08/08/2025
कौन कहे क्या ठीक ग़लत है, सब उलझन के जाल में है
हर चेहरा मुस्कान लिए पर, आँखें ख़ाली हाल में है
चलते-चलते रुकना सीखा, रुक कर भी कुछ सीखा क्या?
जो भी देखा, जैसा देखा, वो सब अपनी चाल में है
तू भी, मैं भी, एक ही जैसे, फिर भी कैसी दूरी है
दिल की बातें कौन समझता, सब ख़ुद के ख़्याल में है
जो रोशन था वो बुझता है, जो छुपता अब दिखता है
सच की बातें कौन करे अब, हर साया सवाल में है
चाहो यदि कुछ बात बने ,पर,बातों से क्या बनता है
रिश्ते नाते टूट रहे, हर जीवन भूचाल में है
छोड़ो अब चिंता की गठरी, सांसें जितनी भारी हैं
ज़िंदा रहना भी इक फ़न है, और ज़िंदगी हर हाल में है
'जनक' सवालों में जीता है, उत्तर सब बेहाल में हैं
चुप रह जाना ही अच्छा है, जब बातें मायाजाल में हैं