31/08/2026
मैं थक गया हूं यार....
लेकिन रुक भी नहीं सकता। हर दिन एक नई लड़ाई है... कभी पैसों की, कभी हालात की, कभी अपने ही ख्यालों की
लोग कहते हैं- "सब ठीक हो जाएगा!" पर कोई यह नहीं बताता कि तब तक जीना कैसे है..?
मैं मुस्कुराता हूं, ताकि घर वाले परेशान ना हो। मैं चुप रहता हूं ताकि लोग कमजोर ना समझ लें। अजीब है ना...
जिस उम्र में सुकून ढूंढना चाहिए था, उस उम्र में मैं रास्ते ढूंढ रहा हूं। कभी-कभी लगता है सब छोड़ दूं...
फिर मां का चेहरा याद आ जाता है, और मैं फिर से खड़ा हो जाता हूं। और सच कहूं... मैं जिंदगी से नहीं हरा हूं, बस हर रोज खुद को संभालते-संभालते थोड़ा थक गया हूँ।