06/06/2025
ज़िंदगी ज़िंदादिली का नाम है , मुर्दा दिल क्या ख़ाक किया करते हैं!!
ये पंक्तिया मेरी माँ और छत्तीसगढ़ का स्वाद की कर्ता-धर्ता श्रीमती चंदारानी ठाकुर के ऊपर सटीक बैठती है ।
चाहे बचपन में पैसों के अभाव में जीवन यापन हो, या सरकारी हॉस्पिटल के अभाव में अपनी प्रथम संतान को खोना हो या फिर कैंसर से अपने २४ वर्षीय जवान बेटे को खोने का दुख हो , या फिर ख़ुद उसी कैंसर से ग्रस्त हो जाना हो ।
इन सारे अवसरों ने हर बार मम्मी की कठिन परीक्षा ली है, उनको ज़िंदगी से निराश किया है, पर पता नहीं किस जज़्बे के साथ जीती है मेरी माँ की कभी भी होंठों पर अफ़सोस या किसी के लिए हाय नहीं निकला । दुख आया , संताप किया , पर फिर से ज़िंदगी को जीने का वजह ढूँढ के जीने लगी । वो वजह कभी बच्चे बने या फिर बच्चों के बच्चे या फिर छत्तीसगढ़ का स्वाद ।
सितंबर में २ साल हो जाएँगे मम्मी को 4th स्टेज कैंसर का ज्ञात हुए । ५-६ अलग अलग डॉक्टर और हॉस्पिटल में इस दौरान उनका इलाज चलता रहा, इस दौरान आईसीयू में भी चली गई थी, पर ये उनका ज़ज्बा है और सभी का प्यार और आशीर्वाद जिसकी वजह से मम्मी कैंसर का डट कर सामना कर रही है । पिछले २ सालो में और आज भी कीमो चल रहा है, इस दौरान ५-७ बार खून चढ़ाना पड़ा, वजन २० किलो घट चुका है, बाल एक बार तक़रीबन पूरे झड़ के पुनः आ गए है, पर आज भी अपना हर काम ख़ुद से कर रही है । खाना बनाने के साथ साथ खाने की भी शौक़ीन है मम्मी । कहीं बूफ़े खाने जाती है तो अपने साथ साथ पापा के लिए भी जा जाके खाने का हर एक आइटम लाती है ।
मैं जानती हूँ की ये सब ईश्वर की कृपा, बड़ो का आशीर्वाद और आप सभी के स्नेह के वजह से संभव है, और इसलिए ज़रूरी थी की आपको उनके स्वास्थ के बारे में अवगत किया जाये ।
आशा है आप सभी हमेशा अपनी प्रार्थना में उनको याद रखेंगे और पुनः निवेदन है की बस उनका हौसला बढ़ाइये और कभी भी अफ़सोस नहीं जताइए । भगवान मम्मी को दीर्घायु रखें ।
पल्लवी - मम्मी की बेटी