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Nirish Kumar mahato Jharkhand sanskriti

जब हम दूसरों को खुश करने की बजाय अपने अंतर्मन और सिद्धांतों के प्रति सच्चे होते हैं, तो जिंदगी का सफर आसान हो जाता है।Go...
22/05/2026

जब हम दूसरों को खुश करने की बजाय अपने अंतर्मन और सिद्धांतों के प्रति सच्चे होते हैं, तो जिंदगी का सफर आसान हो जाता है।
Good morning everyone 🌄🙏

जीवन में परीक्षा कभी खत्म नहीं होतीजब कुछ न हो तो धैर्य की परीक्षा होती है, और जब सब कुछ हो तो व्यवहार की परीक्षा होती ह...
14/05/2026

जीवन में परीक्षा कभी खत्म नहीं होती
जब कुछ न हो तो धैर्य की परीक्षा होती है, और जब सब कुछ हो तो व्यवहार की परीक्षा होती है।
सुप्रभात जोहार नमस्कार 🌹❤️🙏

कभी-कभी सच इतना कड़वा होता है कि उसे कहने से पहले ही गला सूख जाता है लेकिन फिर भी कहना पड़ता है, क्योंकि चुप रहना उससे भ...
23/04/2026

कभी-कभी सच इतना कड़वा होता है कि उसे कहने से पहले ही गला सूख जाता है लेकिन फिर भी कहना पड़ता है, क्योंकि चुप रहना उससे भी ज़्यादा घुटन देता है।

पुरुष होना इस समाज में कोई विशेषाधिकार नहीं, एक अदृश्य जिम्मेदारी है जो जन्म के साथ ही कंधों पर रख दी जाती है। जन्म लेते ही जैसे कोई फुसफुसा कर कह देता है “तुम्हें रोना नहीं है…तुम्हें कमाना है।”

बचपन से ही उसकी हँसी पर शर्तें लग जाती हैं।
उसे खिलौनों से नहीं, भविष्य से खेलना सिखाया जाता है। जब वो गिरता है, उसे उठाने से पहले ये सिखाया जाता है कि मर्द बनो, दर्द नहीं दिखाते। धीरे-धीरे वो बच्चा नहीं रहता, एक प्रोजेक्ट बन जाता है। घर की उम्मीदों का प्रोजेक्ट। माँ-बाप के अधूरे सपनों का प्रोजेक्ट। समाज के बनाए साँचे में ढलने का प्रोजेक्ट।

और सबसे दर्दनाक बात ये है कि उसे कभी ये नहीं पूछा जाता कि तुम क्या चाहते हो? बल्कि उसे बस बताया जाता है "तुम्हें क्या करना है"।

वो पढ़ता है, इसलिए नहीं कि उसे ज्ञान से प्रेम है, बल्कि इसलिए कि उसे कमाना है। वो नौकरी करता है, इसलिए नहीं कि वो खुश है, बल्कि इसलिए कि घर चलाना है।

उसकी ज़िंदगी धीरे-धीरे उसकी अपनी नहीं रहती, वो एक “इन्वेस्टमेंट” बन जाता है, जिसमें भावनाएँ नहीं, सिर्फ़ “रिटर्न” देखे जाते हैं।

जब तक वो कमाता है, झुकता है, सहता है तब तक वो अच्छा बेटा, अच्छा पति , अच्छा पिता है, और जिस दिन वो टूट जाए, थक जाए, या रुक जाए उसी दिन वो “नालायक” हो जाता है।

कोई नहीं पूछता कि उसके अंदर कितना शोर है। कोई नहीं देखता कि उसकी मुस्कान के पीछे कितनी थकान है। कोई नहीं समझता कि वो भी रातों में चुपचाप रोता है। बस आवाज़ नहीं करता, क्योंकि उसे सिखाया गया है कि “मर्द रोते नहीं।”

