का जड़कर 14 रन बटोरे थे। वैभव और अनुभवी ओपनर अभिमन्यु ईश्वरन ने पहले विकेट के लिए 100 रनों की शतकीय साझेदारी निभाई। हालांकि, अर्धशतक के करीब पहुंचते ही वैभव अपने अटैकिंग नेचर पर काबू नहीं रख सके और चामा मिलिंद की गेंद पर खराब शॉट खेलकर 37 गेंदों में 44 रन बनाकर आउट हो गए। सेमीफाइनल में भी वे 92 रन पर आउट होकर अपने शतक से चूक गए थे।

मंधाना का रिकॉर्डतोड़ शतक, मिथाली राज को छोड़ा पीछे; हांगकांग के खिलाफ 124 रन की तूफानी पारी से रचा इतिहास👇मंधाना ने हां...
04/09/2026

मंधाना का रिकॉर्डतोड़ शतक, मिथाली राज को छोड़ा पीछे; हांगकांग के खिलाफ 124 रन की तूफानी पारी से रचा इतिहास
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मंधाना ने हांगकांग के खिलाफ अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी से महिला क्रिकेट की रिकॉर्ड बुक में नया अध्याय जोड़ दिया। भारत की स्टार ओपनर ने महज 57 गेंदों में शतक पूरा करते हुए 124 रन की शानदार पारी खेली, जिसमें चौकों और छक्कों की जबरदस्त बरसात देखने को मिली। इस पारी के साथ मंधाना ने अंतरराष्ट्रीय महिला क्रिकेट में अपने शतकों की संख्या 18 तक पहुंचा दी और सर्वाधिक अंतरराष्ट्रीय शतक लगाने वाली बल्लेबाज बन गईं। उन्होंने मेग लैनिंग और लौरा वोल्वार्ड्ट जैसी दिग्गज खिलाड़ियों को पीछे छोड़ दिया।

इतना ही नहीं, मंधाना ने कुल अंतरराष्ट्रीय रनों के मामले में भी ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए मिथाली राज को पीछे छोड़ दिया। अब वह महिला अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाने वाली भारतीय बल्लेबाज हैं। इसके अलावा 50+ स्कोर, T20I में छक्कों और महिला एशिया कप में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर से जुड़े कई रिकॉर्ड भी उनके नाम हो गए।

57 गेंदों में आया यह शतक भारत के लिए महिला T20I इतिहास के सबसे तेज शतकों में शामिल हो गया। मंधाना की इस रिकॉर्डतोड़ पारी ने न सिर्फ भारत की बल्लेबाजी को मजबूती दी, बल्कि विश्व महिला क्रिकेट में उनकी महानता को एक बार फिर साबित कर दिया।

दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट 2026       ** 2012 के बाद खिताब के                               मुहाने पर ईस्ट जोन **​बेंगलुरु क...
04/09/2026

