Trigunacharya Nadi Vaidya

Trigunacharya Nadi Vaidya नाडीवैद्य-त्रिगुणाचार्य�आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सक-महर्षि आयुर्वेद चिकित्सा संस्थान-1957

वेरिकोज़ वेन्स क्या है?जब पैरों की सतही नसों के अंदर मौजूद छोटे-छोटे वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो रक्त का प्रवाह ...
27/08/2026

वेरिकोज़ वेन्स क्या है?

जब पैरों की सतही नसों के अंदर मौजूद छोटे-छोटे वाल्व कमजोर या खराब हो जाते हैं, तो रक्त का प्रवाह ऊपर हृदय की ओर जाने के बजाय कुछ मात्रा में वापस नीचे की ओर आने लगता है। इससे नसों में दबाव बढ़ता है और वे फूलकर, टेढ़ी-मेढ़ी और उभरी हुई दिखाई देने लगती हैं।

प्रमुख कारण और जोखिम कारक

1. लंबे समय तक खड़े रहना — शिक्षक, पुलिस, सुरक्षा कर्मचारी, दुकानदार आदि में जोखिम बढ़ सकता है।
2. लंबे समय तक लगातार बैठना और पैरों की कम गतिविधि।
3. उम्र बढ़ना — उम्र के साथ नसों के वाल्व कमजोर हो सकते हैं।
4. अधिक वजन/मोटापा।
5. गर्भावस्था।
6. परिवार में वेरिकोज़ वेन्स का इतिहास।
7. पहले DVT (Deep Vein Thrombosis) हो चुका होना।
8. शारीरिक गतिविधि की कमी।

सामान्य लक्षण

* पैरों में उभरी हुई नीली/बैंगनी नसें
* पैरों में दर्द या भारीपन
* लंबे समय खड़े रहने पर दर्द/भारीपन बढ़ना
* पैरों या टखनों में सूजन
* नसों के आसपास खुजली
* रात में पैरों में ऐंठन
* त्वचा का रंग भूरा/गहरा होना
* त्वचा का सूखना या एक्जिमा
* आगे चलकर घाव/वेनस अल्सर हो सकता है।

⚠️ कब तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी है?

यदि नस अचानक बहुत दर्दनाक, लाल, गर्म या कठोर हो जाए, एक पैर में अचानक ज्यादा सूजन हो, त्वचा में घाव बन जाए या नस से रक्तस्राव हो, तो केवल घरेलू या आयुर्वेदिक उपचार पर निर्भर न रहें। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय/वैस्कुलर जांच आवश्यक है। NICE के अनुसार रक्तस्राव वाली वेरिकोज़ वेन्स में तत्काल vascular assessment की जरूरत होती है।



आयुर्वेदिक एवं प्राकृतिक दृष्टिकोण से क्या करें?

आयुर्वेद में उपचार का चयन व्यक्ति की प्रकृति, दोष-दुष्टि, पाचन, वजन, जीवनशैली और रोग की अवस्था देखकर किया जाना चाहिए। इसलिए एक ही औषधि सभी रोगियों के लिए उचित नहीं होती।

1. नियमित पैदल चलना

प्रतिदिन हल्की से मध्यम शारीरिक गतिविधि, विशेषकर walking, पैरों की मांसपेशियों की पंपिंग और रक्त के प्रवाह में सहायता कर सकती है। आधुनिक दिशानिर्देश भी नियमित हल्की-मध्यम physical activity की सलाह देते हैं।

2. पैरों को ऊंचा करके आराम

आराम करते समय पैरों को तकिए पर कुछ ऊंचा रखना सूजन और भारीपन में मदद कर सकता है।

3. लंबे समय तक एक ही स्थिति में न रहें

* लंबे समय तक खड़े रहने से बचें।
* लगातार कई घंटे बैठने से बचें।
* बीच-बीच में कुछ मिनट चलें।
* पैरों और टखनों की हल्की movement करें।

4. वजन नियंत्रित रखें

अधिक वजन पैरों पर दबाव बढ़ा सकता है। स्वस्थ वजन बनाए रखना वेरिकोज़ वेन्स के लक्षणों को नियंत्रित करने वाली महत्वपूर्ण जीवनशैली रणनीतियों में शामिल है।

5. योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा

हल्के योगाभ्यास, ankle movements, पैदल चलना तथा चिकित्सकीय निगरानी में प्राकृतिक चिकित्सा को सहायक उपाय के रूप में अपनाया जा सकता है। एक छोटे randomized study में uncomplicated varicose veins में yoga+naturopathy intervention से कुछ symptom/health measures में सुधार देखा गया, लेकिन इसे नसों के खराब वाल्व को ठीक करने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।



आयुर्वेदिक औषधियाँ

आयुर्वेद में नसों, रक्तसंचार और सूजन से संबंधित समस्याओं में विभिन्न औषध द्रव्यों का चिकित्सकीय उपयोग किया जाता रहा है, जैसे:

* गोक्षुर
* पुनर्नवा
* गुडूची
* मंजिष्ठा
* सारिवा
* अश्वगंधा, आवश्यकता और प्रकृति के अनुसार
* कुछ परिस्थितियों में गुग्गुलु-आधारित योग

लेकिन किस औषधि की जरूरत है, कितनी मात्रा में और कितने समय तक, यह व्यक्ति की स्थिति के अनुसार तय होना चाहिए। विशेषकर यदि व्यक्ति blood thinner/anticoagulant, BP या diabetes की दवाएं ले रहा हो, गर्भवती हो, किडनी/लिवर की बीमारी हो या thrombosis का संदेह हो, तो स्वयं से औषधि शुरू नहीं करनी चाहिए।

महत्वपूर्ण: वर्तमान vascular guidelines में वेरिकोज़ वेन्स के मूल कारण—जैसे venous reflux—के लिए कोई आयुर्वेदिक औषधि सिद्ध रूप से बंद/ठीक कर देने वाली चिकित्सा के रूप में स्थापित नहीं है। इसलिए आयुर्वेदिक उपचार को उचित जांच और आवश्यकता पड़ने पर vascular treatment के साथ समन्वित रखना अधिक सुरक्षित है। आधुनिक guidelines में symptomatic disease में आवश्यकता के अनुसार endovenous ablation, foam sclerotherapy अथवा surgery जैसे उपचारों का उल्लेख है।

Compression stockings के बारे में

Compression stockings कुछ लोगों में लक्षण और सूजन कम करने में उपयोगी हो सकती हैं, लेकिन सही compression और सही आकार चिकित्सकीय सलाह से चुनना चाहिए। वे हर मरीज में स्थायी उपचार का विकल्प नहीं हैं; NICE के अनुसार intervention उपयुक्त होने पर केवल stockings से लंबे समय तक उपचार करना उचित नहीं माना जाता।



क्या सावधानियाँ रखें?

इन बातों से बचें:

* बहुत देर तक लगातार खड़े रहना
* लंबे समय तक पैर नीचे लटकाकर बैठना
* अत्यधिक वजन बढ़ने देना
* पैरों पर चोट लगने देना
* बिना जांच के बहुत जोर से नसों पर मालिश करना
* स्वयं से compression stocking या औषधि शुरू करना
* उभरी हुई नस को सुई/ब्लेड आदि से छेड़ना

विशेष सावधानी: यदि पैर में अचानक सूजन और दर्द, सांस फूलना या सीने में दर्द जैसे लक्षण हों, तो यह गंभीर रक्त-थक्के से संबंधित स्थिति हो सकती है और तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।



🩺 नाड़ी परीक्षण एवं आयुर्वेदिक परामर्श

वेरिकोज़ वेन्स के रोगी Maharshi Ayurved Chikitsa Sansthan Bhopal में व्यक्तिगत आयुर्वेदिक परामर्श के लिए संपर्क कर सकते हैं। उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार यह UNI Homes, Kolar Road, Bhopal में स्थित है।

नाड़ीवैद्य त्रिगुणाचार्य जी से व्यक्तिगत परामर्श लेकर रोगी की प्रकृति, लक्षण, जीवनशैली और वर्तमान उपचार के आधार पर आयुर्वेदिक/प्राकृतिक सहायक उपचार की योजना बनवाना उचित रहेगा। लेकिन यदि रोगी में तेज दर्द, अचानक सूजन, त्वचा में परिवर्तन, अल्सर, रक्तस्राव या thrombosis का संदेह हो, तो vascular specialist की जांच और Doppler/duplex ultrasound को टालना नहीं चाहिए। Duplex ultrasound से venous reflux और बीमारी की सीमा का आकलन किया जाता है।

