30/07/2026
आप किसकी आवाज़ सुन रहे हैं?
"तब यहोवा परमेश्वर ने उससे कहा, 'तुझे किसने बताया कि तू नंगा है?'"
— उत्पत्ति 3:11
आदम और हव्वा ने अदन की वाटिका में परमेश्वर की आज्ञा का उल्लंघन किया। पाप करने के बाद वे भयभीत हो गए, लज्जित हुए और अपने आप को छिपाने लगे, क्योंकि उन्हें लगा कि वे नंगे हैं। तब परमेश्वर ने आदम से पूछा, "तुझे किसने बताया कि तू नंगा है?" यह प्रश्न इसलिए था कि आदम समझे कि उसके अपराधबोध, भय और लज्जा का स्रोत परमेश्वर नहीं, बल्कि शैतान का छल और झूठ था।
आज भी शैतान उसी प्रकार झूठ बोलता है। वह आपके मन में ऐसे विचार डालता है:
"तुम योग्य नहीं हो।"
"तुमसे बहुत गलतियाँ हो चुकी हैं।"
"तुम कभी सफल नहीं हो सकते।"
"तुम गलत परिवार में पैदा हुए हो।"
जब भी ऐसे विचार आएँ, अपने आप से पूछें: "ये विचार कहाँ से आ रहे हैं?" यदि वे आपको निराश करते हैं, दोषी ठहराते हैं, डराते हैं या आपको अयोग्य महसूस कराते हैं, तो निश्चय जान लें कि वे परमेश्वर की ओर से नहीं हैं।
परमेश्वर की आवाज़ हमेशा आशा, प्रेम, सत्य और जीवन देती है। वह कहता है:
"मैंने तुझे अपने स्वरूप में बनाया है।"
"तू अद्भुत रीति से रचा गया है।"
"तू मेरी उत्कृष्ट रचना (Masterpiece) है।"
"मैं तुझसे प्रेम करता हूँ।"
इसलिए शैतान के झूठ को स्वीकार मत कीजिए। उन्हें एक कान से सुनकर दूसरे कान से निकाल दीजिए। परमेश्वर के वचन पर विश्वास कीजिए और वही सुनिए जो वह आपके बारे में कहता है।
आज की प्रार्थना
"हे पिता परमेश्वर, धन्यवाद कि आपका प्रेम और आपकी स्वीकृति मेरे कामों या मेरी योग्यताओं पर आधारित नहीं है। धन्यवाद कि मुझे अपराधबोध और दोषारोपण के कारण आपसे दूर रहने की आवश्यकता नहीं है। आज मैं घोषणा करता हूँ कि मैं केवल वही सुनूँगा और विश्वास करूँगा जो आप मेरे बारे में कहते हैं। यीशु के नाम में, आमीन।"