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04/09/2026



ARYANS HUB की "क्या आप जानते हैं?" श्रृंखला का जन्माष्टमी स्पेशल — एपिसोड 52 शुरू करते हैं:

​शीर्षक: श्रीकृष्ण के दिव्य प्रतीक — पांचजन्य, सुदर्शन, कौमोदकी और गरुड़ध्वज रथ का अनकहा रहस्य!

​🚩 क्या आप जानते हैं? योगेश्वर श्रीकृष्ण केवल एक ऐतिहासिक महानायक नहीं, बल्कि चेतना, ब्रह्मांडीय ऊर्जा और रणनीति के सर्वोच्च प्रतीक हैं।

महाभारत और पुराणों में उनके हर अस्त्र, वाहन और आभूषण का एक विशिष्ट वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक आधार है!

​दिव्य शंख — 'पांचजन्य':
​श्रीकृष्ण के शंख का नाम पांचजन्य था, जिसे उन्होंने पंचजन नामक असुर का संहार कर प्राप्त किया था।

​इसकी ध्वनि इतनी प्रचंड और विशिष्ट आवृत्ति (Frequency) की थी कि रणभूमि में यह पांडव सेना में नवऊर्जा का संचार करती थी और अधर्मियों के हृदय को कम्पित कर देती थी।

​अमोघ चक्र — 'सुदर्शन':
​यह केवल एक भौतिक अस्त्र नहीं, बल्कि ऊर्जा का घूर्णन करता चक्र था, जिसके नाम का अर्थ है—"सत्य और शुभ दृष्टि देने वाला"।

​इसे भगवान शिव ने ऊर्जा के तेज से निर्मित किया था, जो लक्ष्य को भेदकर पुनः स्वामी के हाथ में वापस लौटने की अचूक क्षमता रखता था।

​गदा और धनुष — 'कौमोदकी' व 'शार्ङ्ग':
​श्रीकृष्ण की दिव्य गदा का नाम कौमोदकी (बुद्धि और चेतना का प्रतीक) है।
​उनके दिव्य धनुष का नाम शार्ङ्ग था, जिससे वे अद्वितीय संधान करते थे।

​रथ, सारथी और अश्व:

​उनके रथ का नाम गरुड़ध्वज (जैत्र) था, जिसके सारथी का नाम दारुक था (महाभारत युद्ध में स्वयं कृष्ण अर्जुन के सारथी 'पार्थसारथी' बने थे)।

​उनके रथ के चार प्रमुख दिव्य घोड़ों के नाम थे—शैव, सुग्रीव, मेघपुष्प और बलाहक।

​🚩 आज का मुख्य संदेश: "भगवान श्रीकृष्ण का जीवन हमें सिखाता है कि शस्त्र और शास्त्र दोनों का संतुलन ही धर्म की वास्तविक रक्षा करता है। जब आंतरिक चेतना जाग्रत होती है, तभी जीवन के हर युद्ध में विजय संभव है!"

​POST CAPTION: "जन्माष्टमी के पावन अवसर पर जानिए भगवान श्रीकृष्ण के शंख, चक्र, रथ और सारथी के दुर्लभ रहस्य! क्या आप जानते हैं उनके दिव्य घोड़ों और गदा का नाम? देखिए 'क्या आप जानते हैं?' का विशेष जन्माष्टमी एपिसोड (एपिसोड 52)! जय श्री कृष्ण! 🚩"आर्यन

   #श्रीकृष्ण_जन्माष्टमीआज कृष्ण की जन्मतिथि है ...जिसे हम कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते है...कृष्ण का  वर्णन नहीं क...
04/09/2026



#श्रीकृष्ण_जन्माष्टमी

आज कृष्ण की जन्मतिथि है ...जिसे हम कृष्ण जन्माष्टमी के रूप में मनाते है...कृष्ण का वर्णन नहीं किया जा सकता क्योंकि कृष्ण एक महासागर है..फिर भी मेरी एक छोटी सी कोशिश उन्हें कुछ शब्दों में समेटने की जिसे एक कविता का रूप मैने दिया है.....आपके विचारों का मुझे कमेंट के रूप में इंतजार रहेगा

यह कविता भगवान श्री कृष्ण के जन्म, बचपन, कुरुक्षेत्र और उनके अंत (महानिर्वाण) के चक्र को बयां करती है:

"शून्यता से अनंत तक: कृष्ण गाथा"
******************

कारागार के अंधियारे में, जो दिव्य प्रकाश सा उतरा था,
भाद्रपद की उस आधी रात,
यमुना का पानी उफन रहा था।

वासुदेव की टोकरी में,
जो बनकर आया नन्हा बाल,
गोकुल की गलियों में गूंजा,
"जय कन्हैया लाल की!"

