Gavyasat

Gavyasat जय गऊ माता की

12/05/2026

#उशीर
#खस घास: गर्मी का रामबाण उपाय!
खस एक बारहमासी घास है, जो कम सिंचाई वाली बंजर भूमि पर सालों उगती रहती है। इसकी जड़ों से निकला सुगंधित तेल इत्र, शरबत और आयुर्वेदिक औषधि में चमत्कारिक काम करता है।

प्रमुख लाभ
शरीर को ठंडक: गर्मी में शरबत पीने से प्यास-पित्त शांत, बुखार-घमौरियां दूर।
त्वचा-बालों की देखभाल: एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण से जलन, घाव, रूसी ठीक; चमक बढ़ाए। नारियल तेल में मिलाकर लगाएं।
दर्द-नींद में राहत: जोड़ों-मांसपेशियों का दर्द कम, अनिद्रा-तनाव दूर; अरोमाथेरेपी में उपयोगी।
पाचन-बुखार: दस्त, पेट दर्द, बच्चों के रोगों में चूर्ण शहद के साथ लें।
घरेलू नुस्खे
जलन: खस+चंदन पीसकर लेप लगाएं।
बुखार: जड़ का काढ़ा 4 चम्मच दिन में 3 बार।

अनिद्रा: नहाने के पानी में 5-10 बूंद तेल डालें।
बाल झड़ना: नारियल तेल+खस से मसाज, हफ्ते में 3 बार।

आयुर्वेदिक गुण
रस: मीठा-कड़वा-तिक्त; शीतल, रूखा। मात्रा: चूर्ण 2-6 ग्राम, रस 10-40 ML, गर्मी में ही लें, सर्दी-मानसून में परहेज।
नोट: वैद्य की सलाह से ही उपयोग करें। #आयुर्वेद #खसकेफायदे #गर्मीकाउपाय

05/07/2025

🙏🙏सावधान सावधान सावधान🌷.(लोकहित).में भाईयो और बहनों मेरा मानना है कि एक अच्छी बड़ी सुंदर डायरी रखें और जो ग्रुप में बीमारियों के🌷योग सूत्र🌷 समय-समय पर मोबाइलों में मैसेजों और वीडियो के माध्यमों से मिलते हैं उसे,नोट,कर सुरक्षित रखें तो यह एक स्वयं,आयुर्वेदिक,शास्त्र बन जाएगा जो आपके परिवार एवं बच्चों को हमेशा हमेशा के लिए बीमारियों से खुशहाल और सुरक्षित बना देगा और आप🌷स्वयं🌷व आपके बच्चे भी अपने परिवार के एक कुशल,वैद्य,बन जाएंगे और🙏अस्पतालो 🙏के चक्कर काटने से बचेंगे यह भविष्य में कौन बार-बार बताने आएगा यह मुझे मालूम नहीं 🙏🙏नोट..ऐसा करने से बिना कोई प्रयास अपने आप संपूर्ण🌷भारत🌷में घर घर रियल आयुर्वेद की स्थापना हो जाएगी और जो ,दवाइयां,बहुत,,महंगी,,और खर्चीली हैं उन औषधियों के ,बाजे बज,जाएंगे क्योंकि भारतीय 🌷रसोई🌷घर व आसपास मिलने वाली आयुर्वेदिक औषधियां ही दुनिया का सबसे बड़ा 🙏दवाखाना🙏है भाइयों जुकाम, बुखार, खांसी, पेट दर्द, सिर दर्द,आंख दर्द, बदन दर्द, आदी बीमारियों पर ही तो कंट्रोल करना है यही तो आगे चलकर ,,गंभीर बीमारियां,,बनती है यह मैसेज अपने परिवार वालों को एवं अन्य ग्रुपों में 🌷शेयर 🌷 जरूर करें क्योंकि बिना कोई प्रयास किए यह भी एक मानव सेवा है धन्यवाद🙏🙏

