07/10/2026
मजबूरी को बनाया ताकत: 10 मिनट की दौड़ 6 मिनट में पूरी कर इस विधवा मां ने रचा इतिहास!
"कहते हैं कि एक मां अपने बच्चों के भविष्य के लिए किसी भी मुश्किल से टकरा सकती है। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश की है झारखंड के रामगढ़ की रहने वाली कविता महतो ने।
कविता एक विधवा हैं, जिनके कंधों पर दो छोटे बच्चों और बूढ़े सास-ससुर के भरण-पोषण की पूरी जिम्मेदारी है। घर के हालात इतने खराब थे कि उनके पास दौड़ने के लिए जूते और ट्रैक सूट खरीदने तक के पैसे नहीं थे। लेकिन उन्होंने अपनी गरीबी को अपने सपनों के आगे नहीं आने दिया।
तपती धूप में, साड़ी पहनकर और नंगे पांव दौड़ते हुए कविता ने न सिर्फ रेस में हिस्सा लिया, बल्कि 10 मिनट की दौड़ को महज 6 मिनट में पूरा करके सबको हैरान कर दिया। कविता का सपना होमगार्ड बनना है, ताकि वे एक सम्मानजनक नौकरी पाकर अपने बच्चों का भविष्य संवार सकें।
अपने इस लक्ष्य को पाने के लिए कविता हर दिन सुबह 4 बजे उठती हैं और साड़ी पहनकर ही दौड़ने की कड़ी प्रैक्टिस करती हैं। कविता महतो का यह जज्बा देश की लाखों महिलाओं और युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है। सलाम है इस मां के संघर्ष और हौसले को!