वो माखन चोर,
वो नटखट कान्हा,
यशोदा की आंखों का तारा,
जिसके एक छोटे से मुख में,
ब्रह्मांड दिखा था सारा।

कालिया नाग का मान मर्दन,
उंगली पर गोवर्धन उठाना,
गोपियों संग रास रचाकर, प्रेम का असली अर्थ बताना।

पर वो लीलाधर कहाँ रुकता,
उसे तो धर्म स्थापना करनी थी,
मथुरा जाकर कंस को मारा,
उग्रसेन की चिंता हरनी थी।

छोड़ आए वो पीछे वृंदावन,
छोड़ आए वो बंसी की तान,
द्वारकाधीश बन रच डाली,
एक नई नगरी आलीशान।

महाभारत के उस महायुद्ध में,
अर्जुन का वो सारथी बना,
रणभूमि के बीच खड़े हो, गीता का उपदेशक महान बना।

दिखा दिया विराट रूप अपना,
जीवन-मृत्यु का सत्य कहा,
"कर्म किए जा,
फल की चिंता मत कर", यह शाश्वत ज्ञान वहाँ बहा।

बीते युग और बदली लीला,
यदुवंश का जब अंत आया,
गांधारी के उस श्राप ने, नियति का पहिया घुमाया।

एक साधारण से प्रभास क्षेत्र में,
पीपल वृक्ष की छांव तले,
एक बहेलिए के तीर को निमित्त बना,
प्रभु अपने अंतिम रूप में मिले।

वो अंत नहीं था,
वो तो बस लीला का विश्राम था,
सगुण रूप को त्याग कर, वो फिर से हुआ अंतर्धान था।

जन्मे जो आधी रात को, वो अंत में भी अनंत रहे,
घट-घट में वास है जिनका,
वो आदि और अनिरुद्ध रहे।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी की आप सभी मित्रो को हार्दिक शुभकामनाए.........आर्यन

03/09/2026

...रुकिए मित्र ..जानिए अपने देश की हकीकत को ..जिसे पश्चिमी दुनिया अपना कहती है डर असल ओ भारत की खोज है..



"ये भारत की बात है" श्रृंखला का एपिसोड 99 शुरू करते हैं।

​प्राचीन भारतीय गणित और खगोल विज्ञान के इस स्वर्णिम सफर में आज का विषय है—भास्कराचार्य द्वितीय (Bhaskaracharya II) और उनका कालजयी ग्रंथ 'सिद्धांत

शिरोमणि' (लीलावती व बीजगणित) — न्यूटन और लाइबनिज से 500 वर्ष पूर्व कलन (Calculus/Differential Calculus), अनन्त (Infinity), और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का विस्तार:

​शीर्षक: भास्कराचार्य द्वितीय — न्यूटन से 500 वर्ष पूर्व डिफरेंशियल कैलकुलस (तत्कालिक गति) और अनंत (\infty) के जनक!

​🚩 क्या आप जानते हैं? 12वीं शताब्दी (1114–1185 ईस्वी) के महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री भास्कराचार्य द्वितीय ने मात्र 36 वर्ष की आयु में 'सिद्धांत शिरोमणि' ग्रंथ की रचना की थी। आधुनिक गणित में जिस कैलकुलस का श्रेय आइजक न्यूटन और गॉटफ्रीड लाइबनिज को दिया जाता है, उसकी मूल अवधारणा भास्कराचार्य ने 500 वर्ष पूर्व ही खोज ली थी!

