17/01/2026
हिमाचल ब्यूरोक्रेसी में बड़ा 'खेल', नियमों की धज्जियां उड़ाकर 2022 बैच ने दी 2021 को पटखनी!
शिमला | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
हिमाचल प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इस समय एक अजीबोगरीब खामोशी है। यह खामोशी उस 'तूफान' से पहले की है जो 15 जनवरी 2026 को जारी एक आदेश ने खड़ा कर दिया है। सरकार ने प्रशासनिक मर्यादाओं और 'बैच सीनियरिटी' (Batch Seniority) के अलिखित संविधान को ताक पर रखते हुए 2022 बैच के एक अफसर को वह कुर्सी सौंप दी है, जिसके हकदार अभी 2021 बैच के अफसर थे।
सीधा सवाल: क्या हिमाचल में अब 'बैच' और 'अनुभव' नहीं, बल्कि 'रिश्ते' तय करेंगे कि अफसर किस कुर्सी पर बैठेगा?
फैक्ट चेक: दूध का दूध, पानी का पानी (The Data)
हमारी पड़ताल में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। देखिये कैसे एक जूनियर अफसर को सीनियरों के सिर पर बैठा दिया गया:
अधिकारी का नाम बैच (Batch) वर्तमान तैनाती (Jan 2026) पद का स्तर (Rank)
सचिन शर्मा 2022 ADC, शिमला (राजधानी) सीनियर (Senior)
डॉ. राजदीप सिंह 2021 SDM, बिलासपुर जूनियर (Junior)
रुपिंदर कौर 2021 SDM, मंडी (संभावित)
बड़ा खुलासा:
सरकारी रिकॉर्ड (NIC और कार्मिक विभाग) के मुताबिक, डॉ. राजदीप सिंह और रुपिंदर कौर (दोनों 2021 बैच) अभी भी सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (SDM) स्तर की जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। वहीं, उनसे एक साल जूनियर सचिन शर्मा (2022 बैच) को राज्य की राजधानी शिमला का अतिरिक्त उपायुक्त (ADC) बना दिया गया है।
तकनीकी पेंच: नियम क्या कहता है?
प्रशासनिक नियमों के अनुसार, IAS अधिकारियों को 4 वर्ष की सेवा पूरी करने के बाद 'सीनियर टाइम स्केल' (Senior Time Scale) मिलता है, जिसके बाद वे ADC लगने के पात्र होते हैं।
2021 बैच: 4 साल पूरे कर चुका है और कायदे से ADC पद का पहला हकदार है।
2022 बैच: अभी 4 साल पूरे करने की प्रक्रिया में है (या अभी अनुभव कम है), लेकिन उसे सीधे 'मलाईदार' पोस्टिंग (ADC Shimla) दे दी गई।
यह सिर्फ प्रमोशन नहीं, 'सुपरसेशन' (Supersession) है। यानी कतार में खड़े सीनियर को धक्का देकर जूनियर को आगे कर देना।
'दामाद जी' का रसूख या मात्र संयोग?
यह संयोग हजम करना मुश्किल है कि जिस अफसर (सचिन शर्मा) पर यह मेहरबानी हुई है, वे हिमाचल प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के दामाद हैं।
क्या 2021 बैच के अफसरों का कसूर सिर्फ इतना है कि वे किसी वीवीआईपी (VVIP) के रिश्तेदार नहीं हैं? 2022 बैच के अफसर का टैलेंट अपनी जगह हो सकता है, लेकिन क्या वह टैलेंट 2021 बैच के उन अफसरों से भी बड़ा है जिन्होंने एक साल ज्यादा सेवाएं दी हैं और अभी भी तहसील/उपमंडल स्तर पर धूल फांक रहे हैं?
IAS एसोसिएशन: कुंभकर्णी नींद में क्यों?
सबसे बड़ा सवाल IAS एसोसिएशन पर है। जब किसी राजनेता से लड़ना होता है तो एसोसिएशन एकजुट हो जाती है। आज जब उनके ही कुनबे (Cadre) में 'फूट डालो और राज करो' की नीति चल रही है, तो सब खामोश क्यों हैं?
क्या 2021 बैच के अधिकारियों में असंतोष नहीं है?
क्या सीनियर अफसरों को यह डर नहीं कि कल को 2024 बैच का कोई 'खास' अफसर आकर उनके सिर पर बैठ जाएगा?
निष्कर्ष
सचिन शर्मा को एडीसी शिमला लगाना सरकार का विशेषाधिकार हो सकता है, लेकिन डॉ. राजदीप सिंह और रुपिंदर कौर जैसे अफसरों को अनदेखा करना 'प्रशासनिक पाप' है। यह फैसला तुरंत सुधारा जाना चाहिए, वरना यह नजीर बन जाएगा कि हिमाचल में "काम नहीं, नाम (और दामन) बोलता है।"
CMO Himachal Aaj Tak Adv Rahul Kumar Gagret Halchal Una No 1 Sukhvinder Singh Sukhu Vinay Sharma
Sukhvinder Singh Sukhu
Sonal Goel IAS Page
Rakesh Jaiswal IAS
Yunus IAS
Tarun Shridhar IAS
IAS Shivam Pratap Singh