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Mysterious mummy found in tomb in Peru with hands covering its face .In 2021 , A mummy, fully bound in ropes and with it...
28/06/2023

Mysterious mummy found in tomb in Peru with hands covering its face .
In 2021 , A mummy, fully bound in ropes and with its hands covering its face, has been discovered in an underground tomb in Peru.
Archaeologists from the National University of San Marcos found the mummy in good condition in Cajamarquilla, a significant site 15.5 miles inland from the coastal city and capital Lima, Peru.
The mummy is estimated to be between 800 and 1200 years old.
Although the mummy’s striking pose – bound by ropes and in the foetal position – appears chilling at first sight, researchers believe it is a southern Peruvian funeral custom.
The tomb also contained ceramics, vegetable remains and stone tools.
Source New York post website
📸 Unknown

हरिहर_किला_नासिक ।। देश के इस किले तक पहुंचने के लिए गुजरना पड़ता है दुनिया के सबसे खतरनाक ट्रैक से... कई जगह चढ़ाई 90 ड...
27/06/2023

हरिहर_किला_नासिक ।।

देश के इस किले तक पहुंचने के लिए गुजरना पड़ता है दुनिया के सबसे खतरनाक ट्रैक से... कई जगह चढ़ाई 90 डिग्री तक है।...

देश के कई ऐतिहासिक किले से आपका परिचय हुआ होगा और उनकी कलात्‍मकता देख आप आश्‍चर्यचकित रह गए होंगे। मगर आपके लिए इस किले का सफर जितना खतरनाक होगा उतना ही रोमांचक भी। हर एक कदम पर आपकी सांसे थम सी जाएंगी, मगर इसके साथ ही मंजिल तक पहुंचने की आपकी ख्‍वाहिश भी बढ़ती चली जाएगी।

दरअसल, यह एक ऐसा किले है , जो जमीन पर नहीं बल्कि एक खूबसूरत पहाड़ की चोटी पर स्थित है और यहां तक पहुंचना हर किसी के बस की बात नहीं है क्‍योंकि इसकी कई जगह चढ़ाई 90 डिग्री तक है।
यह पहाड़ महाराष्‍ट्र के नासिक में कसारा से 60 किमी दूर है और इसकी चोटी पर स्थित किले को हर्षगढ़ किले या हरिहर किले के नाम से जाना जाता है। साथ ही इस किले की चढ़ाई को हिमालय के पर्वतारोहियों द्वारा दुनिया का सबसे खतरनाक ट्रैक माना जाता है।
यह पहाड़ नीचे से चौकोर दिखाई देता है, मगर इसका शेप प्रिज्म जैसा है। यह दो तरफ से 90 डिग्री सीधा और तीसरी तरफ 75 की डिग्री पर है। वहीं किला 170 मीटर की ऊंचाई पर बना है।
इस पर चढने के लिए एक मीटर चौड़ी 117 सीढियां बनी हैं। ट्रैक चिमनी स्‍टाइल में है, लगभग 50 सीढियां चढ़ने के बाद मुख्‍य द्वार, महादरवाजा आता है, जो आज भी बहुत अच्‍छी स्थिति में है।

यहां तक चढ़ने के बाद आगे की सीढियां एक चट्टान के अंदर से होकर जाती हैं और ये आपको किले के शीर्ष पर पहुंचा देती हैं, जहां हनुमान और शिव के छोटे मंदिर हैंं। वहीं मंदिर के पास एक छोटा तालाब भी है, जहां का पानी इतना साफ है कि पीया भी जा सकता है। यहां से आगे जाने पर दो कमरों का एक छोटा महल दिखता है, जिसमें 10-12 लोग रुक सकते हैं।
ट्रैक पहाड़ के बेस में बने निरगुड़पाड़ा गांव से शुरु होती है, जो त्रयंबकेश्वर से 22 किमी और नासिक से 45 किमी दूरी पर स्थित है। इस पर सबसे पहले 1986 में डग स्कॉट (पर्वतारोही) ने ट्रैकिंग की थी, इसलिए इसे स्कॉटिश कड़ा कहते हैं। इसे पूरा करने में उन्हें दो दिन लगे थे।।।
जय हो सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति की जय🌸🙏🙏

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