13/12/2022
अरसा (Arsa) उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र एक मीठा पहाड़ी (Traditional Sweet Of Garhwal) व्यंजन है जो शादियों और पारंपरिक समारोहों जैसे विशेष अवसरों पर तैयार किया जाता है। उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में शादी-विवाह (ब्यो-बारात) के खास मौकों पर कलेऊ (मिठाई ) देने की अनूठी परम्परा है।
कलेऊ (मिठाई देना) में विभिन्न प्रकार की मिठाइयां होती हैं, जिन्हें विदाई के अवसर पर नाते-रिश्तेदारों को दिया जाता है। इनमें सबसे लोकप्रिय है, अरसा। इन्हें कन्या को विदाई में कण्डी भरकर दिया जाता है। जिसे उसके ससुराल में सब जगह बाटा जाता है। जब जब कन्या मायके से वापस ससुराल आती है तो उसे यह कलेऊ (मिठाई) दिया जाता है।
अरसा (Arsa) यह उत्तराखंड में लोगों के लिए सबसे अधिक स्वाद वाली मिठाई में से एक है। गढ़वाल की यह स्वादिष्ट (Traditional Sweet Of Garhwal) रेसिपी काले गुड़, चावल और सरसों के तेल जैसी सरल सामग्रियों से तैयार की जाती है। बरसों से पहाड़ के गांव में रहने वाले लोग अपनी बेटियों को ससुराल जाते समय मिठाई (कलेऊ) के रूप मे अरसे, मीठी रोटी, मक्के की रोटी, उड़द के पकोड़े, बाल मिठाई आदि देने के परम्परा हैं।
ये अरसे (Arsa) न केवल एक मिठाई होती है अपितु ये, स्नेह, प्यार का प्रतीक भी होती ह। चावल, भेली (काले गुड़) और सरसों के तेल से तैयार होकर यह अरसे लंबे समय तक खराब भी नहीं होते हैं। खानें में इनका स्वाद आज भी बेजोड़ है।
अरसे (Arsa) को बांटना पहाड़ के लोक में शुभ शगुन माना जाता है। आज भी उत्तराखंड गढ़वाल क्षेत्र के गावं में शादी-विवाह के मौकों पर गावं के सभी लोग एक साथ आकर अरसा बनाने के लिए तैयार रहते है। शादी ब्याह सहित अन्य खुशी के मौके पर भी ये परम्परागत मिठाई बरसों से अब भी उत्तराखंड के गढ़वाल (Garhwal) क्षेत्र के पहाड़ी गावं में बनाई जाती है।