उसकी भावनाएँ मज़ाक बन जाती हैं। उसका दर्द कमजोरी कहलाता है। उसका अकेलापन उसकी आदत मान लिया जाता है।

वो हर रिश्ते में देता ही देता है
बेटा बनकर देता है,
भाई बनकर देता है,
पति बनकर देता है,
पिता बनकर देता है…

लेकिन कभी कोई रिश्ता उससे ये नहीं कहता कि "तुम भी थक सकते हो…तुम भी टूट सकते हो…तुम भी इंसान हो।”

उसके कंधे मजबूत समझ लिए जाते हैं, इसलिए उन पर हर बोझ रख दिया जाता है और धीरे-धीरे वो कंधे नहीं, एक ढोने वाली मशीन बन जाते हैं। सबको उसका संघर्ष दिखता है, लेकिन किसी को उसका सन्नाटा नहीं सुनाई देता।

और सबसे कड़वा सच ये है कि जब वो अपनी ज़रूरतें, अपने सपने, अपनी खुशियाँ सब कुछ कुर्बान कर देता है तो भी उसे “फर्ज़” कहा जाता है, “प्यार” नहीं।

शायद इसलिए कई बार मन चीख उठता है, क्या सच में पुरुष होना सिर्फ़ एक ज़रिया है? एक ऐसा ज़रिया, जिससे सबको सहारा मिले, लेकिन खुद वो कभी सहारा ना पा सके?

ये सवाल गलत नहीं है, ये दर्द है जो सालों से दबा हुआ है। पुरुष पत्थर नहीं होते, बस उन्हें पत्थर बनने पर मजबूर कर दिया जाता है, और एक दिन वो सच में पत्थर हो जाते हैं बिना शिकायत, बिना आवाज़, बस खड़े रहते हैं जब तक टूट न जाएँ।

तब मन से आह निकलती है, चीख निकलती है कि इतनी वीभत्सता से अच्छा है वो जन्म ही न लें या जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाएं!

_____
#मेरी_जीवन_की_आत्मकथा 💐🙏🙏

से पुरन रस्ता अब दिल के डराव लागल,तोहर चुप्पी के मंजर मन में जागे लागल।आँख भीतर रोकल छे तू समुंदर जइसन पीर,माझी के झोंका...
07/03/2026

से पुरन रस्ता अब दिल के डराव लागल,
तोहर चुप्पी के मंजर मन में जागे लागल।
आँख भीतर रोकल छे तू समुंदर जइसन पीर,
माझी के झोंका आके मन के पागल करे लागल।
जिनगी के धूपे छइयाँ कहीं मिलल नइ,
बंद दरीचा काहे फड़फड़ाए लागल।
तोहर संग जे बात के अँस बचल अब तलक,
ओही सहारे दिल अपन मनावए लागल।
दिल चाहत रहल भूले ओ बितल काल,
फेर पुरन घाव सब दुखावए लागल।
तू नइखेस त शहरो सुनसान बुझाए,
घर के दीवारो अब डरावए लागल।
मंजिल दूर हउक, तोहर एहसास संग हे,
पाँव थाक गिरे त सपन आवए लागल।
दिल हार मानल अब अइसन हाल हो गेल,
अपन के खोके तोके अपन भीतर पावए लागल।

डॉ निरीश कुमार महतो (बानुआर)
प्रदेश महासचिव आदिवासी कुड़मि समाज

27/02/2026

धनबाद नगर निगम
दूसरे राउंड के बाद
Sanjiv Singh 28377
चंद्रशेखर Agrawal 18433
Sanjiv Kumar 15789
Shamsher Alam 10246
Prakash Kumar 4195

सब गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है,दुनिया की हर गली में अजीब सा हाल है।चेहरे पे मुस्कान, दिल में सवाल है,किसका क्या इरादा है...
25/02/2026