दलीप ट्रॉफी टूर्नामेंट 2026
** 2012 के बाद खिताब के
मुहाने पर ईस्ट जोन **
​बेंगलुरु के बीसीसीआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में जब लाल गेंद से इतिहास की नई इबारत लिखी जा रही थी, तब सेंट्रल जोन के सिर से न सिर्फ दलीप ट्रॉफी की बादशाहत छिन रही थी, बल्कि क्रिकेट का एक नया दौर आकार ले रहा था। खेल में अक्सर कहा जाता है कि पुराना ताज कई बार नया बोझ बन जाता है, और यही बात इस सेमीफाइनल मुकाबले में भी साबित हुई। दलीप ट्रॉफी के मौजूदा चैंपियन सेंट्रल जोन को चार विकेट से पटकनी देकर ईस्ट जोन ने न केवल फाइनल का टिकट पक्का कर लिया, बल्कि यह भी जता दिया कि बेखौफ जज्बे के आगे किसी भी रिकॉर्ड का गुरूर टूट सकता है।
​सेंट्रल जोन ने टॉस जीतकर पहली पारी में 266 रन बनाए। रिंकू सिंह के धैर्यशील 60 रन और आर्यन जुयाल के 46 रनों ने टीम को संभालने की कोशिश की, लेकिन मुकेश कुमार, मोहम्मद शमी और अभिजीत सरकार की कसी हुई गेंदबाजी के आगे चैंपियन टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में नाकाम रही। इसके जवाब में ईस्ट जोन की ओर से मैदान पर उतरा एक ऐसा किशोर, जिसने पूरे मुकाबले की दिशा बदल दी। महज 15 साल और 157 दिन के वैभव सूर्यवंशी ने 81 गेंदों में सात चौकों और सात छक्कों की मदद से 92 रनों की आतिशी पारी खेली। हालांकि वह अपने शतक से आठ रन दूर रह गए, लेकिन 42 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा कर उन्होंने दलीप ट्रॉफी के 57 साल पुराने इतिहास को ध्वस्त कर दिया और इस टूर्नामेंट में पचासा जड़ने वाले सबसे युवा बल्लेबाज बन गए।
​इस मैच का रोमांच केवल वैभव के बल्ले तक सीमित नहीं था। जब कप्तान ईशान किशन चोट के कारण कुछ समय के लिए मैदान से बाहर गए, तब उपकप्तान की भूमिका निभा रहे इस 15 साल के खिलाड़ी को पहली बार सीनियर फर्स्ट क्लास क्रिकेट में कप्तानी का जिम्मा संभालना पड़ा। वैभव ने कप्तानी के दबाव में भी अपनी सूझबूझ दिखाई और आर्यन जुयाल के खिलाफ एक सटीक डीआरएस (DRS) लेकर अंपायर का फैसला पलटवाया। इसके बाद ईस्ट जोन की पहली पारी भले ही 266 रन पर सिमट गई और अंतिम पांच विकेट सिर्फ 53 रन के भीतर गिर गए, लेकिन मैच का मनोवैज्ञानिक संतुलन पूरी तरह ईस्ट जोन के पक्ष में झुक चुका था।
​दूसरी पारी में सेंट्रल जोन की पूरी टीम महज 158 रन पर ढेर हो गई। पहली पारी के तीन विकेटों के साथ मुकेश कुमार ने दूसरी पारी में चार शिकार करते हुए मैच में कुल सात विकेट चटकाए, जबकि शमी ने दूसरी पारी में तीन अहम सफलताएं हासिल कीं। 159 रन के आसान दिखने वाले लक्ष्य का पीछा करने उतरी ईस्ट जोन की शुरुआत लड़खड़ाई और 6 विकेट गिर जाने से मुकाबले में हल्का तनाव जरूर उभरा। मगर चोट से उबरकर लौटे कप्तान ईशान किशन ने संयम बनाए रखा और टीम को 39.3 ओवर में 162 रन तक पहुंचाकर चार विकेट से यादगार जीत दिला दी।
​क्वार्टर फाइनल में नॉर्थ ईस्ट जोन को पारी और 210 रन से रौंदने के बाद, अब चैंपियन सेंट्रल जोन को शिकस्त देकर ईस्ट जोन 2012 के बाद पहली बार ट्रॉफी चूमने से महज एक कदम दूर है। ईशान की कप्तानी, मुकेश और शमी की धारदार गेंदबाजी, अभिमन्यु ईश्वरन का भरोसेमंद अनुभव और वैभव की बेबाक लय—इन सबका अनूठा संगम ईस्ट जोन की इस जीत का असली आधार बना। अब फाइनल का मैदान चेन्नई में सजेगा, जहां ईस्ट जोन नए इतिहास पर अपनी मुहर लगाने उतरेगी। जब क्रिकेट की किताब में कोई नया पन्ना जुड़ता है, तो पुरानी हुकूमतें ऐसे ही ढहती हैं और एक नया सिरमौर उभरता है।

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यह कहानी वाकई दिलचस्प है ✍️साई सुदर्शन के गाले टेस्ट से पहले चोटिल होते ही देवदत्त पडिक्कल को वह जगह मिल गई, जिसके लिए भ...
27/08/2026

यह कहानी वाकई दिलचस्प है ✍️
साई सुदर्शन के गाले टेस्ट से पहले चोटिल होते ही देवदत्त पडिक्कल को वह जगह मिल गई, जिसके लिए भारत पिछले 27 टेस्ट में पुजारा के बाद 7 अलग-अलग बल्लेबाजों को आजमा चुका था और उन सभी का संयुक्त औसत सिर्फ 33.33 रहा, गाले में पडिक्कल ने 167 रन ठोक दिए और अब कोलंबो में 117 रन बनाकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि उनका टीम में आना महज एक संयोग नहीं था ।

लेकिन इस कहानी की असली शुरुआत तब हुई थी, जब वह सिर्फ 10 साल के थे, केरल के एडप्पल में बड़े हो रहे पडिक्कल के खेल में उनके पिता, जो मेडिकल प्रोफेशन में थे, ने कुछ खास देखा । उन्होंने ऐसा फैसला लिया जिसके बारे में ज्यादातर परिवार कई बार सोचेंगे ,
पूरे परिवार को बेंगलुरु ले गए, सिर्फ इसलिए ताकि देवदत्त को बेहतर क्रिकेट ट्रेनिंग मिल सके, वहां स्थानीय अकादमी में नसीरुद्दीन नाम के कोच मिले और एक ऐसा बच्चा सामने आया, जो 11 साल की उम्र में ही शॉर्ट गेंदों को जिस आत्मविश्वास और शांति से खेलता था, वह बड़े खिलाड़ियों में भी कम ही देखने को मिलता था।

