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यह विधारा का पौधा है।घाव के लिए इससे अच्छी औषधि शायद ही कोई दूसरी हो।पुराने से पुराने  #घाव एवं  #शोथ  #सूजन को बहुत जल्...
07/11/2023

यह विधारा का पौधा है।घाव के लिए इससे अच्छी औषधि शायद ही कोई दूसरी हो।

पुराने से पुराने #घाव एवं #शोथ #सूजन को बहुत जल्दी ठीक करने वाली वनस्पति हैं | इसके जड़ #बलवर्धक होता हैं
ऐसा घाव जिससे पानी बहता हो #पस आता हो घाव ठीक होने का कोई लक्षण नज़र नहीं आ रहा हो तब इस #विधारा के पत्ते के ऊपरी सतह कप घाव पर बाँधने इसके #क्वाथ से घाव धोने से चंद दिनों में ही #घाव ठीक होने लगती हैं, मेरा आजमाया हैं|

घाव का #गांठ जो फूटा नहीं हो इसके लिए #विधारा के पत्ते का रोमस (निचला परत)बाँधने से गांठ फुट कर बह जाता हैं ||
पशुपालक भाइयों के लिए यह पौधा वरदान से कम नहीं है।

विधारा के बीज पौधे एवं जड़ के लिए संपर्क करें।
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अगर आप जानना चाहते हो कि 🔴  दुनिया के सबसे बुजुर्ग इंसान का आखिर वह कौन-सा सेहत का राज था जिसकी वजह से वह 152 साल जिंदा ...
25/10/2023

अगर आप जानना चाहते हो कि
🔴 दुनिया के सबसे बुजुर्ग इंसान का आखिर वह कौन-सा सेहत का राज था जिसकी वजह से वह 152 साल जिंदा रहा।
🔴 12 शानदार जडी-बूटियां जो आपके पाचन तंत्र को पत्थर सा मजबूत बना सकती हैं
🔴लीवर, खून और शरीर के हर अंग को आप कैसे शुद्ध कर सकते हो?
🔴40 साल की उम्र के बाद भी आप वैज्ञानिक रूप से सिद्ध एक खास अद्भुत जडी-बूटियां से कैसे पतले हो सकते हो?
🔴 5 मिनट का प्राचीन भारत का आसान-सा तरीका आपके चेहरे की झुरीयों को गायब कर सकता है और आपका चेहरे पर निखार ला सकता है।
🔴 एक ऐसा चौंका देने वाला कारण जिसकी वजह से आपके वजह घटाने के महंगे से महंगे प्रोग्राम भी फैल हो जायेंगे!
🔴 एक ऐसा राज जो आपके पाचन तंत्र को चरबी पिघला देने वाली मशीन में बदल सकता है!
🔴 एक ऐसी जडी बूटी जो आपके लीवर को बचा सकती है अगर आप अल्कोहोल का सेवन करते हैं।
🔴 आंतों में फंसे विषैले पदार्थ को बाहर करने का आयुर्वेदिक तरीका और कब्ज,गैस और जलन से हमेशा के लिये छुटकारा कैसे पाये!
तो ये जानकारी आपकी जिंदगी की अब तक की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी होगी।

20/10/2023
दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान #नागफनी को संस्कृत भाषा में वज्रकंटका कह...
19/10/2023

दुनिया में यह पौधा है, ईश्वर का वरदान, इसके औषधीय गुण जानकर डॉक्टर भी हैं हैरान

#नागफनी को संस्कृत भाषा में वज्रकंटका कहा जाता है . इसका कारण शायद यह है कि इसके कांटे बहुत मजबूत होते हैं .

