13/10/2022
From Shweta Suhag’s wall.
FUNDRAISER FOR NITISH
नीतीश एक साधारण लड़का नहीं था, महज़ 22 वर्ष की आयु में अपनी जीवन यात्रा को इतना शानदार बनाने वाला कुछ भी हो सकता है, साधारण नहीं।
मैं SDM खरखौदा के पद पर कार्यरत थी जब पहली बार उससे मिली। वो अपने गाँव ‘मटिंडु’ की प्रमुख गलियों का नामकरण महान स्वतंत्रता सेनानियों के नामों पर करना चाहता था और इस संदर्भ में जानकारी लेने आया था।
इसके बाद के 3 सालों में ऑन एंड ऑफ़ उससे मिलना होता रहा, वो लगातार ज़रूरतमंद व कम पढ़े-लिखे लोगों की ‘ऐप्लिकेशन’ लिखकर ऑफ़िस लाता और उनकी समस्या हल करवाने की पुरज़ोर कोशिश करता। इस दौरान उसने सैकड़ों पेड़-पौधे भी लगाए। क्षेत्रीय समाचार पत्रों में उसके द्वारा किए कार्यों की खबरें छपती रहती थी।
मुझे याद आता है कि नीतीश और उसके दोस्तों ने खरखौदा उपमंडल की ‘monthly magazine’ की शुरुआत की थी जिसमें स्थानीय लोगों की उपलब्धियों के साथ, वहाँ के इतिहास व समस्याओं का उल्लेख भी होता था।
इस बीच मेरा ट्रान्स्फ़र दूसरे ज़िले में हो चुका था, पर नीतीश की ‘अचीवमेंट्स’ की सुखद खबरें मिलती रहती थी।
एक रोज़ किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में नीतीश से मिलना हुआ तो उसने बताया कि उसे उसकी ‘calling’ मिल गयी है, और अब वो ‘mountaineering’ शुरू करेगा। उसके शब्दों में- माउंट एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराना उसका ‘ultimate dream’ था। जल्द ही पेड़-पौधे लगाने की खबरों का स्थान, ऊँची चोटियाँ नाप कर बने वर्ल्ड रिकोर्ड के समाचारों ने ले लिया। नीतीश चार दिन में दो बार माउंट किलिमांजारो स्केल करने वाला विश्व का सबसे कम उम्र का, व भारत का पहला पर्वतारोही बना। नीतीश, जून, 2022 में माउंट एवेरेस्ट पर पहुँचने में सफ़ल रहा, अपना एक और ख़्वाब उसने पूरा किया।
बीते सप्ताह नीतीश अपने ग्रुप के साथ ‘द्रौपदी का डाँडा-II’ पीक फ़तह कर नीचे लौटते समय एक भयानक ऐवलाँच की चपेट में आया और क़रीब 80 फ़ीट गहरे क्रेवास में जा गिरा; ग्लेशीयर की बर्फ़ में ग़हरी दरार को क्रेवास कहते हैं। 4 दिन के सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद उसे बाहर निकाला गया, मृत।
नीतीश बच नहीं पाया। अब वह साधारण लड़का होता तो बच भी सकता था क्योंकि साधारण लड़के 22 साल की उम्र में मौज मस्ती छोड़ ´दुर्ग़म ऊँचाइयों´ में नहीं जाते; साधारण लड़कों की अंतिम इच्छा यह नहीं होती कि उनका शव तिरंगे में लपेटा जाए; ना ही साधारण लड़के किसी अनजान गरीब बुढ़िया की पेन्शन दोबारा चालू कराने की ख़ातिर दफ़्तरों के चक्कर काटते हैं। नीतीश साधारण नहीं था। कुछ घटनाएँ ईश्वर के अस्तित्व पर सवालिया निशान छोड़ जाती हैं।
आज उस गाँव में नीतीश के नाम के नारे लग रहे थे। हर युवा नीतीश की तरह एवेरेस्ट पर तिरंगा फहराना चाहता था और हर माँ-बाप उनके ऐसा सोचने पर भी प्रतिबंध लगाना चाहता था। नीतीश 22 वर्ष में ही इतना सब कर गया जितना एक औसत इंसान अपने पूरे जीवन में नहीं कर पाता ।
Mt. Everest Expedition के लिए परिवार को कुछ लोन भी लेना पड़ा था जो अब भी बक़ाया है । नीतीश के पिता राजबीर एक साधारण किसान हैं, पता नहीं इकलौते बेटे की चिता को अग्नि देने के बाद उन हाथों में खेती करने की कितनी ताक़त बचेगी। नीतीश की माँ और दो बहनें तो शायद ही इस सदमे से कभी बाहर आ पाएँ।
नीतीश को वापस नहीं लाया जा सकता, परिवार में उसकी कमी भी पूरी नहीं की जा सकती, लेकिन शायद हमारे financial support से उनका भौतिक जीवन कुछ हद तक सरल हो सकता है।
यह प्रयास है नीतीश जैसे युवाओं को विश्वास दिलाने का, ताकि वो कुछ बड़ा करने के सपने देखना इसलिए ना छोड़ें कि ‘उनको कुछ हुआ तो उनके परिवार का क्या होगा’; विश्वास दिलाने का— कि उनके परिवार को असहाय नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि सारा समाज उनके साथ खड़ा होगा।
नीतीश कि परिवार ने काफ़ी दुविधाओं के साथ इस fundraiser post की अनुमति दी है, आप सबसे निवेदन है कि fund raise करने में मदद करें या ना करें, बस ऐसा कुछ लिखने से बचें जिसे पढ़ कर नीतीश के परिवार को लगे कि ‘क्या यही वो समाज है जिसके लिए नीतीश अपना जीवन खर्च करना चाहता था?!’
Name- Rajbir Singh (Nitish’s Father)
Account No.- 50100545979997
IFSC- HDFC0003736
UPI ID- dahiyas1970@okhdfcbank
Phone Pay, Google Pay-8684838685
For general queries- +917404506531
Address- Rajbir Singh, vpo Matindu, Kharkhoda, Sonipat 131402
Shweta Suhag