20/11/2024
एक छोटा सा गाँव था, जहाँ एक गरीब किसान रहता था। उसका नाम था रामू। रामू के पास बस एक छोटी सी झोपड़ी और थोड़ी सी ज़मीन थी। वह अपनी ज़मीन पर मेहनत करके अपने परिवार का पालन-पोषण करता था।
एक दिन, रामू की ज़मीन में एक अनोखा पौधा उगा। यह पौधा हर दिन बढ़ता गया और कुछ ही दिनों में एक खूबसूरत पेड़ बन गया। इस पेड़ पर लगे फल सुनहरे रंग के थे और बहुत ही सुंदर दिखते थे।
एक दिन, एक राजा अपने शिकार के लिए उस गाँव से गुज़र रहा था। उसने दूर से ही उस सुनहरे पेड़ को देखा और उसकी सुंदरता से मुग्ध हो गया। वह अपने घोड़े से उतरा और पेड़ के पास गया।
राजा ने एक फल तोड़ा और उसे खाया। वह फल बहुत ही स्वादिष्ट था और उसे बहुत पसंद आया। उसने पूछा, "यह पेड़ किसका है?"
रामू ने कहा, "महाराज, यह पेड़ मेरा है।"
राजा ने कहा, "मैं इस पेड़ को खरीदना चाहता हूँ। मुझे बताओ, तुम इसके लिए कितने रुपये माँगोगे?"
रामू ने सोचा कि अगर वह इस पेड़ को बेच देगा तो उसे बहुत सारे पैसे मिल जाएँगे। लेकिन फिर उसने सोचा कि यह पेड़ उसके लिए बहुत खास है और वह इसे नहीं बेचना चाहता।
रामू ने कहा, "महाराज, मैं इस पेड़ को नहीं बेचना चाहता। यह पेड़ मेरे लिए बहुत कीमती है।"
राजा ने कहा, "मैं तुम्हें बहुत सारे पैसे दूंगा। तुम इस पेड़ को बेच दो।"
रामू ने फिर सोचा और कहा, "महाराज, धन तो आता-जाता रहता है, लेकिन यह पेड़ मेरे लिए बहुत खास है। मैं इसे नहीं बेचूंगा।"
राजा रामू की ईमानदारी और पेड़ के प्रति प्रेम से बहुत प्रभावित हुआ। उसने कहा, "तुम बहुत अच्छे हो, रामू। मैं तुम्हें पेड़ नहीं छीनूंगा। लेकिन मुझे एक वादा करो कि तुम इस पेड़ का फल हमेशा अच्छे लोगों को ही दोगे।"
रामू ने राजा का वादा मान लिया। राजा खुश होकर वहाँ से चला गया। रामू ने भी पेड़ का ख्याल रखा और उसके फलों को गरीबों और जरूरतमंदों को बाँटा।
इस तरह, रामू की ईमानदारी और पेड़ की सुंदरता दोनों ही लोगों के लिए एक आशीर्वाद बन गई।