05/07/2025

*पीरियड मे ज्यादा ब्लीडिंग रोकने के लिए क्या करे।*

*रक्तप्रदर*

*मासिकधर्म स्राव में सामान्य से अधिक रक्तस्राव होना या दो मासिक धर्म के बीच भी aरक्त स्राव होना रक्तप्रदर कहलाता है*

*गर्भपात कराने से,गर्भ निरोधक दवा के सेवन से,मासिकधर्म को आगे या पहले करने हेतु दवा के सेवन से,अत्यधिक ऐलोपैथी दवा के दुष्परिणाम से,अधिक शोक चिंता क्रोध ईर्ष्या व शारीरिक क्षमता से अधिक कार्य करना इसका मूल कारण है*

*कमर दर्द,रक्तअल्पता, शारीरिक कमजोरी,अधिक चक्कर आना,अधिक प्यास लगना, आंखों के आगे अंधेरा छाना इसके मुख्य लक्षण है*

*आम की गुठली का चूर्ण 1 से 2 ग्राम 5 से 10 ग्राम शहद के साथ*

*एक पके केले के साथ 10 ग्राम घी मिलाकर सुबह शाम*

*10- 20 ग्राम अशोक की छाल अधकुटी कर के 100 ग्राम दूध 100 ग्राम पानी मिलाकर उबाले सिर्फ दूध रहने पर छानकर पीने से*

*गोरखु व शतावरी बराबर मिलाकर इसके 5 ग्राम चूर्ण सुबह शाम बकरी या गाय के 100 ग्राम दूध में उबालकर पीने से*

*कच्चे केले को सुखाकर चूर्ण बनाकर 5 ग्राम चूर्ण 2 ग्राम गुड़ के साथ व इस चूर्ण के साथ कच्चे गूलर का चूर्ण बराबर मिलाकर सुबह शाम 10 ग्राम सेवन से अत्यधिक लाभ होता है*

*उपचार के दौरान लाभ न होने पर भोजन में दुध व चावल ही ले बुखार रहने पर उन दिनों उपवास रखें*

*तुलसी के रस में मिश्री मिलाकर सेवन से*

*अशोक*
*अशोक की छाल का चूर्ण 10 ग्राम सुबह शाम दूध में उबालकर या (अशोक छाल, सफेद जीरा,दालचीनी, इलायची मिलाकर काढ़ा बनाकर दिन में 3 बार )सेवन से रक्तप्रदर,कष्ट के साथ मासिक,श्वेत प्रदर,गर्भाशय व अंडाशय को पूर्ण सक्षम बनाता है आयुर्वेद में अशोकारिष्ट के रूप में उपलब्ध है*

*बेर*
*बेर के पेड़ की छाल 5 ग्राम सुबह शाम गुड़ के साथ सेवन से श्वेत व रक्त प्रदर ठीक होता है*

*10ग्राम बेर के पत्ते 5 दाने काली मिर्च,20 ग्राम मिश्री को पीसकर 100 ग्राम पानी के साथ सुबह शाम पीने से*

*अर्जुन*
*अर्जुन की छाल 10 ग्राम एक कप दूध में उबालकर जब आधा रह जाये तो थोड़ी मिश्री मिलाकर दिन में 3 बार सेवन से*

*बरगद*
*वट जरा के अंकुर 10 ग्राम को 100 ml दूध में पीसकर छानकर दिन में 3 बार*

*बरगद के 20 ग्राम कोमल पत्ते को 100 ml पानी मे पीसकर सुबह शाम पिलाने से स्त्री या पुरुष के पेशाब में खून आने के रोग भी नस्ट होता है*

*3 से 5 ग्राम बरगद के कोपल पत्ते को काढा बनाकर सुबह शाम सेवन से प्रमेह व रक्त प्रदर नस्ट होता है*

*बरगद के दूध की 5- 7 बून्द बतासे पर डालकर सुबह शाम खाने से*

*अपामार्ग चिड़चिड़ी:-10 ग्राम अपामार्ग के पत्ते 5 दाने काली मिर्च,3 ग्राम गूलर के पत्ते को पीसकर चावल के धोवन के पानी के साथ सेवन से*