डिफरेंशियल कैलकुलस और 'तात्कालिक गति' (Instantaneous Motion):
​आधुनिक कैलकुलस में किसी क्षण विशेष पर गति नापने के लिए डेरिवेटिव (dy/dx) का उपयोग होता है।

​भास्कराचार्य ने ग्रहों की सूक्ष्म गति को मापने के लिए 'तात्कालिक गति' (Instantaneous Velocity) की अवधारणा दी और स्पष्ट किया कि जब समय का अंतर लगभग शून्य के करीब हो, तो गति का परिवर्तन कैसे निकाला जाता है—जो आधुनिक डिफरेंशिएशन का आधार है।

रोल की प्रमेय और त्रिकोणमिति (Rolle's Theorem & Trigonometry):
​गणित में प्रसिद्ध 'रोल प्रमेय' (Rolle's Theorem) से सदियों पहले भास्कराचार्य ने बताया था कि जब कोई फलन अपने उच्चतम बिंदु पर पहुँचता है, तो उसका अवकलज (Differential) शून्य हो जाता है।
​उन्होंने \sin(a+b) और \sin(a-b) जैसे त्रिकोणमितीय सूत्रों का सटीक निरूपण किया था।

शून्य से विभाजन और अनंत की अवधारणा (Concept of Infinity):
ब्रह्मगुप्त के कार्यों को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने सिद्ध किया कि किसी भी संख्या को शून्य से भाग देने पर परिणाम 'अनंत' (खहर/Infinity) होता है:
\frac{a}{0} = \infty
उन्होंने अद्भुत दार्शनिक उदाहरण देते हुए लिखा कि जैसे अनंत परमात्मा में अनंत ब्रह्मांडों के मिलने या निकलने से कोई परिवर्तन नहीं होता, वैसे ही 'खहर' (अनंत) में कुछ भी जोड़ने या घटाने पर वह अनंत ही रहता है।

गुरुत्वाकर्षण का सुदृढ़ सिद्धांत:
​उन्होंने अपने ग्रंथ में स्पष्ट लिखा कि "पृथ्वी में स्वाभाविक आकर्षण शक्ति (Gravity) है, जिसके कारण वह आकाश में स्थित किसी भी भारी वस्तु को अपने बल से अपनी ओर खींच लेती है।"🚩

आज का मुख्य संदेश: "भास्कराचार्य का गणित यह प्रमाणित करता है कि भारत ने दुनिया को केवल प्रारंभिक अंक नहीं दिए, बल्कि उच्च स्तर की आधुनिक गणित (Advanced Calculus & Analysis) की नींव भी इसी पवित्र भूमि पर रखी गई थी!"
​POST CAPTION: "क्या आप जानते हैं कि न्यूटन से 500 साल पहले भास्कराचार्य ने कैलकुलस (Differential Calculus) और अनंत (\infty) का रहस्य खोज लिया था? जानिए भारत के महान गणितज्ञ का गौरवशाली सच! देखिए 'वेदों का ब्रह्मांडीय विज्ञान' (एपिसोड 99)! 🚩आर्यन

03/09/2026

...रुकिए बंधु...अगर आपका जन्म 3,12,21 या 30 तारीख को हुआ है तो ये लेख आपके लिए है..एक बार जरूर जान लीजिए शायद कुछ काम की बात पता लग जाए ...


ARYANS HUB की "क्या आप जानते हैं?" श्रृंखला का एपिसोड 51 प्रस्तुत है।

​आज का विषय है मूलांक 3 (बृहस्पति/गुरु का अंक) — ज्ञान, विवेक, वाक-पटुता और विस्तार (Expansion) का कॉस्मिक कोड:

​शीर्षक: मूलांक 3 (3, 12, 21, 30 को जन्मे लोग) — देवगुरु बृहस्पति की ऊर्जा, अगाध ज्ञान और रचनात्मक विस्तार का ब्रह्मांडीय कोड!

​🚩 क्या आप जानते हैं? गणित और ज्यामिति में '3' पहली संख्या है जिससे एक पूर्ण बंद आकृति यानी त्रिभुज (Triangle) का निर्माण होता है, जो स्थिरता और संतुलन का प्रतीक है। किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को जन्मे व्यक्तियों पर सौरमंडल के सबसे बड़े और शुभ ग्रह बृहस्पति (Jupiter) का सीधा प्रभाव होता है!

