21/09/2026
“हर चालाकी समझदारी नहीं होती… कुछ लोग अपनी होशियारी से अपना ही नुकसान कर बैठते हैं।”
आजकल लोग चालाकी, चतुराई और बेशर्मी के मिश्रण को होशियारी कहने लगे हैं।
किसी को मात देना, बातों को घुमा देना या अपना मतलब निकाल लेना—इसे सफलता समझ लिया जाता है।
लेकिन असली होशियारी वह है, जिसमें दिमाग के साथ ज़मीर भी ज़िंदा रहे।
क्योंकि चालाक इंसान कुछ समय के लिए लोगों को हरा सकता है,
लेकिन समझदार इंसान लंबे समय तक लोगों का विश्वास जीतता है।
याद रखिए—
चालाकी से फायदा मिल सकता है,
चतुराई से रास्ता मिल सकता है,
लेकिन अच्छे चरित्र से सम्मान मिलता है। ❤️
आज के दौर में होशियार बनने से पहले अच्छा इंसान बनना ज़रूरी है।
आपके हिसाब से असली होशियारी क्या है—चालाकी या समझदारी?
👇 कमेंट में अपनी राय जरूर बताइए।
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