07/02/2026
॥जयगोमाता जयगोपाल॥
॥श्री कामधेनु कृपा प्रसाद॥
॥ गाय किसे कहते हैं ? ॥
॥ भग ~ १ ॥
हमारी परम्परा में गाय के घी का दीपक, गाय के घी का धूप, गाय के घी से हवन किया जाता था। ऐसा क्यों होता था? हमने पहले कभी शंका उत्पन्न नहीं की, पर इस युग में शंका उत्पन्न हुई कि घी अग्नि में क्यों डाला जा रहा है? क्यों ना हम सुधा खा लें। अग्नि में डालने से क्या लाभ होगा? इस शंका के समाधान के लिए रूस के वैज्ञानिकों ने गाय के घृत व अग्नि के संयोग से होने वाली इस क्रिया पर अनुसंधान किया और उन्होंने पाया कि गाय का एक तोला घी(11.8 ग्राम) अगर अग्नि पर बूॅंद- बूॅंद कर डालते हैं,तो उससे एक हजार किलोग्राम आक्सीजन का निर्माण होता है। केवल एक तोला घी से एक हजार किलोग्राम आक्सीजन! और इतनी मात्रा में यह आक्सीजन हजारों प्राणियों की जीवनी शक्ति है व सैकड़ों लोगों का 24 घंटे का स्वास है।
हम लोगों के पास यह विधि थी, यह विज्ञान था कि थोड़ी सी चीज, अधिक लोगों के लिए उपयोगी कैसे सिद्ध हो? ऐसी - ऐसी कलाएं हमारे पूर्वजों के पास थी। हम गोघृत के यज्ञ , धूप ओर दीप के द्वारा मानव सहित संपूर्ण प्राणियों को तो जीवनी शक्ति देते ही थे, साथ ही - साथ में ऋषिप्राण और देवप्राण को भी गोघृत के द्वारा पुष्ट किया करते थे। देवप्राण और ऋषिप्राण दोनों पुष्ट रहेंगे तो प्राकृतिक संतुलन,बाह्य समष्टि प्रकृति का संतुलन तथा मानवीय मस्तिष्क और हृदय शुद्ध एवं परिष्कृत ये दोनों बने रहेंगे। बाह्य प्रकृति संतुलित रही तो जो हम देखते है अनावृष्टि , अतिवृष्टि, भूकंप आदि अन्यान्य जो प्राकृतिक प्रकोप है ये नहीं होंगे।
ऐसा यह सब प्राकृतिक संतुलन बिगड़ने से होता है और प्राकृतिक संतुलन बिगड़ता है, प्रकृति के अलग - अलग इन केंद्र के जो अधिष्ठाता देव है उनकी शक्ति कमजोर होने पर । यह जो समष्टि प्रकृति चल रही है इसके सभी अलग - अलग कोनो पर ईश्वर के द्वारा नियुक्त की हुई देवी शक्तियाँ हैं और देवी शक्तियाँ के अणुओं का पोषण केवल गाय के गव्यों द्वारा ही होता है। क्योंकि देवताओं का , सात्विक लोगो का, सात्विक प्राणियों का केवल सात्विक आहार ही होता हैं सात्विक आहार भूमंडल पर ओर तीनों लोको में केवल गाय के द्वारा ही प्राप्त हो सकता है।राक्षसी or तामसी आहार तो हमे सब जगह और अन्य प्राणियों से भी मिल जायेगा, पर सात्विक आहार केवल गाय ही दे सकती है ।
॥जयश्रीकामधेनु