16/08/2026
कई राज्यों के द्वारा एनालॉग पनीर पर लगाए गए बैन से एक राहत भरी हवा चली है।
लेकिन सेंट्रल FSSAI की चुप्पी बड़ी डरावनी लग रही है।
यह जिम्मेदारी केंद्र सरकार के द्वारा तय की जानी चाहिए कि आखिर वो कौन लोग थे जिन्होंने एनालॉग नामक एक शब्दावली गढ़ी और इसके पीछे
नकली पनीर
नकली माखन
नकली छैना
सब हमारे ऊपर पेल दिए गए।
जिसका परिणाम यह हुआ है कि करोड़ों लोग गंभीर बीमारियों से ग्रसित होकर पिछले कुछ सालों में मारे गए हैं और करोड़ों उलझे पड़े हैं।
जब से क्लेश देश में शुरू हुआ है तबसे किसानों ने जीव पालन को कम से कम करना शुरू कर दिया है नतीजा गांवों में जीवों की संख्या लगातार घटती चली जा रही है क्योंकि दूध की कोई डिमांड तो है नहीं कौड़ियों के भाव शुद्ध दूध खरीदा जा रहा है।
देश में सबसे पहले इस गलत नीति के खिलाफ मोहन सिंह आहलूवालिया जी ने बिगुल बजाया और हम सभी को बताया कि खाद्य नीति में ही समस्या है जिसकी वजह से स्वास्थ्य कृषि और जीव तीनों खतरे में आ चुके हैं।
कल ही देश में एक भगवान माने जाने वाले बड़े ब्रांड के द्वारा बनाई गई शुगर फ्री icecream पर महाराष्ट्र की FSSAI ने बैन लगाया तो खुद को भगवान समझने वाले ब्रांड का जवाब था कि शुगर फ्री तो मेरा ट्रेड मार्क है हम तो नीचे लिखते हैं कि इसमें शुगर है।
आग लगे तुम्हारी ट्रेडमार्क को और कीड़े पड़ें तुम्हारी सोच को करोड़ों शुगर के मरीज तुम्हारे इस ब्रांड में को पढ़ कर इसे खाया करते थे।
आई ए एस अधिकारी तुकाराम मुंडे जी ने जब से महाराष्ट्र में काम करना शुरू किया है तभी से स्थानीय फूड रेगुलेटरी बॉडी सही दिशा में जाती हुई प्रतीत हो रही है।
नकली मक्खन जो हरेक दुकान और चौराहे पर तो मिलता ही है एक बड़े नामित विश्वविद्यालय के उपकुलपति के घर में ब्रेकफास्ट टेबल पर जब यही अल्ट्रा लाइट फेट के नाम से परोसा गया तो मोहन सिंह आहलूवालिया जी ने उपकुलपति महोदय का ध्यान इस तरफ़ दिलवाया तो पूछा ताछी शुरू हुई और फिर उस नकली मक्खन की विदाई हुई।
किसानों का सबसे बड़ी दुश्मन मिलावट , ब्लेंडिंग और फोर्टिफिकेशन जैसी शब्दावलियां है जिनका अर्थ मिलावट ही है।
आज देश में शुद्ध भोजन ना मिलने का बड़ा कारण अपुष्ट नीति और इंडस्ट्री पर आँख बांड करके भरोसा है।
एक शहर के चारों और बसे किसानों का पहला अधिकार मार्किट पर है ना कि किसी फैक्ट्री का।