19/06/2025
हमने देखा वो मंजर
जहां बसते घर
उजड़ते देखा
हमने देखा वैसा बंजर
उजड़े पेड़
पनपते देखा
ख्वाहिश थी दिल की
गोता लगाने को
तब सुख गया
ये तमाम
दिल की दरिया
नमकीन नयन के झरने
रूक गये
वो तमाम
प्यार के नगमे
बिखरे बिखरे
प्यार के ग़ज़लें।।।।।