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वीर शिरोमणि चूहड़ जी गोदारा: त्याग, शौर्य और गौ-सेवा का अनुपम इतिहासराजस्थान की मरुधरा वीरों की कहानियों से पटी पड़ी है,...
03/01/2026

वीर शिरोमणि चूहड़ जी गोदारा: त्याग, शौर्य और गौ-सेवा का अनुपम इतिहास
राजस्थान की मरुधरा वीरों की कहानियों से पटी पड़ी है, लेकिन चूहड़ जी गोदारा का बलिदान 'गोदारा पट्टी' के इतिहास में एक मील का पत्थर माना जाता है। उन्हें एक 'दानीवीर' और 'गौ-रक्षक देवता' के रूप में पूजा जाता है। चूहड़ जी का जीवन और उनका बलिदान हमें सिखाता है कि धर्म और गौ-माता की रक्षा के लिए प्राणों का मोह त्यागना ही वास्तविक क्षत्रिय धर्म है।
1. पारिवारिक पृष्ठभूमि और उद्गम
चूहड़ जी के पूर्वज मूलतः जांगलप्रदेश की प्राचीन राजधानी सेरूणा से संबंधित थे।
*उनके पिता पीपा जी ने सेरूणा से विस्थापित होकर पिपैरा गाँव की स्थापना की थी।*
स्थापना: विक्रम संवत 1465 (लगभग 1408 ईस्वी) में पीपा जी ने पिपैरा गाँव बसाया और वहाँ जनकल्याण के लिए कुआं खुदवाया।
वंश विस्तार: पीपा जी के पुत्र चूहड़ जी हुए। आज भी चूहड़ जी के वंशज राजस्थान के मळकीसर, कुपरीसर, गोपालयाण, ऊंचाईडॉ और खियेरा जैसे समृद्ध गाँवों में निवास करते हैं और अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं।
2. बलिदान की गाथा: गौ-रक्षा के लिए महासमर
चूहड़ जी के जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटना वह युद्ध है जिसने उन्हें अमर कर दिया। उन दिनों गायों को धन और धर्म का प्रतीक माना जाता था।
युद्ध का कारण:
एक समय 'राहट' जाति के लुटेरों का कबीला चूहड़ जी के क्षेत्र में आ धमका। इन कबीले वालों ने निर्दोष गायों पर अत्याचार करना शुरू कर दिया और बड़ी संख्या में गायों को हांककर ले जाने लगे।
वीरगति:
जब यह सूचना चूहड़ जी को मिली, तो उन्होंने बिना क्षण गंवाए अपनी तलवार उठा ली। उन्होंने लुटेरों का पीछा किया और उन्हें ललकारा। भीषण युद्ध हुआ, जिसमें चूहड़ जी ने अकेले ही कई शत्रुओं को धूल चटाई। गायों को मुक्त कराते समय चूहड़ जी ने अदम्य साहस का परिचय दिया और अंततः मातृभूमि और गौ-माता की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