*केवड़े*
*इसकी जड़ को पानी मे घिसकर मिश्री के साथ पीने से*

*पुनर्नवा*
*इसके पत्ते का रस 2 चम्मच सुबह शाम शहद के साथ या इसके 3 ग्राम का चूर्ण जलभांगरे के रस के साथ सेवन से*

*गूलर*
*गूलर की छाल 5 से 10 ग्राम मात्रा या इसके फल 2 से 4 की दूध के साथ*

*20 ग्राम गूलर की ताजी छाल 250 ml पानी मे उबाले 50 ml पानी रहने पर 25 ग्राम मिश्री व 2 ग्राम सफेद जीरा चूर्ण मिलाकर सेवन से*

*गूलर के फल के एक चम्मच गुद्दे में एक चम्मच मिश्री चूर्ण मिलाकर कुछ हफ्ते तक सेवन से रक्त प्रदर व मासिकधर्म में अधिक रक्त आना दूर होता है*

*गुड़हल*
*इसके फूल के 10- 12 कली दूध में पीसकर सुबह शाम पीने से ध्यान रहे पथ्य सिर्फ दूध चावल ही है*

*गिलोय*
*गिलोय के रस 2 चम्मच नियमित सुबह सेवन से*

*गेंदा*
*गेंदे के फूल के रस 5- 10 ml या 5 -10 ग्राम इसके चूर्ण को घी में भूनकर सेवन से*

*आम*
*आम के पेड़ की छाल का काढ़ा 20 से 40 ml सुबह शाम*

*आम की गुठली का चूर्ण 2 से 4 ग्राम सुबह शाम*

*दूध*
*दूध में मिश्री मिलाकर पीने से*

*झरबेरी*
*जड़ की छाल व मिश्री को पीसकर पानी के साथ सेवन*

*तरबूज*
*10 ग्राम तरबूज के बीज व मिश्री पीसकर पानी के साथ सेवन से*

*सिंघाड़े*
*इसके आटे की रोटी खाने से*

*फिटकिरी*
*आधा ग्राम फिटकिरी कूट पीस कर बनाई गई भसम को मिश्री के साथ सेवन से*

*निम तेल*
*आधा चम्मच निम तेल दूध में मिलाकर सुबह शाम पीने से शर्तिया रक्त प्रदर बन्द होता है*

*गेरू*
*2ग्राम शुद्ध गेरू 10 ग्राम फिटकिरी दोनो पीसकर 1 ग्राम सुबह शाम सेवन से*

*कतीरा*
*10 -20 ग्राम कतीरा पानी मे भिगो कर शाम को मिश्री मिलाकर शर्बत बना कर पीने से*

*अंजबार*
*रक्तप्रदर में अंजबार के काढ़े से गर्भाशय को धोने से*

*गाजर*
*100 ml सुबह शाम रस पीने से*

*जामुन*
*10 -20 ml पत्तो का रस सुबह शाम पीने से*

*आमलकी*
*आमलकी के फल का रस 1 ग्राम 5 ग्राम मिश्री के साथ सुबह शाम*

*आमलकी के बीज का चूर्ण 2 3 ग्राम 50 ml पानी के साथ सुबह शाम*

*नारियल*
*नारियल के जड़ का काढ़ा 40 से 80 ml सुबह शाम*

*चौलाई*
*चौलाई ,आंवला ,अशोक छाल, दारू हल्दी मिश्रित काढ़ा 40 मल दिन में 3 बार इससे गर्भाशय कष्ट भी दूर होते हैं रक्त प्रदर के साथ*

*वन चौलाई:- 15 ग्राम वन चौलाई का रस सुबह शाम सेवन से*

*केला*
*केले के फूल का रस 10 ml दही के साथ सुबह शाम*

*केले की जड़ का रस 10 ml नियमित सुबह सेवन से*

*केसर:- आधा ग्राम केसर 2 ग्राम मिश्री के साथ बारीक पीसकर शर्बत बनाकर पीने से।*

05/07/2025

*मानसून डाइट:*
*ऐसे में क्या खाएं, क्या न खाएं ताकि इंफेक्शन का खतरा ना रहे..*
🍎🍓🥭🍇🍒🍈🍆🥝🍍🍋🌶🍅🥑🥕🥭🍉🍌🍐🌶️🥦🥥

