06/08/2026
🔥 कड़वा सच: "गुरु ने तो प्रेम का मार्ग दिखाया था, फिर यह नफ़रत और बिखराव का ज़हर कहाँ से आया?" ⚖️💔🕊️
सादर अभिवादन! जयगुरुदेव प्रेमियों 🙏✨
मेरे प्यारे गुरु भाई-बहनों और प्रेमी आत्माओं, आज अमृतवेला के इस पावन वातावरण में मन अत्यंत पीड़ा और विरह से भरा हुआ है। 2012 के बाद जब संगत में बिखराव हुआ, तो सब अपनी-अपनी राह चल पड़े। जो जहाँ गया, जिसे जहाँ शांति मिली, उसके लिए वही स्थान उत्तम है। पर दुख इस बात का नहीं कि राहें अलग हो गईं, दुख तो इस बात का है कि लोग अपनी लकीर बड़ी करने के चक्कर में दूसरों की लकीर छोटी करने लगे हैं! 👁️👇
📜 स्वामी जी महाराज की वो पावन वाणी और हमारा अहंकार:
याद कीजिये वो दिन जब परम पूज्य स्वामी जी महाराज (मथुरा) देश के कोने-कोने में काफिला ले जाते थे, विशाल सत्संग होते थे। सत्संग के अंत में स्वामी जी महाराज बड़े वात्सल्य से हाथ उठाकर प्रेमियों से पूछते थे:
"बच्चा! मैंने किसी की बुराई तो नहीं की? किसी छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, अधिकारी-कर्मचारी या किसी संप्रदाय की निंदा तो नहीं की?"
और पंडाल में बैठे लाखों प्रेमी एक स्वर में हाथ उठाकर कहते थे—"नहीं मालिक! आपने किसी की बुराई नहीं की।"
अब ज़रा अपने गिरेबां में झाँककर देखिये... जब हमारे सच्चे सतगुरु ने जीवन भर किसी की बुराई नहीं की, तो हमें किसने हक दिया दूसरों पर उंगली उठाने का? हमें किसने आदेश दिया किसी के हृदय को चोट पहुँचाने का? 💔
⚖️ झकझोर देने वाले ३ कड़वे सत्य:
1️⃣ "हम अच्छे और बाकी सब बुरे"—यह गुरु-भक्ति नहीं, मन का अहंकार है! 🎭
आँखें वही हैं, पर देखने का नज़रिया बदल गया है। अगर आप खुद को सच्चा सत्संगी मानते हैं और दूसरों में कमियाँ ढूँढते हैं, तो समझ लीजिये कि आपके अंदर अभी 'मैं' ज़िंदा है। जो गुरु का सच्चा प्रेमी होगा, उसे दुनिया के हर जीव में अपने मालिक का ही नूर नज़र आएगा।
2️⃣ मालिक की मौज को कोई नहीं समझ सकता: 🌪️
जो जहाँ जुड़ा है, वह उस मालिक की मौज और उसके पूर्व जन्मों के संस्कारों का खेल है। हम अज्ञानी जीव उस कुल मालिक की गुप्त लीला को समझने की औकात नहीं रखते। किसी की आस्था और भावनाओं को आहत करना सबसे बड़ा पाप है।
3️⃣ निंदा से रूहानी कमाई का विनाश: 🕯️
आपने सालों-साल मथुरा दरबार में रहकर या घर पर जो सुमिरन-ध्यान और सेवा की कमाई की है, वह दूसरों की बुराई और चुगली करने में एक पल में स्वाहा हो जाती है। दूसरों का दोष देखने वाला कभी अंदर के दसवें द्वार पर नहीं पहुँच सकता।
🤲 मालिक के चरणों में आज की पावन अरदास:
"हे कुल मालिक! हे सच्चे पातशाह! हम अज्ञानी और भूलहार जीव हैं। हम आपकी मौज और लीला को नहीं समझ सकते। हमें इतनी सद्बुद्धि और दया बख्श दो कि हमारी ज़बान से कभी किसी प्रेमी का दिल न दुखे। जो जहाँ है, सबको अपने चरणों की भक्ति दो और हम पर अपनी रहमत की भीख बनाए रखो।"
💌 प्रेमियों के लिए विशेष संदेसा:
मेरे प्यारे प्रेमी भाइयों, अब भी समय है! वाद-विवाद, गुटबाज़ी और एक-दूसरे को नीचा दिखाने का खेल बंद कीजिये। जहाँ हैं, वहीं शांत होकर निष्काम भाव से सुमिरन कीजिये।
निंदा का रास्ता छोड़िये, प्रेम और नम्रता का दामन थामिये—क्योंकि हमारा मालिक केवल निष्छल प्रेम का भूखा है! 🙌🚩💖
सादर अभिवादन जयगुरुदेव! 🙏