आज वही ठहराव उनकी बल्लेबाजी की सबसे बड़ी ताकत नजर आता है, कोचों ने उनकी तकनीक पर लगातार काम किया, हाथों को शरीर के करीब लाया गया और बैक-लिफ्ट को छोटा किया गया ताकि ऑफ स्टंप के बाहर की गेंदों के खिलाफ कमजोरी कम हो, स्पिन के खिलाफ भी ऐसा खेल तैयार किया गया जिसमें गेंदबाज के जाल में फंसने के बजाय दबाव उन पर डाला जाए ।
गाले में श्रीलंकाई स्पिनरों के खिलाफ उन्होंने अपने करीब 25% रन सिर्फ स्वीप शॉट से बनाए और जरूरत पड़ने पर आगे निकलकर लॉन्ग-ऑन के ऊपर से भी गेंद भेजी ।

और अगर ध्यान से देखें तो यह अचानक मिली सफलता भी नहीं है। पिछले कई महीनों से पडिक्कल लगातार अपनी दावेदारी मजबूत कर रहे थे ।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी में बड़े स्कोर, पिछले विजय हजारे ट्रॉफी सीजन में 90 की औसत से 725 रन, रणजी ट्रॉफी 2025-26 में 60.33 की औसत से 543 रन और IPL 2026 में 168 के स्ट्राइक रेट से 464 रन - इन सबके बीच कर्नाटक की कप्तानी का अनुभव भी उन्हें मिला ।

इसलिए जब श्रीलंका का मौका आया, तब तक पडिक्कल बाकी हर स्तर पर खुद को साबित कर चुके थे। टेस्ट क्रिकेट बस उस घर का आखिरी कमरा था, जिसके दरवाजे खुलने का इंतजार था ।

एक परिवार ने 10 साल के बच्चे पर भरोसा करके अपना सब कुछ दांव पर लगाया था, कई साल बाद किसी दूसरे खिलाड़ी की चोट ने उस भरोसे को मौका दिया और देवदत्त पडिक्कल ने सुनिश्चित कर दिया कि वह मौका बेकार न जाए ।

India और Sri Lanka के मैच में बैट के साथ Mind Game भी खूब खेला जा रहा है। 😂भारत ने पहली पारी 503/9 पर घोषित की थी। Follo...
27/08/2026

India और Sri Lanka के मैच में बैट के साथ Mind Game भी खूब खेला जा रहा है। 😂

भारत ने पहली पारी 503/9 पर घोषित की थी। Follow-on से बचने के लिए श्रीलंका को 304 रन बनाने थे।

श्रीलंका 290/9 पर था और उसे बचने के लिए सिर्फ 14 रन चाहिए थे। Sonal Dinusha 103 रन पर खेल रहे थे।

विकेट के पीछे से ऋषभ पंत ने कहा - एक छक्का मारो और अपने देश को Follow-on से बचा लो।

दिनुशा ने जवाब दिया - जब मन करेगा तब छक्का मारूंगा, तुम अपना काम देखो।

लेकिन ये कहने के बाद भी दिनुशा छक्का लगाने गए, लेकिन Saransh Jain की गेंद पर केएल राहुल ने कैच लपक लिया..😭😂

Rishabh Pant ने विकेट के पीछे से mind game खेल कर श्रीलंका को Follow-on बचाने नहीं दिया..!

ईशान किशन ने टेस्ट टीम में वापसी के लिए BCCI से लगाई गुहार, बोले—रेड-बॉल क्रिकेट खेलने में आता है मजा👇दलीप ट्रॉफी 2026 म...
26/08/2026

ईशान किशन ने टेस्ट टीम में वापसी के लिए BCCI से लगाई गुहार, बोले—रेड-बॉल क्रिकेट खेलने में आता है मजा
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दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन की कप्तानी करते हुए शानदार जीत के बाद ईशान किशन ने भारतीय टेस्ट टीम में वापसी की इच्छा खुलकर जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह 100% टीम इंडिया का हिस्सा बनना चाहते हैं और रन बनाकर अपनी टीम को जीत दिलाना उनका मुख्य लक्ष्य है। 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट डेब्यू करने वाले ईशान ने अब तक 2 टेस्ट में 78 रन बनाए हैं। वहीं फर्स्ट-क्लास क्रिकेट में उनके नाम 3,897 रन, 9 शतक और 19 अर्धशतक हैं। ऐसे में उनका शानदार प्रदर्शन टेस्ट टीम में वापसी का रास्ता खोल सकता है।
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