27/07/2026
मौलाना बदरुद्दीन अजमल जी असम के एक जाने-माने व्यक्तित्व हैं। उनके काम या राजनीति को लेकर लोगों की राय अलग-अलग हो सकती है, जो कि स्वाभाविक है। लेकिन हाल ही में जिस तरह उन्होंने ऊपरी असम के बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया है, वह बेहद सराहनीय और मानवीय कदम है।
दुख की बात यह है कि इस संकट की घड़ी में भी कुछ लोग सोशल मीडिया पर इसे 'चुनावी राजनीति' कहकर आलोचना करने में लगे हैं। सवाल यह है कि क्या मुसीबत में पड़े लोगों की मदद करना गलत है? आलोचना करने वालों से गुजारिश है कि बहस छोड़कर खुद आगे आएं और अपनी क्षमता अनुसार पीड़ितों की मदद करें।
ईश्वर/अल्लाह ने हमें इंसान बनाकर एक-दूसरे की मदद करने की सीख दी है। मानव सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। अजमल जी ने अगर मानवीयता के नाते यह कदम उठाया है, तो इसका स्वागत होना चाहिए।
आइए, सोशल मीडिया पर कीचड़ उछालना बंद करें और एकजुट होकर बाढ़ पीड़ितों का सहारा बनें। इंसानियत ही हमारा मुख्य उद्देश्य होना चाहिए।
अगर आप इस बात से सहमत हैं, तो इसे आगे जरूर शेयर करें।
आमीन / जय आई असोम।