25/03/2026
बोरदा गांव (चौथ का बरवाड़ा, जिला सवाई माधोपुर, पंचायत अड़ालवाड़ा) आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है।
कागज़ों में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत ये है कि गांव आज भी वहीं खड़ा है जहाँ सालों पहले था।
बारिश आते ही पूरा बोरदा गांव एक टापू बन जाता है।
चारों तरफ पानी भर जाता है, आने-जाने का कोई सही रास्ता नहीं बचता।
लोगों को अपनी रोज़मर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है।
❌ ना सड़क सही से बन पा रही है
❌ ना आने-जाने का स्थायी रास्ता तैयार किया गया
❌ यहाँ तक कि मोक्षधाम / श्मशान घाट तक जाने का रास्ता भी नहीं बनाया गया
सोचिए, किसी के घर दुख की घड़ी आए और उसे अपने ही गांव में अंतिम यात्रा के लिए रास्ता न मिले… इससे ज्यादा शर्मनाक स्थिति क्या हो सकती है?
लेकिन जैसे ही चुनाव नजदीक आते हैं…
👉 वही नेता, वही सरपंच, वही वादे
👉 फिर से झूठी उम्मीदें
👉 और फिर पांच साल का सन्नाटा
क्या बोरदा गांव सिर्फ वोट के समय ही याद आता है?
क्या यहां के लोगों को basic सुविधाओं का हक नहीं है?
क्या विकास सिर्फ कागजों तक सीमित रहेगा?
अब समय आ गया है कि
👉 बोरदा गांव के लोग अपनी आवाज उठाएं
👉 अपने हक की मांग करें
👉 और सवाल पूछें — “विकास आखिर हुआ कहाँ है?”
हमको सिर्फ वादे नहीं, काम चाहिए।
सिर्फ भाषण नहीं, सड़क चाहिए।
सिर्फ कागज़ नहीं, ज़मीनी विकास चाहिए।
✊ बोरदा गांव अब चुप नहीं रहेगा।
Borda