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Now we are providing all Pooja Samagri under brand name "सर्व नमामि"

18/08/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 12
नवग्रह पूजा

🌞 सूर्य देव — ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता।
🌙 चन्द्र देव — मानसिक शांति और संतुलन।
🔴 मंगल देव — साहस, शक्ति और सुरक्षा।
🟢 बुध देव — बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता।
🟡 गुरु देव — ज्ञान, धर्म और शुभता।
⚪ शुक्र देव — सौंदर्य, प्रेम और समृद्धि।
⚫ शनि देव — कर्म, न्याय और धैर्य।
🐍 राहु — नकारात्मकता से रक्षा, मानसिक स्पष्टता।
🐉 केतु — मोक्ष, वैराग्य और आत्म‑ज्ञान।

👉 संक्षेप में: नवग्रह पूजा साधक को ऊर्जा, संतुलन, साहस, बुद्धि, ज्ञान, प्रेम, न्याय, स्पष्टता और मोक्ष प्रदान करती है।

17/08/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 12
नवग्रह पूजा

🌞 सूर्य देव — ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता।
🌙 चन्द्र देव — मानसिक शांति और संतुलन।
🔴 मंगल देव — साहस, शक्ति और सुरक्षा।
🟢 बुध देव — बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता।
🟡 गुरु देव — ज्ञान, धर्म और शुभता।
⚪ शुक्र देव — सौंदर्य, प्रेम और समृद्धि।⚫ शनि देव — कर्म, न्याय और धैर्य।
🐍 राहु — नकारात्मकता से रक्षा, मानसिक स्पष्टता।
🐉 केतु — मोक्ष, वैराग्य और आत्म‑ज्ञान।

👉 संक्षेप में: नवग्रह पूजा साधक को ऊर्जा, संतुलन, साहस, बुद्धि, ज्ञान, प्रेम, न्याय, स्पष्टता और मोक्ष प्रदान करती है।

17/08/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 12

नवग्रह पूजा 

🌞 सूर्य देव — ऊर्जा, आत्मविश्वास और सफलता।

🌙 चन्द्र देव — मानसिक शांति और संतुलन।

🔴 मंगल देव — साहस, शक्ति और सुरक्षा।

🟢 बुध देव — बुद्धि, वाणी और व्यापार में सफलता।

🟡 गुरु देव — ज्ञान, धर्म और शुभता।

⚪ शुक्र देव — सौंदर्य, प्रेम और समृद्धि।

⚫ शनि देव — कर्म, न्याय और धैर्य।

🐍 राहु — नकारात्मकता से रक्षा, मानसिक स्पष्टता।

🐉 केतु — मोक्ष, वैराग्य और आत्म‑ज्ञान।

👉 संक्षेप में: नवग्रह पूजा साधक को ऊर्जा, संतुलन, साहस, बुद्धि, ज्ञान, प्रेम, न्याय, स्पष्टता और मोक्ष प्रदान करती है।

02/08/2026

शिव तांडव स्तोत्र

एक प्राचीन, शक्तिशाली संस्कृत भजन है जो परंपरा के अनुसार लंकापति रावण द्वारा भगवान शिव की स्तुति में रचा गया माना जाता है — हालाँकि इसकी वास्तविक रचना-तिथि और लेखक को लेकर विद्वानों में मतभेद है।

पृष्ठभूमि की कथा:

कथा के अनुसार, जब रावण ने कैलाश पर्वत को अपनी भुजाओं से उठाकर हिलाना चाहा, तो शिव ने अपने पैर के अंगूठे से पर्वत को दबा दिया, जिससे रावण की उँगलियाँ उसके नीचे दब गईं। पीड़ा में तड़पते हुए रावण ने तत्काल यह स्तोत्र रचकर शिव की स्तुति की — और प्रसन्न होकर शिव ने उसे मुक्त कर दिया।

काव्य-शैली की विशेषता:

यह पंचचामर छन्द में रचित है — एक ऐसा छन्द जिसकी लय स्वयं ताण्डव नृत्य की गति जैसी तीव्र, झूमती हुई प्रतीत होती है।

इसमें भारी अनुप्रास (यमक-अलंकार) और संयुक्ताक्षरों (जैसे "डमड्डमड्डमड्डमन्" — डमरू की ध्वनि का अनुकरण) का प्रयोग हुआ है, जो शिव के तांडव नृत्य और डमरू-नाद को साक्षात् सुनाई देने जैसा प्रभाव देता है।

31/07/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 11

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गजाननं भूतगणादिसेवितं कपित्थजम्बूफलसारभक्षितम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघ्नेश्वरपादपंकजम्॥
ॐ शांति शांति शांति

वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र :

यह विघ्न निवारण के लिए है, जिसमें गणेश जी से सभी कार्यों को बाधारहित करने की प्रार्थना की जाती है।

गजाननं भूतगणादिसेवितं :