📌 विशेष सूचना

यह जानकारी नाड़ीवैद्य त्रिगुणाचार्य जी द्वारा प्रदान की गई है।
यह सामान्य स्वास्थ्य-जागरूकता एवं आयुर्वेदिक मार्गदर्शन के उद्देश्य से है। प्रत्येक रोगी के लिए औषधि और उपचार उसकी व्यक्तिगत जांच के बाद ही निर्धारित किया जाता है।आयुर्वेदिक उपचार लेते समय आवश्यकता पड़ने पर आधुनिक vascular विशेषज्ञ की जांच/उपचार को भी साथ रखना सुरक्षित और वैज्ञानिक दृष्टिकोण है।

26/08/2026
स्वास्थ्य शिविर आज मंडीदीप में …..
25/08/2026

स्वास्थ्य शिविर आज मंडीदीप में …..

*☘️आयुर्वेद का 8 वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन*☘️भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग एवं आयुर्वेद शिक्षक एसोसिएशन द्वारा आयोजि...
22/08/2026

*☘️आयुर्वेद का 8 वाँ राष्ट्रीय सम्मेलन*☘️
भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग एवं आयुर्वेद शिक्षक एसोसिएशन द्वारा आयोजित कार्यक्रम,नवसृजन संवाद में ….

फैटी लिवर (Fatty Liver / Steatotic Liver Disease) ……..के बारे में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, WHO के हालिया दस्तावेज़ और EA...
21/08/2026

फैटी लिवर (Fatty Liver / Steatotic Liver Disease)
……..के बारे में आधुनिक चिकित्सा विज्ञान, WHO के हालिया दस्तावेज़ और EASL/AASLD की गाइडलाइनों के आधार पर एक व्यवस्थित जानकारी दी जा रही है।

1. फैटी लिवर क्या है?
जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से अधिक वसा जमा होने लगे तो इसे Steatotic Liver Disease (SLD) कहा जाता है।

WHO के 2026 के दस्तावेज़ के अनुसार SLD दुनिया भर में लगभग 1.7 अरब लोगों को प्रभावित करता है और यह तेजी से बढ़ने वाली chronic liver diseases में शामिल है।

1. फैटी लिवर से कौन-कौन सी प्रमुख समस्याएँ हो सकती हैं?

शुरुआती fatty liver कई बार बिल्कुल शांत रहता है। लेकिन कुछ लोगों में बीमारी आगे बढ़ सकती है:

संभावित complications:

* लिवर में सूजन
* ALT/AST बढ़ना
* Liver fibrosis
* Cirrhosis
* पेट में पानी भरना (ascites)
* पीलिया
* Esophageal varices से bleeding
* Hepatic encephalopathy
* Hepatocellular carcinoma यानी liver cancer

WHO भी बताता है कि SLD advanced अवस्था में fibrosis, cirrhosis और liver cancer तक बढ़ सकता है।

इसके अलावा cardiovascular disease का जोखिम भी महत्वपूर्ण है। MASLD केवल “लिवर में चर्बी” की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे metabolic health से जुड़ी बीमारी है।

1. इसके प्रमुख लक्षण क्या हैं?

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है कि बहुत से मरीजों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता।

संभावित लक्षण:
* लगातार थकान
* कमजोरी
* पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में भारीपन/असहजता
* पेट फूलना
* वजन बढ़ना
* इंसुलिन resistance/शुगर बढ़ना
* उन्नत अवस्था में पीलिया
* पैरों में सूजन
* पेट में पानी
* अत्यधिक कमजोरी या भ्रम

इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर fatty liver को पहचानना सही नहीं है। WHO भी इसे अक्सर silent disease बताता है।

1. किन गलतियों से fatty liver का खतरा बढ़ता है?