3. सतीत्व और अटूट प्रेम
चूहड़ जी के बलिदान की खबर जब घर पहुँची, तो उनकी तीनों पत्नियों ने अपने पति के पीछे 'सती' होने का निर्णय लिया। यह उनके अटूट प्रेम और धर्म के प्रति निष्ठा का प्रमाण था।
तिथि: विक्रम संवत 1505 (लगभग 1448 ईस्वी), वैशाख वदी पंचमी, रविवार।
पूजनीय स्थान: आज भी 'कालु' गाँव में उनकी पूजा बड़ी श्रद्धा के साथ की जाती है।
पत्नी का नाम गोत्र / शाखा
मोजी देवी जाजड़ा
माली देवी झोरड़
कपुरी देवी सिंवर
जिनके नाम से आज भी कपूरीसर गांव बसा हुआ है
4. संतति और सामाजिक विस्तार
चूहड़ जी का परिवार बहुत विशाल था। उनके 18 पुत्र और 1 पुत्री का विवरण इतिहास में मिलता है:
पुत्र: गोपाल, भिवा, भिखा, रूपा, कड़वा, सांगा, जगा, लच्छा, धोला, जोखर, भैंराम, सकताराम, गजला, सांतल, कुपाजी, भोजाजी, करणा और केशा।
पुत्री सोनल: चूहड़ जी की सुपुत्री सोनल का विवाह हंसा जी मूंड के साथ हुआ था। उनके विवाह के समय चूहड़ जी के परिवार की संपन्नता और दानवीरता का परिचय मिलता है, जहाँ उन्होंने 7 गाँव (पिया, खारी, उदेशिया, झलमेरा, देसेरा, खियेरा, मुड़सर और नेत्यास) दहेज में दिए थे।
5. भेषभोज: एकता का प्रतीक
विक्रम संवत 1497 में चूहड़ जी के वंशजों ने एक विशाल 'भेषभोज' (सामूहिक भोज) का आयोजन किया था। यह आयोजन समाज की एकता, शक्ति और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
6. दानीवीर के रूप में मान्यता
गोदारा पट्टी में चूहड़ जी को केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि 'दानीवीर' की उपाधि दी गई है। उन्होंने न केवल युद्ध के मैदान में अपने रक्त का दान दिया, बल्कि समाज के लिए अपनी संपत्ति और गाँवों का भी सहर्ष दान किया।
आज भी कालु गाँव और आसपास के क्षेत्रों में चूहड़ जी के नाम की शपथ ली जाती है और उन्हें एक लोक देवता के रूप में पूजा जाता है। उनका इतिहास राजस्थान के युवाओं के लिए वीरता और त्याग का प्रेरणा स्रोत बना रहेगा।

