05/10/2026
अभी रीवा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का आगमन हुआ, तो उनकी अगवानी करने वालों में हमारे सवर्ण समाज के लोग सबसे आगे नजर आए।
सीधी में जब वडनगर से मोदी जी के भक्त बाइक रैली लेकर पहुंचे, तब भी अगवानी करने वालों में हमारे सवर्ण समाज के लोग सबसे आगे दिखाई दिए।
तस्वीर में बड़े-बड़े चेहरे दिखाई दे रहे हैं—कोई सांसद है, कोई मंत्री है, कोई विधायक है, तो कोई जिले का जिला अध्यक्ष।
इनमें से कई लोगों का तो राजनीतिक पार्टी की गुलामी करने से पेट चल रहा है, घर-परिवार चल रहा है। चलो, एक बार मान भी लिया कि उनका अपना स्वार्थ है।
लेकिन उनके पीछे खड़े उन लोगों का क्या, जिन्हें न राजनीतिक पार्टी की गुलामी करने से कुछ मिलता है, न घर चलता है, न परिवार?
सिर्फ नेताओं के पीछे खड़े होकर पिछवाड़ा सुखाने के अलावा आखिर मिलता क्या है?
अभी सांसद जी, विधायक जी, मंत्री जी का एक काम का दिन उनके पीछे खड़े होकर बिता दीजिए—यकीन मानिए, आपका एक काम भी नहीं होगा।
फिर भी हमारे समाज के लिए, अपने बाल-बच्चों के भविष्य और अपने हक-अधिकार के लिए दो शब्द बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पाते।
नेताओं की अगवानी में आगे,
लेकिन समाज के हक की लड़ाई में पीछे!
मेरे भाई, सच यही है—दोगले सबसे ज्यादा हमारे सवर्ण समाज में ही हैं। और इन्हीं लोगों की वजह से आज हमारे सवर्ण समाज की यह दुर्दशा है।
ऐसा जीवन जीना ही क्या, जिसमें अपने बच्चों के भविष्य और अपने समाज के अधिकारों के लिए आवाज उठाने की भी हिम्मत न हो?