➡️ 1. मानसून के दौरान, सरसों के तेल, मक्खन या मूंगफली के तेल में बना खाना खाने से बचना चाहिए क्योंकि ये तेल थोड़े भारी होते हैं। इनसे तैयार भोजन को पचने में दिक्कत होती है। पाचनतंत्र को बेहतर रखने के लिए खाने में जैतून का तेल, घी या सूरजमुखी तेल इस्तेमाल करना चाहिए। यह तेल दूसरे तेलों की तुलना में हल्के होते हैं।

➡️ 2. इस मौसम में ज्यादातर लोग गर्म और तला हुआ खाना पसंद करते हैं लेकिन इन्हें पचाना मुश्किल है इसीलिए इन्हें रोजाना खाने से बचें।
अधिक से अधिक सब्जियों और फलों को डाइट में शामिल करें क्योंकि ये आसानी से पच जाते हैं और कई जरूरी विटामिंस और मिनिरल्स पाए जाते हैं। सबसे जरूरी बात है कि इन्हें अच्छे से धोने के बाद ही इस्तेमाल करें ताकि बैक्टीरियल इंफेक्शन का खतरा कम किया जा सके।

➡️ 3. मानसून के दौरान सड़क के किनारे मिलने वाले स्ट्रीट फूड को खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनसे इंफेक्शन या पेट से जुड़ी बीमारी का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा सी-फूड जैसे मछली और झींगा से भी दूरी बनाएं। डाइट में फल जैसे सेब, आम, अनार, नाशपाती जरूर शामिल करें। ध्यान रखें आम को अधिक मात्रा में न लें इससे पिंपल होने की आशंका रहती है। चाहें तो फलों को सलाद के रूप में भी ले सकते हैं।

➡️ 4. बरसात के मौसम में कच्चा सलाद खाने से बचना चाहिए क्योंकि इसमें कीड़े होने का डर बना रहता है। अगर खाना ही हो तो सलाद को स्टीम्ड करके खाएं। इससे सलाद के कीटाणु भी नष्ट हो जाएंगे और ये ज्यादा हेल्दी भी साबित होगा।

➡️ 5. कच्चा दूध भी इस मौसम में पीने से बचना चाहिए। नमी के कारण इसमें बैक्टीरिया अधिक पनपते हैं इस कारण पाचनतंत्र प्रभावित हो सकता है। दूध ले भी रहे हैं तो उबालकर ही पीएं, खासकर ऐसे लोग जिन्हें उल्टी-दस्त की समस्या हुई हो।

➡️ 6. भले ही बारिश के बाद तापमान कम हो गया हो लेकिन शरीर में पानी की कमी न होने दें। दिनभर में कम से कम 8-10 गिलास पानी जरूर पीएं। इस मौसम में पानी की कमी पूरी करने के लिए फलों का जूस लिया जा सकता है। जो विटामिंस के साथ मिनिरल्स की भी पूर्ति करेंगे।

*मानसून के दौरान सड़क के किनारे मिलने वाले स्ट्रीट फूड को खाने से बचना चाहिए क्योंकि इनसे इंफेक्शन या पेट से जुड़ी बीमारी का खतरा अधिक होता है।*

➡️ 7. इस मौसम में हर्बल-टी खास फायदा पहुंचाती है। इसमें मौजूद तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं। इसमें चाहें तो अदरक, काली मिर्च और शहद का भी प्रयोग कर सकते हैं।

➡️ 8. इस मौसम में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है ऐसे में डाइट करेला, मेथी, नींबू और मौसमी जरूर शामिल करें। इनमें विटामिन-सी अधिक पाया जाता है जो इम्युनिटी बढ़ाते हैं।