इसमें गणेश जी को माता उमा के पुत्र और शोक-विनाशक रूप में वंदना की गई है।

28/07/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 9

षोडश मातृका मंत्र 

हिंदू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र माना जाता है। 'षोडश' का अर्थ है 'सोलह' और 'मातृका' का अर्थ है 'माताएँ या देवियाँ'। सनातन परंपरा में किसी भी मांगलिक कार्य (जैसे विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञ, मुंडन, या संस्कार) से पहले कुल देवता और पितरों के साथ इन सोलह मातृकाओं की पूजा का विधान है।

​पूजा-विधि और महत्व:

​क्यों की जाती है पूजा? इन सोलह देवियों की पूजा करने से परिवार में वंश की वृद्धि, आरोग्य (उत्तम स्वास्थ्य), ऐश्वर्य और सभी प्रकार की बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

​यह मंत्र सोलह प्रमुख देवियों और शक्तियों का आह्वान करता है, जो जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सुरक्षा प्रदान करती हैं:

26/07/2026

यह महामृत्युंजय मन्त्र है, जिसे हिंदू धर्म में अत्यंत शक्तिशाली, पवित्र और मोक्षदायी माना जाता है।

​उत्पत्ति और संदर्भ:

​यह मंत्र ऋग्वेद (मण्डल 7, सूक्त 59, मन्त्र 1) से लिया गया है। इसे 'रुद्र मन्त्र' या 'मृत्यु-संजीवनी मन्त्र' भी कहा जाता है। यह भगवान शिव को समर्पित है।

​शब्दशः अर्थ:

​ॐ त्र्यम्बकं यजामहे: हम तीन नेत्रों वाले (भगवान शिव) की पूजा करते हैं,

​सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्: जो हमारे जीवन में सुगंध (यश, ज्ञान और आनंद) फैलाते हैं और हमारा पोषण (शारीरिक और आध्यात्मिक शक्ति) करते हैं।

​उर्वारुकमिव बन्धनान्: जिस प्रकार एक ककड़ी (उर्वारुक) पकने के बाद अपनी लता (बंधन) से अनायास ही मुक्त हो जाती है,

​मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्: उसी प्रकार हम भी मृत्यु के बंधनों (अज्ञान, भय और चक्र) से मुक्त हो जाएं, और अमरता (मोक्ष) को प्राप्त हों, हमें उस अमृत से वंचित न रखें।

​इस मंत्र के मुख्य लाभ:

​स्वास्थ्य और दीर्घायु: इसे आरोग्य (स्वास्थ्य) और लंबी आयु के लिए अच

23/07/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 8 E2

देवी देवताओं को भाव-पूर्वक आमंत्रित करेंगे
ताकि वे पूजा स्थल या मूर्ति में आकर विराजमान हों। यह
षोडशोपचार पूजन से पहले अनिवार्य है , आह्वान के बिना देवता का
आगमन नहीं माना जाता। प्रत्येक आह्वान में विराजित देवी देवताओं की ओर फूल और अक्षत अर्पित करते हुए मंत्र
बोलें।

मंत्रोच्चारण के साथ-साथ सभी देवी
देवताओं को तिलक लगाये

23/07/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 8, E2

देवी देवताओं को भाव-पूर्वक आमंत्रित करेंगे
ताकि वे पूजा स्थल या मूर्ति में आकर विराजमान हों। यह
षोडशोपचार पूजन से पहले अनिवार्य है , आह्वान के बिना देवता का
आगमन नहीं माना जाता। प्रत्येक आह्वान में विराजित देवी देवताओं की ओर फूल और अक्षत अर्पित करते हुए मंत्र
बोलें।

मंत्रोच्चारण के साथ-साथ सभी देवी
देवताओं को तिलक लगाये

22/07/2026

श्री महालक्ष्मी पूजा के प्रमुख मंत्र भाग - 8

देवी देवताओं को भाव-पूर्वक आमंत्रित करेंगे
ताकि वे पूजा स्थल या मूर्ति में आकर विराजमान हों। यह
षोडशोपचार पूजन से पहले अनिवार्य है , आह्वान के बिना देवता का
आगमन नहीं माना जाता। प्रत्येक आह्वान में विराजित देवी देवताओं की ओर फूल और अक्षत अर्पित करते हुए मंत्र
बोलें।

मंत्रोच्चारण के साथ-साथ सभी देवी
देवताओं को तिलक लगाये

1.

गणेश जी का आह्वान (सर्वप्रथम अनिवार्य)

ॐ गणानां त्वा गणपतिं हवामहे
कविं कवीनामुपमश्रवस्तमम्।

ज्येष्ठराजं ब्रह्मणां ब्रह्मणस्पत आ नः शृण्वन्नूतिभिः
सीद सादनम्॥

आगच्छ वरद देवेश तेजोराशे
जगत्पते।

सर्वकार्यार्थसिद्ध्यर्थं पूजां गृहाण सुप्रसन्न॥

2.कलश/वरुण देव का आह्वान

ॐ आ जिघ्र कलशं मह्या त्वा
विशन्त्विन्दवः।
पुनरूर्जा नि वर्तस्व सा नो वसूव्ये भव॥

3.नवग्रहों का आह्वान

ॐ ब्रह्मा मुरारिस्त्रिपुरान्तकारी
भानुः शशी भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्रः शनिराह�

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