पहले समय में इसी का काँटा तोडकर कर्णछेदन कर दिया जाता था .इसके Antiseptic होने के कारण न तो कान पकता था और न ही उसमें पस पड़ती थी . कर्णछेदन से hydrocele की समस्या भी नहीं होती।

नागफनी फल का हिस्सा flavonoids, टैनिन, और पेक्टिन से भरा हुआ होता है नागफनी के रूप में इसके अलावा संरचना में यह जस्ता, तांबा, पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, फास्फोरस, मोलिब्डेनम और कोबाल्ट शामिल है।

आज हम आप लोगों को नागफनी के बारे में बहुत ही महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूँ। नागफली का पौधा काँटों युक्त होता है। नागफली की खेती मुख्य रूप से राजस्थान व गुजरात में की जाती है।

इसका प्रयोग सब्जी के रूप में भी किया जाता है, क्योंकि इस पौधे की सब्जी में बहुत से पौष्टिक तत्व पाए जाते हैं। यह पौधा औषधीय गुण से भरपूर होता है।

इस पौधे में विटामिन A, विटामिन B 6, विटामिन C और विटामिन K से भरपूर होता है। इस पौधे का स्वाद कड़वा व बहुत ही गर्म तासीर का होता है। इस पौधे में एंटीसेप्टिक गुण पाया जाता है।

नागफनी नीचे दिए गए रोगों के लिए वरदान होती है। नागफनी में कांटे होने के कारण इसे संस्कृत भाषा में वज्रकंटका भी कहा जाता है।

नागफनी के चमत्कारी फायदे

1-नागफनी एक रेशेदार सब्जी है जिसमे फाइबर अधिक मात्रा में होता है फाइबर आँतो के ठीक से काम करने के लिए बहुत जरुरी होता है। नागफनी कब्ज और दस्त में लाभदायक है।

2-कान के दर्द में नागफली की 2-3 बूँद कान में डालने से तुरंत लाभ होता है।

3-नागफनी में कैल्सियम की मात्रा भरपूर होती है। अगर सूजन है , जोड़ों का दर्द है या चोट के कारण आप को चलने मे दिक्कत ही रही है, तो आप पत्ते को बीच में काटकर गूदे वाले हिस्से पर हल्दी और सरसों का तेल लगाकर गर्म कर बांध लें। आप की सूजन मात्र 2-3 घंटों में गायब हो जायेगी।

4-कुक्कर खांसी, में इसके फल को भुन कर खाने से लाभ होता है।

5-नागफनी के रस में सूजन, गठिया और मांसपेशियों की टूट फूट को ठीक करने के गुण पाया जाता है।

6-नागफनी मधुमेय के रोगियों के लिये वरदान है। यह डायबिटीज से ग्रसित व्यक्ति में ग्लूकोस लेवल को नियंत्रित रखता है।

7-हैड्रोसिल की समस्या में इसके पत्ते को बांधने से बहुत ही जल्द आराम मिलता है।

8-यदि किसी को दमा की समस्या है तो नागफनी के फल के टुकड़े कर , इन्हे सुखाकर ,उसका काढ़ा बनाकर पीने से दमा में बहुत ही जल्द आराम मिलता है और इसके लगातार सेवन से आप को दमा से निजात मिल जायेगा।

9-यदि इसके पत्तों के 4 से 5 ग्राम रस का सेवन प्रतिदिन किया जाए तो कैंसर जैसी समस्या को भी रोका जा सकता है।

10-इसके फल से बना शरबत लगातार पिने से पित्त में होने वाले विकार सही हो जाता है।

11-यदि किसी व्यक्ति को निमोनिया की समस्या हो गयी है तो पौधे टुकड़े काट लें और इन टुकड़ों को उबाल कर दिन में दो बार पांच दिनों के तक सेवन करें

12-यह बड़े हुए प्रोस्टेट में बहुत ही सहायक व ग्रंथि की सूजन को नागफनी के फूल के सेवन से कम कर सकते हैं

वानस्पतिक नाम: टेकोमेला अंडुलाटा सामान्य नाम: रोहेड़ा रोहेड़ा रेगिस्तानी या शुष्क क्षेत्रों का एक पर्णपाती या लगभग सदाबह...
19/10/2023