​जन्मजात शिक्षक, मार्गदर्शक और ज्ञान-पिपासु:

​मूलांक 3 के जातक स्वाभाविक रूप से ज्ञानी, दार्शनिक और दूरदर्शी होते हैं।

​ये जीवनभर नई चीजें सीखने और दूसरों को सिखाने में आनंद महसूस करते हैं।
शिक्षण, काउंसलिंग, साहित्य, शोध और प्रबंधन में इनकी बौद्धिक क्षमता अद्वितीय होती है।

​अद्भुत वाक-शक्ति और आशावादी दृष्टिकोण:

​इनकी संवाद कला (Communication Skills) इतनी प्रभावी होती है कि ये अपने तर्कों और ज्ञान से किसी को भी सहज ही प्रभावित कर लेते हैं।

​इनका दृष्टिकोण सदैव आशावादी, गरिमामय और नैतिक मूल्यों (Ethics) से परिपूर्ण रहता है।
​संतुलन और आत्म-विकास की कुंजी:
​बृहस्पति की ऊर्जा विस्तार की प्रतीक है, जिससे कभी-कभी अत्यधिक खर्च करने, कई कार्यों को एक साथ शुरू कर अधूरा छोड़ने या उपदेशात्मक स्वभाव की प्रवृत्ति आ सकती है।
​जब ये अनुशासन, एकाग्रता और आत्म-संयम अपनाते हैं, तो समाज में सर्वोच्च आदर और गुरु-तुल्य स्थान प्राप्त करते हैं।

​🚩 आज का मुख्य संदेश:

"संख्या 3 सिखाती है कि सच्चा ज्ञान वही है जो अहंकार को समाप्त कर जीवन में विनम्रता, विस्तार और दूसरों का मार्गदर्शन करने की क्षमता लाए!"

​POST CAPTION: "क्या आप किसी भी महीने की 3, 12, 21 या 30 तारीख को जन्मे हैं? जानिए मूलांक 3 और देवगुरु बृहस्पति की ऊर्जा आपके ज्ञान, करियर और व्यक्तित्व को कैसे दिशा देती है! देखिए 'क्या आप जानते हैं?' का 51वां एपिसोड! 🚩"....आर्यन

02/09/2026

...रुकिए मित्र ...जान लीजिए अपने भारत के ज्ञान को जिसे पश्चिम अपना कहता है...

ये भारत की बात है — श्रृंखला: वेदों का ब्रह्मांडीय विज्ञान (एपिसोड 98)

​शीर्षक: आचार्य ब्रह्मगुप्त — शून्य (Zero) को गणितीय स्वरूप देने वाले विश्व के पहले गणितज्ञ और न्यूटन से 1000 वर्ष पूर्व गुरुत्वाकर्षण की सटीक परिभाषा!

​🚩 क्या आप जानते हैं? 7वीं शताब्दी (598–668 ईस्वी) में राजस्थान के भीनमाल में जन्मे आचार्य ब्रह्मगुप्त ने 628 ईस्वी में 'ब्राह्मस्फुटसिद्धान्त' की रचना की। वे विश्व के पहले ऐसे गणितज्ञ थे जिन्होंने शून्य (0) को केवल एक रिक्त स्थान नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र संख्या और संक्रिया (Mathematical Operation) के रूप में स्थापित किया!

​शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के नियम (Rules of Zero & Negative Numbers):

​ब्रह्मगुप्त ने पहली बार धन (Positive), ऋण (Negative) और शून्य (Zero) के जोड़, घटाव और गुणा के स्पष्ट बीजगणितीय नियम दिए।
​उन्होंने स्पष्ट लिखा: "धन और धन का गुणन धन होता है, ऋण और ऋण का गुणन धन होता है, और किसी भी संख्या को शून्य से गुणा करने पर शून्य प्राप्त होता है।"

​न्यूटन से 1000 वर्ष पूर्व गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत (Law of Gravity):

​सर आइजक न्यूटन से एक सहस्र वर्ष पहले ब्रह्मगुप्त ने अपने ग्रंथ में लिखा:
​"कुबेरं प्रति गच्छन्ती पृथ्वी आकर्षणस्वभावात्। यतो जलस्य स्वभावो वहनं वह्नेरुष्णत्वं तथा पृथिव्या आकर्षणम्॥"
​अर्थात् जैसे पानी का स्वभाव बहना और अग्नि का स्वभाव भस्म/ऊष्मा देना है, वैसे ही पृथ्वी का स्वाभाविक गुण वस्तुओं को अपनी ओर आकर्षित करना (खींचना) है। पिंड पृथ्वी पर इसलिए गिरते हैं क्योंकि खींचना पृथ्वी का नैसर्गिक स्वभाव है।

​चक्रीय चतुर्भुज और पेल्स समीकरण (Brahmagupta's Formula & Pell's Equation):