सबसे आम lifestyle mistakes हैं:
① लगातार ज्यादा कैलोरी खाना
जरूरत से अधिक calories → शरीर में fat accumulation → liver में fat बढ़ सकता है।

② मीठे पेय और ज्यादा fructose
Soft drinks, packaged juices, मिठाइयाँ और बहुत अधिक added sugar समस्या बढ़ा सकते हैं।

③ मैदा और refined carbohydrates की अधिकता
④ तला हुआ और saturated-fat वाला भोजन
⑤ लगातार बैठे रहना और exercise न करना
WHO के अनुसार लगभग 31% adults recommended physical-activity levels तक नहीं पहुँचते।
⑥ मोटापा और abdominal obesity
⑦ uncontrolled diabetes
⑧ triglycerides/cholesterol का असंतुलन
⑨ अत्यधिक alcohol

WHO के अनुसार alcohol 200 से अधिक health conditions से causal रूप से जुड़ा है और liver disease उसका एक प्रमुख प्रभाव है। WHO यह भी स्पष्ट करता है कि alcohol consumption का कोई पूरी तरह risk-free स्तर नहीं है।



1. फैटी लिवर में सबसे प्रभावी उपचार क्या है?

यहाँ सबसे महत्वपूर्ण तथ्य है:
वजन और metabolic health को सुधारना उपचार का मुख्य आधार है।

इसलिए केवल “लिवर की दवा” लेने के बजाय वजन, भोजन, exercise, diabetes और lipid profile को साथ में सुधारना ज्यादा महत्वपूर्ण है।



1. सही दिनचर्या कैसी हो?

सुबह

* नियमित समय पर उठना
* पर्याप्त नींद
* पानी पीना
* 30–45 मिनट brisk walking/अनुकूल exercise
* यदि संभव हो तो सुबह की हल्की physical activity

भोजन

थाली में:

* ज्यादा सब्जियाँ
* दाल/चना/राजमा जैसे legumes
* उचित मात्रा में protein
* साबुत अनाज
* nuts/seeds की सीमित मात्रा
* फल की उचित मात्रा

कम करें:

* मिठाई
* soft drinks
* packaged juice
* refined flour
* deep-fried food
* अत्यधिक saturated fat
* ultra-processed foods

रात

रात का भोजन बहुत भारी न रखें और अनावश्यक late-night overeating से बचें।

Exercise

WHO के अनुसार adults को सप्ताह में कम से कम:

150–300 मिनट moderate-intensity aerobic activity

या

75–150 मिनट vigorous activity

करनी चाहिए तथा सप्ताह में कम से कम 2 दिन muscle-strengthening exercise करनी चाहिए।

1. आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियाँ?

यह हिस्सा विशेष सावधानी से समझना चाहिए।

आयुर्वेद में liver/metabolic health के संदर्भ में विभिन्न द्रव्यों का पारंपरिक उपयोग मिलता है, जैसे:

* भू‍म्यामलकी
* कालमेघ
* गुडूची
* पुनर्नवा
* कुटकी
* हल्दी
* आंवला
* ⁠
सबसे महत्वपूर्ण बात


1. कौन-कौन से टेस्ट करवाने चाहिए?

यदि ultrasound में fatty liver आया है तो केवल ultrasound देखकर रुकना पर्याप्त नहीं है।

आमतौर पर physician इनका मूल्यांकन कर सकते हैं:

* LFT — ALT, AST, bilirubin, ALP आदि
* CBC
* Fasting glucose
* HbA1c
* Lipid profile
* Blood pressure
* BMI और waist circumference
* Hepatitis B/C screening, clinical indication के अनुसार
* FIB-4 जैसे fibrosis-risk score
* जरूरत होने पर FibroScan/transient elastography
* Selected cases में specialist evaluation


1. WHO के अनुसार सबसे महत्वपूर्ण संदेश

WHO के 2026 के liver-disease initiative में unhealthy diet, excess weight और alcohol को प्रमुख drivers के रूप में रेखांकित किया गया है।

इसलिए fatty liver management का सरल सूत्र है:

**कम processed food

* कम added sugar
* alcohol से बचाव
* नियमित exercise
* 5–10% तक clinically appropriate weight reduction
* diabetes/cholesterol/BP control
* नियमित medical monitoring**
———————————————————
*🌿🌿वैद्यराज-त्रिगुणाचार्य🌿🌿*
नाड़ीवैद्य-आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सक
*महर्षि आयुर्वेद चिकित्सा संस्थान भोपाल*
——(SINCE-1957)———
(8770448757--9827334608)
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क्या आपको भी बार बार टायलेट जाना पड़ता है…..
20/08/2026

क्या आपको भी बार बार टायलेट जाना पड़ता है…..