05/07/2025

*कच्ची हल्दी के 10 सेहतमंद गुण – जानिए इसे अपने दैनिक जीवन में क्यों शामिल करें*

भारतीय रसोई में हल्दी एक आम मसाला है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कच्ची हल्दी (Raw Turmeric) में पिसी हुई हल्दी से कई गुना अधिक औषधीय गुण होते हैं? आयुर्वेद में हल्दी को "प्राकृतिक एंटीबायोटिक" और शरीर शुद्धि करने वाला माना गया है। खासतौर पर सर्दियों में कच्ची हल्दी का सेवन शरीर को अंदर से मजबूत बनाता है।

कच्ची हल्दी अदरक जैसी दिखती है और इसे दूध, चाय, अचार, चटनी, सूप या राइस डिशेस में प्रयोग किया जा सकता है। आइए जानते हैं कच्ची हल्दी के 10 बेहतरीन स्वास्थ्य लाभ:

1. प्रोस्टेट कैंसर जैसी बीमारियों से लड़ने में सहायक
कच्ची हल्दी में पाए जाने वाले करक्यूमिन (Curcumin) तत्व में कैंसर सेल्स को रोकने की क्षमता होती है। यह खासकर प्रोस्टेट कैंसर के खतरे को कम करने में सहायक मानी जाती है। इसके अलावा, यह हानिकारक रेडिएशन से होने वाले ट्यूमर से भी बचाव करती है।

2. सूजन और गठिया (Arthritis) में राहत
हल्दी का सबसे प्रमुख गुण है सूजन कम करना। यह फ्री रेडिकल्स को खत्म कर शरीर को दर्द से राहत देती है, विशेषकर गठिया रोगियों के लिए बहुत फायदेमंद है।

3. मधुमेह (Diabetes) में उपयोगी
कच्ची हल्दी इंसुलिन को संतुलित करती है और ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल करने में मदद करती है। यह डायबिटीज ट्रीटमेंट की प्रभावशीलता को भी बढ़ा सकती है। लेकिन यदि आप हाई डोज़ दवाएं ले रहे हैं, तो पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

4. इम्यून सिस्टम को करता है मजबूत
इसमें पाया जाने वाला तत्व लिपोपॉलीसेच्चाराइड (LPS) शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immunity) को मजबूत बनाता है और बुखार, बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन से बचाव करता है।

5. हृदय रोगों से सुरक्षा
कच्ची हल्दी के सेवन से शरीर में कोलेस्ट्रॉल लेवल कंट्रोल में रहता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।

6. बैक्टीरियल और स्किन इंफेक्शन में असरदार
इसमें प्राकृतिक एंटीबैक्टीरियल और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो त्वचा पर घाव या संक्रमण से लड़ते हैं। सोरायसिस जैसे स्किन डिजीज में भी यह फायदेमंद मानी जाती है।

7. त्वचा को बनाती है चमकदार
भारतीय परंपरा में हल्दी का उबटन विवाह से पहले शरीर पर लगाने की परंपरा है क्योंकि यह त्वचा को चमकदार और हेल्दी बनाती है।

8. इम्यून-बूस्टिंग हल्दी टी
कच्ची हल्दी से बनी Herbal Turmeric Tea ठंड के मौसम में इम्यूनिटी बढ़ाने का एक बेहतरीन उपाय है। यह शरीर को अंदर से गर्माहट और रोग प्रतिरोधक क्षमता देती है।

9. वजन कम करने में सहायक
हल्दी मेटाबोलिज्म को तेज करती है और फैट को ब्रेकडाउन करने में मदद करती है। नियमित सेवन से वेट लॉस प्रोसेस को सपोर्ट मिलता है।

10. लीवर को स्वस्थ रखती है
कच्ची हल्दी लिवर फंक्शन को सुधारती है और डिटॉक्सिफिकेशन में सहायता करती है। इससे शरीर में जमा टॉक्सिन्स बाहर निकलते हैं और लिवर हेल्दी रहता है।

🔔 निष्कर्ष
कच्ची हल्दी एक प्राकृतिक औषधि है जिसे आयुर्वेद में अत्यधिक महत्व दिया गया है। यह कई रोगों से बचाने और शरीर को स्वस्थ रखने में सहायक है।

आयुर्वेद अपनाएं, रोगों से बचाव पाएं!

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