​किसी चक्रीय चतुर्भुज (Cyclic Quadrilateral) के क्षेत्रफल का सूत्र (A = \sqrt{(s-a)(s-b)(s-c)(s-d)}) पश्चिमी गणित से सैकड़ों वर्ष पूर्व ब्रह्मगुप्त ने दिया।
​अनिर्धार्य द्विघात समीकरण (Nx^2 + 1 = y^2), जिसे आज पश्चिम 'पेल्स इक्वेशन' (Pell's Equation) कहता है, उसे हल करने की 'वर्गप्रकृति' और 'भावना विधि' ब्रह्मगुप्त ने ही खोजी थी

​🚩 आज का मुख्य संदेश: "आचार्य ब्रह्मगुप्त का ज्ञान यह प्रमाणित करता है कि आधुनिक अंकगणित, बीजगणित और भौतिकी की सबसे बुनियादी नींव रखने वाला मस्तिष्क भारत का था। भारत ने दुनिया को केवल शून्य नहीं दिया, बल्कि शून्य को गणना में उपयोग करने का संपूर्ण विज्ञान भी दिया!"

​💡 POST CAPTION: "क्या आप जानते हैं कि न्यूटन से 1000 साल पहले आचार्य ब्रह्मगुप्त ने गुरुत्वाकर्षण की परिभाषा दी थी और शून्य के गणितीय नियम बनाए थे? जानिए भारत के महान गणितज्ञ का गौरवशाली सच! देखिए 'वेदों का ब्रह्मांडीय विज्ञान' (एपिसोड 98)! 🚩"आर्यन

02/09/2026

I got over 100 reactions on my posts last week! Thanks everyone for your support! 🎉

02/09/2026

...रुकिए बंधु...मित्रवर आज मेरे इस ...क्या आप जानते है..की श्रृंखला का स्वर्ण जयंती एपिसोड है...आपलोगों का दिल से धन्यवाद ...और आज का एपिसोड उनके लिए है जिनका जन्म ..2,11,20 या 29 तारीख को हुआ है...तो जान लीजिए अपने बारे में ...

ARYANS HUB — श्रृंखला: क्या आप जानते हैं? (एपिसोड 50)

​शीर्षक: मूलांक 2 (2, 11, 20, 29 को जन्मे लोग) — चंद्रमा की ऊर्जा, अद्वितीय अंतर्ज्ञान और भावनात्मक शक्ति का ब्रह्मांडीय कोड!

​🚩 क्या आप जानते हैं? अंक-विज्ञान में संख्या '2' द्वैत, संतुलन, संवेदनशीलता और सामंजस्य का प्रतीक है। किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्मे लोगों का स्वामी चंद्रमा (Moon) होता है, जो मन, भावनाओं और अचेतन शक्तियों का कारक है!

​गहरा अंतर्ज्ञान और कल्पनाशक्ति (High Intuition & Creativity):

​मूलांक 2 के जातकों की 'सिक्स्थ सेंस' (Sixth Sense) अत्यंत तीव्र होती है; ये सामने वाले के इरादों और वातावरण की ऊर्जा को बिना कहे भांप लेते हैं।

​कला, संगीत, लेखन, काउंसलिंग और कूटनीति (Diplomacy) में इनकी रचनात्मकता अद्वितीय होती है।

​शांतिप्रिय और स्वाभाविक मध्यस्थ (Peace Lovers & Peacemakers):

​ये टकराव और विवाद से दूर रहकर बातचीत और समझदारी से मसले सुलझाने में विश्वास रखते हैं।
​इनका हृदय अत्यंत कोमल, सहयोगी और दूसरों के सुख-दुख को गहराई से महसूस करने वाला होता है।

​संतुलन और आत्म-विकास की कुंजी (Cosmic Advice):

​चंद्रमा की तरह इनके विचारों में उतार-चढ़ाव (Mood Swings) और अत्यधिक भावुकता की संभावना रहती है।
​जब ये प्राणायाम, जल-तत्व के संतुलन और मानसिक दृढ़ता पर काम करते हैं, तो इनकी संवेदनशीलता कमजोरी नहीं बल्कि दुनिया को जोड़ने वाली सबसे बड़ी ताकत बन जाती है।

​🚩 आज का संदेश: "संख्या 2 सिखाती है कि विनम्रता और प्रेम कोई कमजोरी नहीं, बल्कि इस अशांत संसार को शांत करने वाली सबसे शक्तिशाली आध्यात्मिक ऊर्जा है!"

