25/06/2026
हरी-भरी मेरी सुंदर काया,
झाड़ियों और पेड़ों पर मैंने डेरा जमाया।
हाथ जैसी उठी हैं मेरी पत्तियां प्यारी,
मुझसे डरती है स्वाद के शौकीनों की दुनिया सारी।
तन पर हैं मेरे छोटे-छोटे कांटे और उभार,
मुझको खाकर सेहत बनती, भागे सब बुखार।
कड़वा है मेरा नाम, पर गुण हैं मेरे बड़े महान,
बूझो तो जानें, क्या है मेरी पहचान?