वानस्पतिक नाम: टेकोमेला अंडुलाटा
सामान्य नाम: रोहेड़ा
रोहेड़ा रेगिस्तानी या शुष्क क्षेत्रों का एक पर्णपाती या लगभग सदाबहार पेड़ है। यह कोमल पहाड़ी ढलानों सहित समतल और लहरदार क्षेत्रों में और कभी-कभी खड्डों में भी होता है। यह स्थिर रेत के टीलों पर बहुत अच्छी तरह से पनपता है, जहां अत्यधिक कम और उच्च तापमान का अनुभव होता है। पत्तियाँ संकीर्ण, कुछ-कुछ लांस के आकार की, लहरदार किनारों वाली, 5-12 सेमी लंबी होती हैं। वसंत ऋतु में इसमें पीले, नारंगी और लाल रंग के सुंदर दिखावटी ट्यूबलर फूल लगते हैं। यह शुष्क और अर्धशुष्क क्षेत्रों का एक पर्णपाती या लगभग सदाबहार वृक्ष है। यह पीएच 6.5-8.0 वाली जल निकास वाली दोमट से लेकर रेतीली दोमट मिट्टी के लिए अच्छी तरह से अनुकूल है।
पेड़ एक मजबूत प्रकाश मांगकर्ता है। यह सूखा, पाला, आग और हवा प्रतिरोधी है। फूल आने के समय इसमें पीले, नारंगी और लाल रंग के सुंदर दिखावटी फूल लगते हैं। एक ही आसपास में तीन प्रकार के फूल वाले पेड़ एक-दूसरे के करीब देखे जा सकते हैं। यह प्रजाति स्थिर रेत के टीलों पर बहुत अच्छी तरह से पनपती है, जहां अत्यधिक कम और उच्च तापमान का अनुभव होता है।

ये तस्वीर फेसबुक पर दिखी तो उठा ली।आप सब इसे जानते है?यदि गांव से जुड़े लोग है तो अवश्य जानते होंगे।यदि गांव से नहीं भी ज...
15/10/2023

ये तस्वीर फेसबुक पर दिखी तो उठा ली।
आप सब इसे जानते है?
यदि गांव से जुड़े लोग है तो अवश्य जानते होंगे।
यदि गांव से नहीं भी जुड़े है और एकदम आधुनिक हो गए है तब भी जानते होंगे क्योंकि ये आजकल सुपर सिड्स के नाम से बड़े बड़े लोगों में खूब प्रचलित हो रहा है। इसको खाने से इससे मिलने वाले अनेकों पोषक तत्वों के बारे में बताया जाता है।
आजकल तो पुरानी देशी छूट गयी चीजों को ही मॉडिफाई करके उसके अंग्रेजी नाम से बुलाया जाता है और उससे मिलने वाले अनगिनत पोषक तत्वों व फायदे गिना कर खूब ऊँची क़ीमत पर बेचा जाता है।
जैसे हमारा (मडुवा ) रागी बन गया, (जौ) ओट्स नाम से बिकता है । कुछ इसी तरह से ये बीज सुपर सिड्स नाम से बिकते है और सुपर फूड नाम से जाने जाते है।
वैसे हमारे बचपन में हम इसके फायदे नहीं जानते थे बस इतना पता था कि इसे सेककर खाने पर स्वादिष्ट बहुत लगता था।
ये कद्दू के बीज है। पके कद्दू की सब्जी बनाते समय उसके बीज निकाल दिए जाते है। इन्ही बीजो को सुखा कर बाद में सेक कर खाया जाता है।
कद्दू की तरह ही ककड़ी, खरबूजा, कटहल इत्यादि के बीज को भी सेककर खाया जाता है। खरबूजे के बीज लड्डू में डाले जाते है, ककड़ी के बीजो को पीस कर गर्मियों में बहुत बेहतरीन ठंडई बनाई जाती है,इसे भूनकर लइया के साथ खाने पर भी बहुत अच्छी लगती है। कटहल के बीज की तो आलू मिलाकर सब्जी भी बनाई जाती है।
मुझे तो इन बीजो के बारे में बस इतनी ही जानकारी थी बाकी आप सब लोग बताये।