🇮🇳 आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳आइए, इस पावन स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल उत्सव ही न मनाएँ, बल्कि उन ...
15/08/2026

🇮🇳 आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ 🇮🇳

आइए, इस पावन स्वतंत्रता दिवस पर हम केवल उत्सव ही न मनाएँ, बल्कि उन अनगिनत वीरों के त्याग, तपस्या और बलिदान को भी स्मरण करें, जिनके संघर्ष और सर्वोच्च बलिदान से हमें स्वतंत्र भारत में सांस लेने का गौरव प्राप्त हुआ।

हम सभी का कर्तव्य है कि अपने स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए तन, मन और धन से राष्ट्र की उन्नति में अपना योगदान दें। आपसी प्रेम, एकता, भाईचारे और सद्भाव के साथ भारत को निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ाएँ।

🇮🇳 भारत माता की जय!
🇮🇳 वंदे मातरम्!
🇮🇳 जय हिंद!

निवेदक:
नाड़ीवैद्य त्रिगुणाचार्य
आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सक

24/07/2026

WHO के अनुसार अधिक वजन/मोटापा कई कारकों से जुड़ा होता है और नियमित शारीरिक गतिविधि व संतुलित आहार इसके प्रबंधन की आधारशिला हैं।

वज़न कम करने में आयुर्वेद परम 1. आयुर्वेदिक औषधियों के बारे में

आयुर्वेद में मोटापे को सामान्यतः स्थौल्य/मेदोवृद्धि से जोड़ा जाता है। कुछ औषधियां चिकित्सक की देखरेख में सहायक रूप से दी जाती हैं, जैसे:

* त्रिफला – पाचन और मलावरोध की स्थिति में उपयोगी हो सकती है।
* गुग्गुलु-आधारित औषधियां – जैसे मेदोहर/कांचनार गुग्गुलु आदि, लेकिन इनका चुनाव व्यक्ति की प्रकृति, अग्नि, रोग और अन्य दवाओं के अनुसार होना चाहिए।
* त्रिकटु – कुछ लोगों में पाचन-संबंधी उपयोग किया जाता है।
* मेथी, अदरक, दालचीनी आदि – भोजन के रूप में सीमित मात्रा में उपयोग किए जा सकते हैं।

⚠️ महत्वपूर्ण सावधानी: किसी भी “फैट बर्नर”, “7 दिन में 10 किलो वजन कम”, “100% प्राकृतिक और बिना साइड इफेक्ट” जैसे उत्पाद से सावधान रहें। कुछ आयुर्वेदिक/हर्बल उत्पादों में भारी धातुएँ या छिपे हुए औषधीय पदार्थ पाए जा सकते हैं; “प्राकृतिक” का अर्थ हमेशा “सुरक्षित” नहीं होता।

विशेष रूप से बिना चिकित्सकीय सलाह के न लें:

* भस्म/रसौषधि/धातु-युक्त औषधियां
* अज्ञात ऑनलाइन “स्लिमिंग पाउडर”
* तेज़ असर वाली “फैट बर्नर” गोलियां
* लंबे समय तक रेचक/दस्त कराने वाली औषधियां

यदि आपको मधुमेह, उच्च रक्तचाप, थायरॉइड, किडनी/लिवर रोग है या आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो आयुर्वेदिक औषधि शुरू करने से पहले चिकित्सक से सलाह आवश्यक है।



2. वजन कम करने के लिए खानपान

प्लेट का सरल नियम

हर मुख्य भोजन में:

* ½ प्लेट: सब्जियां/सलाद
* ¼ प्लेट: प्रोटीन — दाल, चना, राजमा, पनीर की नियंत्रित मात्रा, अंडा, मछली/चिकन आदि
* ¼ प्लेट: रोटी/चावल/अन्य अनाज

WHO भी न्यूनतम-प्रसंस्कृत भोजन, सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज और मेवों को प्राथमिकता देने तथा अधिक चीनी, अस्वास्थ्यकर वसा और नमक को सीमित करने की सलाह देता है।

सुबह

इनमें से कोई विकल्प:

* गुनगुना पानी
* बिना चीनी की चाय/हर्बल चाय
* नाश्ता: मूंग दाल चीला, दलिया, ओट्स, अंडा, अंकुरित अनाज या सब्जियों वाला पोहा

दोपहर

* 2 छोटी रोटी या नियंत्रित मात्रा में चावल
* दाल/सब्जी/सलाद
* छाछ या दही, यदि आपको अनुकूल हो

शाम

भूख लगे तो:

* फल
* भुना चना
* थोड़े मेवे
* अंकुरित मूंग
* बिना चीनी की चाय

रात

रात का भोजन हल्का रखें:

* सब्जी + दाल/प्रोटीन
* 1–2 छोटी रोटी, आवश्यकता के अनुसार
* देर रात भारी भोजन से बचें



3. किन चीजों का परहेज़ करें?

सबसे अधिक ध्यान इन पर दें:

❌ चीनी वाली चाय/कॉफी बार-बार
❌ मिठाई, मिठाईयुक्त पेय, कोल्ड ड्रिंक
❌ पैकेट जूस और मीठे पेय
❌ समोसा, कचौरी, पकौड़े, नमकीन
❌ बिस्किट, केक, पेस्ट्री
❌ पिज्जा, बर्गर और अत्यधिक प्रसंस्कृत भोजन
❌ रात में बार-बार खाना
❌ भोजन के साथ बहुत अधिक तेल/घी
❌ टीवी/मोबाइल देखते हुए बिना ध्यान के खाना

चीनी, अत्यधिक ऊर्जा-युक्त भोजन और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ वजन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

घी पूरी तरह बंद करना आवश्यक नहीं है, लेकिन मात्रा नियंत्रित रखें। “स्वस्थ” भोजन भी अधिक मात्रा में लेने पर वजन बढ़ा सकता है।



4. वजन कम करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण आदतें

① रोज़ चलना

शुरुआत 30 मिनट तेज़ चाल से करें। धीरे-धीरे सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि तक पहुँचें। अतिरिक्त लाभ के लिए 300 मिनट तक बढ़ाया जा सकता है। सप्ताह में 2 दिन शक्ति-वर्धक व्यायाम भी उपयोगी है।

② भोजन की मात्रा पर नियंत्रण

वजन घटाने में केवल “क्या खा रहे हैं” नहीं, बल्कि कितना खा रहे हैं भी महत्वपूर्ण है।

③ पर्याप्त नींद

देर रात तक जागना और अनियमित नींद भूख तथा खाने की आदतों को बिगाड़ सकती है। नियमित नींद की दिनचर्या रखें।

④ सप्ताह में एक बार वजन

रोज़-रोज़ वजन देखकर परेशान होने के बजाय सप्ताह में एक बार, समान समय पर वजन लें।

⑤ कमर का घेरा भी नापें

कभी-कभी वजन कम न दिखे लेकिन कमर का घेरा घट रहा हो—यह भी सुधार का अच्छा संकेत है।



5. वजन दोबारा न बढ़े, इसके लिए “स्थायी नियम”

वजन घटने के बाद सबसे बड़ी गलती होती है कि व्यक्ति फिर पुरानी आदतों पर लौट जाता है।

इन 8 नियमों को स्थायी बनाएं:

1. रोज़ाना कुछ न कुछ शारीरिक गतिविधि।
2. मीठे पेय को नियमित आदत न बनाएं।
3. सप्ताह में केवल सीमित अवसरों पर पसंदीदा उच्च-कैलोरी भोजन।
4. घर में बिस्किट, नमकीन और मिठाई का बड़ा स्टॉक न रखें।
5. भोजन धीरे-धीरे और बिना मोबाइल के करें।
6. सप्ताह में कम से कम एक बार वजन जांचें।
7. यदि वजन लगातार बढ़ने लगे, तो तुरंत भोजन और गतिविधि की समीक्षा करें।
8. बहुत कठोर डाइट से बचें—धीरे-धीरे घटा हुआ वजन सामान्यतः बनाए रखना आसान होता है। सहायक हो सकता है, लेकिन केवल “वजन घटाने की औषधि” पर निर्भर रहना उचित नहीं है। स्थायी परिणाम के लिए खानपान + शारीरिक गतिविधि + नींद + व्यवहार में बदलाव सबसे महत्वपूर्ण हैं।
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