20/09/2026
वफ़ात से कुछ देर पहले रसूल अल्लाह ﷺ की तबीयत बहुत कमज़ोर थी। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा के भाई मिस्वाक लेकर आए तो आप ﷺ उसे देखते रहे।
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा समझ गईं कि आप ﷺ मिस्वाक करना चाहते हैं। उन्होंने मिस्वाक को अपने मुँह में चबाकर नरम किया, फिर उसे नबी करीम ﷺ के मुबारक दाँतों पर फेरा। यह वाक़िया विसाल-ए-मुबारक से पहले के उन आख़िरी लम्हों में पेश आया, जब आप ﷺ की तबीयत बेहद नाज़ुक थी।
यह मंज़र नबी करीम ﷺ की सुन्नत-ए-मिस्वाक से मोहब्बत की एक ख़ूबसूरत याद दिलाता है। ज़िंदगी के आख़िरी लम्हों में भी आप ﷺ ने तहारत और सफ़ाई का एहतिमाम फ़रमाया। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा की मोहब्बत, ख़िदमत और बारीक-फ़हमी भी इस वाक़िये में नुमायाँ होती है कि उन्होंने आप ﷺ की नज़र से आपकी ख़्वाहिश को समझ लिया।
अल्लाह तआला हमें रसूल अल्लाह ﷺ की सुन्नतों से सच्ची मोहब्बत अता फ़रमाए, आपकी पैरवी की तौफ़ीक़ दे और क़यामत के दिन आपकी शफ़ाअत नसीब फ़रमाए। आमीन। 🤲
हवाला: सहीह बुख़ारी, हदीस 4451, 890; सहीह मुस्लिम, हदीस 244
डिस्क्लेमर: यह वाक़िया सहीह अहादीस में मज़कूर है, हालांकि इसे आप ﷺ का “आख़िरी दुनियावी अमल” कहना सही ताबीर नहीं है; सहीह रिवायतों में विसाल-ए-मुबारक के आख़िरी लम्हों और आख़िरी कलिमात से मुतअल्लिक़ दूसरी तफ़सीलात भी मौजूद हैं।
ﷺ ﷺ ﷺ