29/04/2026
अगर मौका मिला कभी,तो कागज पर अपनी थकान लिखूँगा,
मजबूत कंधो के पीछे छुपा,वो छोटा सा इंसान लिखूँगा,
वो जो हर मुश्किल में मुस्कुरा कर कहता है "सब ठिक है",
उस एक झूट के पीछे दबे,हजारों बेबस तूफान लिखूँगा,
नहीं लिखूँगा मैं सिर्फ अपनी जीत के चर्चे दुनियाँ में,
मैं तो हार कर भी जो मुस्कुराया,वो लहूलुहान स्वाभिमान लिखूँगा,
लिखूँगा वो रातें,जब तकिया गवाह था मेरी सिसकियों का,
पर सुबह उठकर फिर से पहना,वो चट्टान जैसा इत्मीनान लिखूँगा,
मैं लिख पाऊँ कुछ तो,मैं खुद को लिखूँगा,
अपनी रूह के हर ज़ख्म को,अपना ही सम्मान लिखूँगा fans