गुसांईसर छोटा: वीरूराम जी गोदारा और जांगल प्रदेश का गौरवशाली इतिहास​राजस्थान की रेतीली धरती और जांगल प्रदेश के हृदय में ...
30/12/2025

गुसांईसर छोटा: वीरूराम जी गोदारा और जांगल प्रदेश का गौरवशाली इतिहास
​राजस्थान की रेतीली धरती और जांगल प्रदेश के हृदय में बसा गुसांईसर छोटा गांव केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि गोदारा जाटों के शौर्य, त्याग और भक्ति का प्रतीक है। इस गांव की नींव आज से लगभग साढ़े पांच सौ वर्ष पूर्व एक दूरदर्शी योद्धा ने रखी थी।
​1. गांव की स्थापना और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
​विक्रम संवत 1513 की बात है, जब जांगल प्रदेश की राजनीति में गोदारा पट्टी का विशेष महत्व था। उस समय सेरूणा इस क्षेत्र की राजधानी हुआ करती थी। वीर योद्धा बीरूराम जी गोदारा ने एक नए युग का सूत्रपात करते हुए गुसांईसर छोटा गांव को बसाया।
​यह गांव बीरूराम जी को उनके दादा किलू जी गोदारा की विशाल रियासत के बदले में प्राप्त हुआ था। बीरूराम जी के दादा किलू जी एक प्रभावशाली शासक थे, जिन्होंने लोक कल्याण हेतु गांव में एक विशाल तालाब का निर्माण करवाया था, जिसे आज भी 'कीलाना' के नाम से जाना जाता है। यह तालाब सदियों से इस क्षेत्र की जीवनरेखा बना हुआ है।
​2. वीरूराम जी गोदारा: एक योद्धा और भक्त
​बीरूराम जी गोदारा केवल एक कुशल प्रशासक ही नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के योद्धा और धर्मपरायण व्यक्ति थे। उनके शासनकाल में:
​गोसाईं जी महाराज का मंदिर: उन्होंने गांव के आध्यात्मिक केंद्र के रूप में गोसाईं जी महाराज के मंदिर का निर्माण करवाया।
​ओरण भूमि का दान: पर्यावरण और गोचर के संरक्षण हेतु उन्होंने मंदिर के लिए 107 बीघा भूमि 'ओरण' के रूप में दान की, जो उनकी प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
​सैन्य और पारिवारिक शक्ति: बीरूराम जी अकेले नहीं आए थे, उनके साथ उनके दो पराक्रमी भतीजे—चौथा जी गोदारा और राणा जी गोदारा—भी इस गांव के विकास में भागीदार बने। आज भी गांव में उनके नाम से दो अलग-अलग मोहल्ले (बास) बसे हुए हैं, जो उस समय के पारिवारिक संगठन को दर्शाते हैं।
​3. पांडु जी गोदारा और राजनीतिक प्रभाव
​उस कालखंड में पांडु जी गोदारा जांगल प्रदेश के सबसे प्रभावशाली राजाओं और सरदारों में गिने जाते थे। बीरूराम जी गोदारा और पांडु जी के बीच घनिष्ठ संबंध थे। वीरूराम जी की गणना जांगल प्रदेश के उन योद्धाओं में होती थी, जिनकी सलाह और युद्ध कौशल पर रियासत को गर्व था।
​4. वंश विस्तार और आधुनिक स्वरूप
​समय के साथ बीरूराम जी के वंशजों ने गांव के विकास को जारी रखा। इन्हीं के परिवार में आगे चलकर चाचा जी गोदारा हुए, जिन्होंने 'चाचाणा जोड़ा' तालाब का निर्माण करवाया।
​आज गुसांईसर छोटा एक समृद्ध गांव है जहाँ:
​लगभग 700 परिवार गोदारा जाटों के निवास करते हैं।
​गांव की संस्कृति आज भी अपने पूर्वजों के सिद्धांतों—न्याय, भक्ति और परोपकार—पर टिकी है।
​कीलाना और चाचाणा जैसे तालाब आज भी उन महापुरुषों की याद दिलाते हैं जिन्होंने मरुस्थल में जल प्रबंधन की मिसाल पेश की थी।
​निष्कर्ष
​गुसांईसर छोटा का इतिहास बीरूराम जी गोदारा के बलिदान और किलू जी गोदारा की विरासत का मिश्रण है। यह कहानी हमें सिखाती है कि कैसे एक छोटे से क्षेत्र को अपनी मेहनत और धर्मनिष्ठा से एक समृद्ध सांस्कृतिक केंद्र बनाया जा सकता है। आज भी यहाँ की हवाओं में गोदारा वंश के उन वीरों की गूँज सुनाई देती है, जिन्होंने संवत 1513 में इस पावन धरा को अपना ठिकाना बनाया था।

