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जरूरी फैसला सत्यमेव जयते
09/12/2024

जरूरी फैसला
सत्यमेव जयते

मोटर वाहन दुर्घटना पंचाट का एक महत्वपूर्ण निर्णय
09/12/2024

मोटर वाहन दुर्घटना पंचाट का एक महत्वपूर्ण निर्णय

अवैध निर्माण को प्रश्रय नहीं दे सकते
13/09/2024

अवैध निर्माण को प्रश्रय नहीं दे सकते

दो पहलू
13/09/2024

दो पहलू

सुनो लड़कियों ,तुम यूं न मरा करो ..सुनो !आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,करुणा ,सुनो लड़कियोंतुम यूं न मरा करो ,हत्या कर दो ,य...
25/08/2024

सुनो लड़कियों ,तुम यूं न मरा करो ..

सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

हत्या कर दो ,
या अंग भंग ,
फुफकार उठो ,
डसो ज़हर से,
बन करैत,
बेझिझक ,
बेधड़क ,
प्रतिवाद ,
प्रतिकार ,
प्रतिघात , करा करो

सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

तुम मर जाती हो ,
फिर मर जाती हो ,
मरती ही जाती हो ,
मरती ही रहती हो ,
कभी गर्भ में ,
कभी गर्त में ,
कभी नर्क में ,
दुनिया के दावानल में
तुम यूं न जरा करो ,

सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

मोमबतियां जलाएंगे ,
वे सब ,
खूब जोर से ,
चीखेंगे चिल्लायेंगे ,
मगर ,
खबरदार , जो
भरम पाल बैठो ,
बीच हमारे ही ,
से कोइ हैवान ,
फिर से ,
फिर फिर ,
वही कर उठेगा ,
वो नहीं आयेंगे ,
मरते मरते तो कह दो उनसे ,
तुम यूं न गिरा करो ,

सुनो !
आरुषी,प्रियदर्शनी ,निर्भया ,
करुणा ,
सुनो लड़कियों
तुम यूं न मरा करो ,

25/08/2024

किसी भी देश या समाज की सभ्यता , संस्कृति और संस्कार इस बात पर निर्भर करते हैं कि वो अमुक समाज , देश अपनी स्त्रियों , बच्चों वृद्धों और बेजुबान पशु पक्षियों से कैसा व्यवहार करता है , उनके प्रति कितनी आत्मीयता दया भाव रखता है और किस तरह से इनकी सुरक्षा , संरक्षण और सहायता के लिए खुद को प्रतिबद्ध करता है। किन्तु ये उतनी ही अफ़सोस की बात है कि भारतीय समाज अपने वृद्धों , बच्चों , महिलाओं के प्रति कहीं से भी संवेदनशील और सहृदय नहीं है तो बेजुबानों की तो क्या ही कहा जाए।

12/08/2024

गाजा के लिए रोने वाले , बांग्लादेश पर मौन

अभी हाल ही में पडोसी देश बांग्लादेश में चुनावोपरांत तीसरी बार सत्ता में आई शेख हसीना सरकार को खुनी अराजक और हिंसक तरीके से तख्ता पलट करके उन्हें अपनी जाना बचाने के लिए देश छोड़ने पर विवश कर दिया। और जैसा कि शरिया प्रधान देशों की रवायत है की फिर सरकार , शासन , प्रशासन , पुलिस और सेना तक की ,मिली जुली खामोश सहमति की शह में उग्र हिंसक वहशी सैलाब ने अगले कुछ घंटों और दिनों में अपने ही देश को नोचा लूटा जलाया और बर्बाद कर दिया।

मुस्लिम बाहुल्य जनसंख्या वाले बांग्लादेश के लोगों ने भी अपने जैसे विश्व के दुसरे मुल्कों की तर्ज़ पर ही बचे खुचे अल्पसंख्यकों जो कि इत्तेफाकन हिन्दू हैं , उन का नरसंहार और दमन करने केर रूप में इस मौके को लिया और एक दो नहीं पूरे 65 जिलों में कई दिनों तक सेना पुलिस के शाह और समर्थन में हिन्दू मंदिरों , देवी देवताओं और उसके बाद हिन्दू लोगों पर भयंकर अत्याचार किए। और ये सब बदस्तूर जारी ही है।