आयुर्वेद में  #नाड़ी परीक्षण का विज्ञान..      नाडी परीक्षण के बारे में चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, शारंगधर संहिता, भावप...
14/10/2023

आयुर्वेद में #नाड़ी परीक्षण का विज्ञान..


नाडी परीक्षण के बारे में चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, शारंगधर संहिता, भावप्रकाश, योगरत्नाकर आदि ग्रंथों में वर्णन है। महर्षि सुश्रुत अपनी योगिक शक्ति से समस्त शरीर की सभी नाड़ियाँ देख सकते थे ।

ऐलोपेथी में तो पल्स सिर्फ दिल की धड़कन का पता लगाती है; पर ये इससे कहीं अधिक बताती है आयुर्वेद में पारंगत वैद्य नाडी परीक्षा से रोगों का पता लगाते है इससे ये पता चलता है की कौन सा दोष शरीर में दूषित है ये बिना किसी महँगी और तकलीफदायक डायग्नोस्टिक तकनीक के बिलकुल सही निदान करती है।

जैसे कि शरीर में कहाँ कितने साइज़ का ट्यूमर है, किडनी खराब है या ऐसा ही कोई भी जटिल से जटिल रोग का पता चल जाता है। दक्ष वैद्य हफ्ते भर पहले क्या खाया था ये भी बता देतें है। भविष्य में क्या रोग होने की संभावना है ये भी पता चलता है।

1. महिलाओं का बांया और पुरुषों का दाँया हाथ देखा जाता है।

2. कलाई के अन्दर अंगूठे के नीचे जहां पल्स महसूस होती है तीन उंगलियाँ रखी जाती है।

3. अंगूठे के पास की ऊँगली में वात, मध्य वाली ऊँगली में पित्त और अंगूठे से तीसरी ऊँगली में कफ महसूस किया जा सकता है।

4. वात की पल्स अनियमित और मध्यम तेज चलती है ।

5. पित्त की बहुत तेज पल्स महसूस होगी।

6. कफ की बहुत कम और धीमी पल्स महसूस होगी।

7. तीनो उंगलियाँ एक साथ रखने से हमें ये पता चलेगा कि कौन सा दोष अधिक है।

8. प्रारम्भिक अवस्था में ही उस दोष को कम कर देने से रोग होता ही नहीं।

9. हर एक दोष की भी 8 प्रकार की पल्स होती है; जिससे रोग का पता चलता है, इसके लिए अभ्यास की ज़रुरत होती है।

10. कभी कभी 2 या 3 दोष एक साथ हो सकते है।

11. नाडी परीक्षा अधिकतर सुबह उठकर आधे एक घंटे बाद करते है जिससे हमें अपनी प्रकृति के बारे में पता चलता है। ये भूख प्यास, नींद, धुप में घुमने, रात्री में टहलने से, मानसिक स्थिति से, भोजन से, दिन के अलग अलग समय और मौसम से बदलती है।

12. चिकित्सक को थोड़ा आध्यात्मिक और योगी होने से मदद मिलती है। सही निदान करने वाले नाडी पकड़ते ही तीन सेकण्ड में दोष का पता लगा लेते है। वैसे 30 सेकण्ड तक देखना चाहिए।

13. मृत्यु नाडी से कुशल वैद्य भावी मृत्यु के बारे में भी बता सकते है।

14. आप किस प्रकृति के है? वात प्रधान, पित्त प्रधान या कफ प्रधान या फिर मिश्रित । यह भी नाड़ी विज्ञान द्वारा जाना जा सकता है।

आज भारत में एलोपैथी चिकित्सा आने तथा उसे बढ़ावा मिलने के कारण नाड़ी वैद्य बहुत कम रह गए हैं किंतु इस विद्या को बचाने की आवश्यकता है आयुर्वेद का अध्ययन कर रहे युवाओं को इसे पुराने वैद्यों से अवश्य सीखना चाहिए...