23/10/2025

संत श्री नवलराम जी महाराज राम सेवा आश्रम वृंदावन
प्रेमानंद महाराज से आध्यात्मिक चर्चा करने पहुंचे कैली कुंज आश्रम
नवलराम महाराज और प्रेमानंद महाराज के बीच प्रणाम के महत्‍व को लेकर आध्‍यात्मिक संवाद हुआ। प्रेमानंद ने कहा कि वह संतों का झूठन ही भक्‍तों में बांटते हैं।
धर्म और आध्यात्म की नगरी वृंदावन में संतों के बीच एक महत्वपूर्ण भेंट हुई। वृंदावन के प्रसिद्ध राम सेवा आश्रम के महंत नवलराम महाराज, आध्यात्मिक चर्चा के लिए श्रीराधा हेति केलि कुंज आश्रम पहुंचे। यहां उन्होंने प्रेमानंद महाराज से मुलाकात की। दोनों संतों के बीच काफी देर तक आध्यात्मिक सत्संग पर गहन चर्चा हुई।प्रणाम और अहंकार पर चर्चा
मुलाकात के दौरान नवलराम महाराज ने प्रेमानंद महाराज को आध्यात्मिक पुस्तक भेंट करते हुए उनका माल्यार्पण किया और प्रणाम किया। इसके बाद दोनों संतों के बीच 'प्रणाम' के महत्व पर आध्यात्मिक संवाद हुआ। नवलराम महाराज ने कहा, 'प्रणाम सदैव अपने से श्रेष्ठ को किया जाता है और भगवान सबसे श्रेष्ठ हैं। प्रणाम करने से जीव का अहंकार स्वाभाविक रूप से समाप्त होता है।' उन्होंने प्रेमानंद महाराज से धर्म का प्रचार निरंतर जारी रखने की प्रार्थना करते हुए कहा कि पूरा संत समाज उनका बहुत आभारी
कलिकाल पर प्रेमानंद महाराज के विचार
इस पर प्रेमानंद महाराज ने कहा, 'हम तो आप सब संतों का झूठन ही बांटते हैं। यदि महापुरुषों के वचनों के अनुसार चला जाए, तो यह कलिकाल है ही नहीं।'
सादगी और निस्‍वार्थ सेवा के लिए जाने जाते हैं नवलराम महाराज
नवलराम महाराज वृंदावन में स्थित श्री रामसेवा आश्रम के संस्थापक और महंत हैं। उन्हें उनकी सादगी और निस्वार्थ सेवा के लिए जाना जाता है। वे भक्तों को भगवान का नाम जपने की महिमा और शांति के महत्व के बारे में सिखाते हैं। उनकी पहचान उन संवादों के लिए है जिनमें वे बताते हैं कि भगवान का नाम जपना ही प्राणियों की सबसे बड़ी सेवा है। भक्त अक्सर उनकी सरलता की प्रशंसा करते हैं और उन्हें एक ऐसे संत के रूप में देखते हैं जो समाज को केवल दिशा देते हैं।
#प्रेमानंदमहाराज
#वृंदावन

GODARA DAIRY  फार्म पर ( राठी) साहीवाल उन्नत नस्ल यह गाय बिकाऊ हे जिन किसान भाई को गाय खरीदनी हे वो इच्छुक भाई संपर्क कर...
02/10/2025

GODARA DAIRY फार्म पर ( राठी) साहीवाल उन्नत नस्ल यह गाय बिकाऊ हे जिन किसान भाई को गाय खरीदनी हे वो इच्छुक भाई संपर्क करे
17 लीटर प्रतिदिन दूध देती है गाय के पीछे बछड़ी हैं
गोदारा डेयरी गुसांईसर बीकानेर राजस्थान

#साहीवाल
#राठी

जगदीश प्रसाद जी पांडर थानाधिकारी  पुलिस थाना पल्लू( हनुमानगढ़ )पुलिस उपनिरीक्षक से पदोन्नत होकर पुलिस निरीक्षक बनने पर ह...
12/09/2025

जगदीश प्रसाद जी पांडर थानाधिकारी पुलिस थाना पल्लू( हनुमानगढ़ )पुलिस उपनिरीक्षक से पदोन्नत होकर पुलिस निरीक्षक बनने पर हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं। आप ऐसे ही सदैव उन्नति व प्रोन्नति करते रहे ❤️❤️❤️

23/04/2025

आज हम आये हे गोदारा डेयरी मे यहाँ आपको हम दिखा रहे ह दूध से बने पेड़े जो खाने मे बहुत स्वादिष्ट और लजीज ह इन पेड़ो को हम मंदिर में प्रसाद व घरो मे खाने मे इस्तेमाल करते ह इनके पेड़े बीकानेर क्षेत्र मे लूनकरनसर डूंगरगढ़ कोलायत नोखा देशनोक सहित बाहर भी जाते ह बीकानेर ग्रामीण की दुकानों मे आपको ये दूध से बने पेड़े आसानी से मिल जायेंगे अगर आप घर बैठे ऑर्डर करना चाहते ह या इसके होलसेल डीलर बनना चाहते ह तो स्क्रीन पे नंबर चल रहे ह आप इंन नंबर पर ऑडर कर सकते ह ग्रामीण क्षेत्र का विश्ववसनीय गोदारा डेयरी गुसाईंसर बीकानेर राजस्थान कॉन्टेक्ट _ 097844 16324
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21/01/2025

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