आज सोशल मीडिया , मोबाइल , और इंटरनेट के माध्यम से पूरी दुनिया ने बांग्लादेश अवाम का एक वीभत्स चेहरा देखा जिसने अपने न्यायलय के एक निर्णय के विरोध में अपनी महिला प्रधानमंत्री को देश से भागने के विवश किया , और उसके बाद भी अपनी क्रूर और वहशी कट्टरपन से दुनिया में भय फैलाने के लिहाज से देश की सत्ताधारी पार्टी के राजनेताओं , अधिकारीयों और यहां तक कि कलाकारों तक कि कलाकारों तक को न सिर्फ मार डाला गया बल्कि ज़िंदा जलाया गया , सरेआम लटका दिया गया , महिलाओं युवतियों का बालठाकर ह्त्या के बाद उनके शव को शहरी गलियों में घसीट कर दुनिया को अपनी जहालत दिखाते रहे।

बांग्लादेश में एक अंतरिम सरकार का गठन हुआ है और इससे पहले तक पूरा सत्ता पक्ष पूर्व का , पूरी न्यायपालिका और सेना के साथ साथ अल्पसंख्यक या तो ख़त्म या फिर नियंत्रित कर लिया गया है।

यहां एक गौर करने वाला प्रश्न ये है की बांग्लादेश के पडोसी देश भारत में गाजा फिलिस्तीन और रूस यूक्रेन जैसे देशों से चल रहे युद्ध में अपने पक्ष और अपनी कौम के लिए यहाँ भारत में प्रदर्शन , उपद्रव और अशांति तक करने से गुरेज नहीं करते , राजनेता , खिलाडी अभिनेता , ामाज सेवी वे सभी जो भारत में क्या भारत के बाहर के लिए हमदर्दी वाली तख्ती लिए खड़े हो जाते हैं आखिर उन सबको बांग्लादेश में हिन्दुओं का कत्लेआम कैसे और क्यों नहीं दिखाई दे रहा ??

जिस तरह से भारत के पडोसी देशों , पाकिस्तान , बांग्लादेश , म्यामनार आदि में हिन्दुओं पर आसानी से अत्याचार और हमले किए जा रहे हैं और इन सब देशों से उन्हें पूरी तरह ख़त्म करने पर विवश किया जा रहा है ऐसे में तो ये बहुत जरूरी हो जाता है की दुनिया ऐसे में ये बहुत जरूरी हो जाता है कि दुनिया में भारत जैसा हिन्दू सनातन संस्कृति वाला देश बचा रहे ताकि पडोसी देश की सबसे शक्तिशाली महिला को भी जरूरत पड़ने पर अपनी जान बचाने के लिए यहाँ की शरण लेने में संकोच और डर न महसूस हो।

विपक्ष जो नागरिकता संशोधन विधेयक का विरोध करता रहा है उसे अब बांग्लादेश में हो रहे हिन्दुओं के नरसंहार और उसके डर से वहां से पलायन का दर्द भी शायद ही दिखे और समझ आ सके , वैसे इस बात की अपेक्षा मौजूदा विपक्ष करना ही बेमानी है।

दुर्घटनाओं के लिए क्यों नहीं तय हो पाती किसी की जिम्मेदारी ??इस देश में कुछ बातें असाधारण और बेहद चिंताजनक होते हुए भी ,...
07/08/2024

दुर्घटनाओं के लिए क्यों नहीं तय हो पाती किसी की जिम्मेदारी ??

इस देश में कुछ बातें असाधारण और बेहद चिंताजनक होते हुए भी , इतनी बार दोहराई जा चुकी हैं कि वो अब साधारण बातें और रोज़ाना की दिनचर्या में से एक जैसी ही बन गई हैं या शायद बना दी गई हैं। हमारे आसपास लापरवाही के कारण होने वाली सैकड़ों दुर्घटनाएं , फिर चाहे वो कोई रेल दुर्घटना हो , किसी समारोह आयोजन में अचानक मची भगदड़ हो या फिर हाल ही में दिल्ली जैसे महानगर के बीचोंबीच बारिश के पानी में डूब कर तीन युवा बच्चों की मौत , या दिल्ली में ही खुले नाले में गिर कर एक महिला और उसकी बच्ची की मौत । ये तमाम घटनाएं , दुर्घटनाएं , बार बार घटती हैं , हर साल घटती हैं , बस समय और स्थान बदल जाता है।