सब गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है,
दुनिया की हर गली में अजीब सा हाल है।
चेहरे पे मुस्कान, दिल में सवाल है,
किसका क्या इरादा है—सब बेहाल है।
ऐसे में दो दोस्त खड़े साथ-साथ,
एक का हाथ दूजे के हाथ।
जब भी हालात करें कोई कमाल,
हँसकर बोलें—“अरे भाई, सब गोलमाल!”
एक कहे, “चाय पिला दे, दिमाग हो रहा जाम,”
दूजा हँसे, “पहले तू बता, क्या है तेरा काम?”
दुनिया चाहे खेले कितने भी खेल,
दोस्ती रहे सच्ची—यही सबसे बड़ा मेल।
जब लोग बदलें मौसम की तरह,
ये ना बदलें कभी राह की तरह।
सुख में भी संग, दुख में भी ढाल,
दोस्ती कहे—“भाई, चाहे जो हो, हम नहीं गोलमाल!”
हाँ, सब गोलमाल है भाई, सब गोलमाल है,
पर सच्चे दोस्त हों तो जीवन कमाल है।
सुप्रभात जोहार नमस्कार 🌹🙏

किसी भी समाज की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने अतीत की गलतियों को स्वीकार करे। अंधविश्वास पाखंड प्रथा को आज ...
14/02/2026

किसी भी समाज की प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वह अपने अतीत की गलतियों को स्वीकार करे। अंधविश्वास पाखंड प्रथा को आज कानूनन अपराध घोषित किया जा चुका है..!!, लेकिन इसके अवशेष आज भी समाज के कुछ हिस्सों में छिपे हुए हैं।
धार्मिक शोषण और षड्यंत्र के अहंकार ने जिस तरह जनजातीय संस्कृति और सभ्यता ने जीवन बर्बाद किया, उस पर खुलकर चर्चा करना और शोध करना जरूरी है..!!

जय गराम जोहार आदिवासी कुड़मि समाज
डॉ निरीश कुमार महतो (बानुआर)
प्रदेश महासचिव आदिवासी कुड़मि समाज।

 #एक नस्लीय वंश परंपरा व संगठित समाज किसी भी जनजाति की अंतर्निहित गुण होती है और कोई भी जनजाति अपने अस्तित्व  को बनाए रख...
29/01/2026

#एक नस्लीय वंश परंपरा व संगठित समाज किसी भी जनजाति की अंतर्निहित गुण होती है और कोई भी जनजाति अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए ही परंपराएं सृजित करती हैं और उनपर चलती हैं क्योंकि उन्हें त्यागने पर नस्ल अस्तित्व समाप्त हो जाती है!जैसे निम्न परंपराएं जनजाति #कुड़मि द्वारा पालन किए जाते हैं!सोंचे,यदि पालन न हो तो आपको क्या क्या हानि हो सकती है!
1)बड़ बांटा!
2)भइगना (देउइता) :मामा/मामी द्वारा गड़ लगना!
3) सम-गुसटि बिहा निषेध!
4)भैंसुर -भाउआसिन छुआइत!
5) घर-जमाई परंपरा निषेध!
6)स्व-गांव बिहा निषेध!
7)अचल-संपत्ति में कन्या हिस्सा निषेध!
8)बिहा-सांघा से इतर जन्मना को उत्तराधिकार नहीं!
9) भैंसुर बेटा को गड़ लगना!
10)ननद नंदसु का पैर धोना!
11)बिहा के पहले सुरजाहि!
12)सुरजाहि पूर्व मृतक का गतिआ छुइत नहीं!
13)अमलो खाउआ!
14) कखना बांधना !....

#सगुन_बिहान_जोहार 🌹🌷🙏🙏

16/01/2026

मनुष्य का सबसे अच्छा साथी उसका स्वास्थ्य है, जिस दिन स्वास्थ्य ने साथ छोड़ा मनुष्य हर रिश्ते पर बोझ बन जाता है..!!! Good morning

Good evening everyone 🌞🙏❤️🙏.
13/01/2026

Good evening everyone 🌞🙏❤️🙏.

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