शरद ऋतु शुरू हो चुकी है। शरद ऋतु रोगों की माता कहा गया हैं इस ऋतु में या यूं कहें इन दो महीनों में पित्त दोष बढ़ जाता है।...
14/10/2023

शरद ऋतु शुरू हो चुकी है। शरद ऋतु रोगों की माता कहा गया हैं इस ऋतु में या यूं कहें इन दो महीनों में पित्त दोष बढ़ जाता है।
शरद ऋतु आधे sept से आधे nov के आसपास मानी जाती है।
हमारे पूर्वज कितने महान थे कि श्राद्ध और नवरात्रे इसी ऋतु में दिए गए हैं। ज्यादातर लोग श्राद्ध और नवरात्रों में शराब, लहसुन प्याज आदि का सेवन नही करते। घी, दूध युक्त भोजन, या मिठाई या खीर बनाते हैं। जो के पित्त को कम करती हैं।

शरद ऋतु में त्याग करने वाली चीजें-

शरद ऋतु में ओस, जवाखार जैसे क्षार, दही, खट्टी , छाछ, तेल, चरबी, गरम-तीक्षण वस्तुएँ, खारे-खट्टे रस की चीजे त्याज्य हैं।

बाजरी, मक्का, उड़द, कुलथी, चौला, फूट, प्याज, लहसुन, मेथी की भाजी, नोनिया की भाजी, रतालू, बैंगन, इमली, हींग, पोदीना, फालसा, अन्नानास, कच्चे बेलफल, कच्ची कैरी, तिल, मुँगफली, सरसों आदि पितकारक होने से त्याज्य हैं।

खट्टी छछ, भिंडी एवं ककड़ी खास न लें। इस ऋतु में तेल की जगह घी का उपयोग उत्तम है। जिनको पित-विकार होता हो तो उन्हें महासूदर्शन चूर्ण, नीम, नीम की अंतरछाल जैसी कड़वी
एवं तुरी-कसैली चीजें खास करके उपयोग में लानी चाहिए।

जो मनुष्य अयुर्वेदिक में दिए गए ऋतुचर्य और दिनचर्य को follow करता है वह सदा निरोगी रहता है।

मैं आशा करता हूँ कि कम से कम इस ऋतु में अब कोई बीमार न पड़े🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼

अक्सर लोगों की दिन की शुरूआत चाय से होती है। सुबह उठते ही सबसे पहले आपको दूध वाली चाय की तलब होती है। कई लोग तो चाय के इ...
04/10/2023

अक्सर लोगों की दिन की शुरूआत चाय से होती है। सुबह उठते ही सबसे पहले आपको दूध वाली चाय की तलब होती है। कई लोग तो चाय के इतने शौकीन होते हैं, कि उन्हें हर एक-दो घंटे पर चाय चाहिए। चाय पीकर ही वे अपनी थकान को मिटाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, जरूरत से ज्यादा चाय पीना आपके सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। आइये जानते हैं, इसके बारे में....
एसि़डिटी

सुबह खाली पेट चाय पीने पर आपको ये समस्या हो सकती है। आप चाय का सेवन अधिक मात्रा में करते हैं, तो आपका पेट भी फूल सकता है। दरअसल चाय में कैफिन पाया जाता है, इसकी वजह से पेट में गैस बनता है। इस तरह आपको पाचन शक्ती की कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, ऐसे में आपकी आंतें भी खराब हो सकती है।
नींद कम आना

ज्यादा चाय पीने से आपको नींद कम आती है। नींद पूरी न होने के कारण आपको तनाव, स्किन प्रॉब्लम जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

