17/03/2026
प्रदेश में दवाओं के सैंपल फेल होने की खबरों ने गहरी चिंता पैदा कर दी है। फंगल इंफेक्शन, हार्ट और लीवर जैसी गंभीर बीमारियों की दवाएं अमानक (Substandard) पाई जाना जनता की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ है।
सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही है। जिन दवाओं के सैंपल की रिपोर्ट 1 महीने में आनी चाहिए, उसमें 6-6 महीने की देरी क्यों हो रही है? जब तक रिपोर्ट आती है, तब तक खराब बैच की दवाएं बाजार में बिक चुकी होती हैं और मरीज उन्हें खा चुके होते हैं। इससे कितने मरीजों को स्वास्थ्यलाभ की बजाय स्वास्थ्य का नुकसान होगा, यह किसी को नहीं पता। यह देरी सिस्टम की विफलता है या किसी को बचाने की कोशिश?
हमारी सरकार का संकल्प 'निरोगी राजस्थान' था, जिसके तहत दवाओं की गुणवत्ता पर हमारा कड़ा पहरा रहता था। आज स्थिति यह है कि लैब की सुस्ती और मॉनिटरिंग के अभाव में नकली और घटिया दवाओं का कारोबार फल-फूल रहा है। सरकार इस पर एक्शन करने की बजाय सो रही है।