​💡 पोस्ट कैप्शन (Caption): "क्या आप किसी भी महीने की 2, 11, 20 या 29 तारीख को जन्मे हैं? जानिए मूलांक 2 और चंद्रमा की ऊर्जा आपके स्वभाव, सोच और अंतर्ज्ञान को कैसे चलाती है! देखिए 'क्या आप जानते हैं?' का ५०वां स्वर्ण एपिसोड!....आर्यन 🚩"

01/09/2026

...रुकिए मित्र ...हम सबने पढ़ा है कि गुरुत्वाकर्षण बल की खोज Sir isac netwan ने की थी .लेकिन क्या ये सच है...जान लीजिए आज



ये भारत की बात है —

श्रृंखला: वेदों का ब्रह्मांडीय विज्ञान (एपिसोड 97)
​शीर्षक: आचार्य वराहमिहिर — न्यूटन से 1100 वर्ष पूर्व गुरुत्वाकर्षण का संकेत, जल-भूगर्भ विज्ञान (Hydrology) और कॉस्मिक क्लाइमेटोलॉजी के जनक!

​🚩 क्या आप जानते हैं? 6ठी शताब्दी (505–587 ईस्वी) के महान भारतीय वैज्ञानिक आचार्य वराहमिहिर ने अपनी प्रसिद्ध रचनाओं 'पंचसिद्धान्तिका' और 'बृहत्संहिता' में ऐसे वैज्ञानिक सिद्धांतों का प्रतिपादन किया था, जिन्हें पश्चिमी विज्ञान ने सदियों बाद खोजा!

​आकर्षण शक्ति और आकाशीय पिंडों का संतुलन (Early Gravitational Force):

​न्यूटन से लगभग 1100 वर्ष पूर्व वराहमिहिर ने उल्लेख किया था कि ब्रह्मांड में एक ऐसी अदृश्य आकर्षण शक्ति कार्य करती है, जो पृथ्वी को अंतरिक्ष में स्थिर और संतुलित रखती है तथा सभी भौतिक वस्तुओं को अपनी ओर खींचकर बांधे रखती है।

​जल-भूगर्भ विज्ञान और वृक्षायुर्वेद (Hydrology & Ground Water Detection):

​बृहत्संहिता के 'दकार्गल' (Dakargala) अध्याय में उन्होंने बिना किसी आधुनिक सोनार या रडार के, केवल भूमि की बनावट, वनस्पतियों की जड़ों, दीमक की बांबी (Termite Mounds) और वृक्षों के लक्षणों को देखकर भूजल (Groundwater) का सटीक स्तर और दिशा बताने का अचूक विज्ञान दिया।

​प्रकाशिकी और ग्रहों का परावर्तन (Optics & Reflected Light):
​वराहमिहिर ने स्पष्ट किया कि चंद्रमा और अन्य ग्रह स्वयं प्रकाशमान नहीं हैं, बल्कि वे सूर्य के प्रकाश के परावर्तन (Reflection of Sunlight) के कारण चमकते हैं।
​उन्होंने प्रकाश के कणों और बादलों के निर्माण के भौतिक कारणों (Meteorology) का भी अत्यंत सूक्ष्म वैज्ञानिक विवरण प्रस्तुत किया।

​🚩 आज का मुख्य संदेश: "आचार्य वराहमिहिर का विज्ञान यह प्रमाणित करता है कि भारत का ज्ञान केवल अमूर्त सिद्धांतों तक सीमित नहीं था, बल्कि वह प्रकृति, पर्यावरण और ब्रह्मांड के हर भौतिक नियम को व्यावहारिक रूप से समझने वाला संपूर्ण विज्ञान था!"

​💡 POST CAPTION: "क्या आप जानते हैं कि न्यूटन से 1100 साल पहले आचार्य वराहमिहिर ने गुरुत्वाकर्षण और भूजल खोजने के अचूक वैज्ञानिक नियम दिए थे? जानिए प्राचीन भारत के महान बहुमुखी वैज्ञानिक का सच! देखिए 'वेदों का ब्रह्मांडीय विज्ञान' (एपिसोड 97)!

🚩"आर्यन

01/09/2026

With Kajal Kumari – I just made it onto their weekly engagement list by being one of their top engagers! 🎉

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