ब्लड प्रेशर
ज्यादा चाय पीने से ब्लड प्रेशर पर भी असर पड़ता है। अगर आप हाई ब्लड प्रेशर के मरीज है, तो अधिक मात्रा में चाय पीने से बचें। ये आपके सेहत को प्रभावित कर सकता है।
एक्ने

अधिक मात्रा में चाय के सेवन से बॉडी हारमोंस असंतुलित हो जाते हैं, जिससे एक्ने और पिंपल जैसी समस्याएं होती है।

डिहाइड्रेशन की समस्या

अगर आप अधिक मात्रा में चाय पीते हैं, तो आपको डिहाइड्रेशन का सामना करना पड़ता है। दरअसल दूध वाले चाय में मौजूद कैफीन शरीर की पानी को सोखती है, जिस वजह से डिहाइड्रेशन होता है।

घबराहट

चाय का ज्यादा सेवन करने से आपको घबराहट की समस्या हो सकती है। दरअसल चाय में टैनिन पाया जाता है, जो आपके परेशानी का कारण बनता है।

अगर आप एंटीबॉयटिक दवाओं का सेवन करते हैं, तो ऐसे में चाय पीने से बचें। ये आपके दवाईयों के असर को कम कर सकती है। इस तरह आप किसी भी स्थिति में जरूरत से ज्यादा चाय पीने से बचें।

बाजरा के पांच मुख्य फायदे हो सकते हैं:पोषण समृद्ध: बाजरा अच्छी मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, और खनिजों का स्रोत हो...
29/09/2023

बाजरा के पांच मुख्य फायदे हो सकते हैं:

पोषण समृद्ध: बाजरा अच्छी मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, विटामिन, और खनिजों का स्रोत होता है, जो आपके शारीरिक स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद करता है।

वजन नियंत्रण: इसका सेवन वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है, क्योंकि बाजरा फाइबर से भरपूर होता है, जिससे आपको भूख कम लगेगी।

दिल के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद: इसमें मौजूद मैग्नीशियम और पोटैशियम हृदय के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं।

डायबिटीज के नियंत्रण में मदद: बाजरा का सेवन खानसानी ब्लड सुगर को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

बोन्स हेल्थ: बाजरा में कैल्शियम, मैग्नीशियम, और फॉस्फोरस होते हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।

प्राकृतिक आयुर्वेदिक उत्पाद प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। इन उत्पादों को प्...
24/09/2023

प्राकृतिक आयुर्वेदिक उत्पाद प्राचीन भारतीय चिकित्सा प्रणाली आयुर्वेद के सिद्धांतों पर आधारित होते हैं। इन उत्पादों को प्राकृतिक जड़ी-बूटियों और अन्य सामग्रियों से बनाया जाता है, जो शरीर और मन को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। आयुर्वेदिक उत्पादों में कोई हानिकारक रसायन नहीं होते हैं, इसलिए इनका उपयोग करना सुरक्षित है।

आयुर्वेदिक उत्पादों के कई लाभ हैं। ये पाचन में सुधार कर सकते हैं, प्रतिरक्षा को बढ़ा सकते हैं, तनाव को कम कर सकते हैं, और नींद में सुधार कर सकते हैं। आयुर्वेदिक उत्पादों का उपयोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों और स्वास्थ्य समस्याओं के इलाज के लिए भी किया जा सकता है, जैसे कि सर्दी, खांसी, बुखार, त्वचा की समस्याएं, और जोड़ों का दर्द।

यदि आप अपनी जीवनशैली में प्राकृतिक और सुरक्षित बदलाव करना चाहते हैं, तो आयुर्वेदिक उत्पादों का उपयोग करना एक अच्छा विकल्प है। आयुर्वेदिक उत्पाद आपके समग्र स्वास्थ्य और कल्याण में सुधार करने में मदद कर सकते हैं।

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