10/10/2026
बस आज कुछ यूं ही ...
आज अपनी पुरानी तस्वीर के सामने बैठी, तो लगा,
दो उम्रें आपस में बात कर रही हैं।
उसने पूछा— “जिन ख़्वाबों को लेकर चली थी, उनका क्या हुआ?”
मैं मुस्कुराई— “कुछ पूरे हुए, कुछ की चाह बदल गई,
और कुछ आज भी मुझे जीने की वजह देते हैं।”
फिर मैंने पूछा— “तुम्हारी वह बेफ़िक्र हँसी कहाँ से लाऊँ?”
वह बोली— “हर बात का हिसाब रखना छोड़ दो, मैं अब भी तुम्हारे भीतर ही रहती हूँ।”