इन दुर्घटनाओं के तुरंत बाद दो काम करके आगे बढ़ जाने का जो चलन चला आ रहा है वो जैसे अब एक नियति ही बन चुका है। दुर्घटना के पीड़ितों को आर्थिक सहायता के नाम पर कुछ अनुदान राशि देने की घोषणा और उसके साथ ही दुर्घटना की जांच करने के लिए किसी जांच दल , आयोग का गठन करके रिपोर्ट आने पर दोषियों को बख्शे नहीं जाने का दावा। जबकि असलियत में इन तमाम दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार संस्था , अधिकारी या विभाग तक की पहचान करके उसे क़ानून की चौखट तक ले जाना ही सबसे असंभव कार्य हो जाता है।

दिल्ली के कोचिंग सेंटर दुर्घटना मामले को देख कर इसे आसानी से समझा जा सकता है , जहां पुलिस ने जांच के नाम पर कोचिंग संस्थान के गेट को उखड़वा कर उसकी मजबूती जांच परख कर रही है वहीँ दोषी के रूप में पकड़ लिया एक वाहन चालाक को ,बकौल पुलिस जिसकी तेज़ रफ़्तार के कारण ही जलभराव का पानी बेसमेंट में भर गया और छात्र डूब कर मर गए। जांच में कोचिंग संस्थान के मालिक , उस केंद्र के संचालक , मैनेजर , व्यवस्थापक , भवन में अवैध रूप से पुस्तकालय बनाने , इसकी अनुमति देने वाले और ऐसा होते देने रहने वाले तमाम , इन दर्जन भर लोगों को छोड़कर दोषी हुई वो कार जिसके हिचकोले से कोचिंग संस्थान का गेट टूट गया। अदालत ने भी ये सब देखकर पुलिस और जांच एजेंसियों को कड़ी फटकार लगाई।

ऐसी ही एक दूसरी दुर्घटना , जिसमें दिल्ली नगर निगम ने एक बड़े नाले की मरम्मत करते हुए उसे खुला छोड़ दिया जहां बारिश के जलभराव में एक महिला और उसकी बच्ची की गिर कर मृत्यु हो गई और अभी तक दिल्ली विकास प्राधिकरण और दिल्ली नगर निगम के बीच एक दुसरे को दोषी ठहराने की कवायद जारी है।

जिस तरह से भीड़ का अपराध या भीड़ में किसने कौन का अपराध किया ये तय कर पाना हमेशा ही दुरूह कार्य होता है ठीक ऐसा ही होता किसी भी दुर्घटना के लिए जिम्मेदार आरोपियों को और यदि ये सरकारी महकमा हुआ तो ये और भी अधिक कठिन बल्कि बेहद दुष्कर हो जाता है। एक विभाग का नाम आते ही उसके सहयोगी अन्य किसी न किसी विभाग पर भी ऊँगली उठती है। जितने विभाग उनके उतने कर्मचारी अधिकारी जो , सभी सम्बंधित हैं या फाइल कागजातों में सबके नाम आ जाते हैं ऐसे में फिर सब एक दूसरे क बचाने में लग जाते हैं।

नाले में गिर कर मृत्यु वाले हादसे मामले में मुकदमे की सुनवाई करते हुए आखिरकार न्यायालय को सख्त रुख अपनाना पड़ा है और उसने सीधे सीधे जांच एजेंसी और दोषी संस्थाओं से आरोपियों की पहचान कर उन पर कार्रवाई करने अन्यथा अदालत द्वारा स्वय आदेश देकर ऐसा किए जाने की सख्त चेतावनी दी गई है।

जब दुर्घटनाओं के लिए किसी की जिम्मेदारी तय करने में हम उलझे रह जाते हैं तो फिर दुर्घटना के कारणों , और उस दुर्घटना से सीख लेकर भविष्य में ऐसी दुर्घटनए न हों इसके लिए विचार और उपाय आदि पर काम करना तो बहुत दूर की कौड़ी होती है। असल में हालात तो ये है कि कोई भी दुर्घटना का समाचार और लोगों का उससे सरोकार भी सिर्फ और सिर्फ तभी तक रहता है जब तक कोई और नई दुर्घटना हमारे सामने नहीं आ जाती। ये देश ऐसे ही चलता है , ऐसे ही चलता रहा है।

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