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ये गांव का कुआं गवाह है उन अनगिनत बातों का, जो कभी पानी भरते हुए हंसी-मजाक भी हुआ करता था।""शहर में पानी बोतलों में सिमट...
28/09/2026

ये गांव का कुआं गवाह है उन अनगिनत बातों का, जो कभी पानी भरते हुए हंसी-मजाक भी हुआ करता था।""शहर में पानी बोतलों में सिमट कर रह गया, पर गांव के इस कुएं में आज भी पूरा बचपन नजर आता है।""वक्त बदल गया, लोग बदल गए, मगर इस कुएं का किनारा आज भी उसी सुकून से गले लगाता है।

🚀 क्या आप शुद्ध स्वदेशी प्रोडक्ट्स के साथ एक बेहतरीन बिजनेस अवसर की तलाश में हैं? 🚀आज ही जुड़िए भारत के सबसे भरोसेमंद डा...
26/09/2026

🚀 क्या आप शुद्ध स्वदेशी प्रोडक्ट्स के साथ एक बेहतरीन बिजनेस अवसर की तलाश में हैं? 🚀आज ही जुड़िए भारत के सबसे भरोसेमंद डायरेक्ट सेलिंग सिस्टम RCM Business से!RCM क्यों चुनें?1️⃣ स्वास्थ्य सर्वोपरि: यहाँ आपको मिलते हैं दैनिक उपयोग के 100% शुद्ध और मिलावट रहित सामान (जैसे - तेल, मसाले, कपड़े, हेल्थ सप्लीमेंट्स आदि)।2️⃣ आर्थिक आजादी: सिर्फ अपनी दुकान बदलकर सामान इस्तेमाल करने और दूसरों को बताने मात्र से आप अपनी इनकम शुरू कर सकते हैं।3️⃣ आत्मनिर्भर भारत: स्वदेशी अपनाकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान दें।यदि आप भी RCM के एसोसिएट बायर (मेंबर) बनकर अपने सपनों को पूरा करना चाहते हैं, तो देर न करें। पूरी जानकारी और जॉइनिंग सहायता के लिए अभी कॉल या व्हाट्सएप करें:📲 संपर्क करें: 7261068994आइए मिलकर एक स्वस्थ और समृद्ध भारत का निर्माण करें! 🙌

अनुभवी व्यक्तित्व का सानिध्य और आत्मीय बातचीत... 💫आज आदरणीय गोपाल जी ओझा 'गूँजन' जी से एक बेहद सुखद और आत्मीय मुलाकात हु...
21/09/2026

अनुभवी व्यक्तित्व का सानिध्य और आत्मीय बातचीत... 💫आज आदरणीय गोपाल जी ओझा 'गूँजन' जी से एक बेहद सुखद और आत्मीय मुलाकात हुई। उनके साथ बीता हर क्षण ज्ञान, सादगी और प्रेरणा से भरा रहा। उनका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा एक नई ऊर्जा देता है।इस आदरणीय भेंट के लिए हृदय से आभार! 💐 #गोपालजीओझा #गूँजनजी #आत्मीयमुलाकात #सम्मान #मार्गदर्शन #यादें

आज हमारी छोटी पुत्री अक्षिता का जन्मदिन है। इस शुभ अवसर पर हम जय माता दी कहते हुए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि वे...
20/09/2026

आज हमारी छोटी पुत्री अक्षिता का जन्मदिन है। इस शुभ अवसर पर हम जय माता दी कहते हुए मां दुर्गा से प्रार्थना करते हैं कि वे अक्षिता को सुख, समृद्धि, बुद्धि और उत्तम स्वास्थ्य का वरदान दें। माता रानी का वरदहस्त हमेशा तुम्हारी रक्षा करे और तुम्हें एक नेक व सफल इंसान बनाए। अवतरण दिवस की अनंत शुभकामनाएं और बहुत सारा दुलार।

20/09/2026

आज डुमरेजनी माई मंदिर (डुमरांव) के पास अपने अजीज दोस्त शशिरंजन तिवारी जी और डॉ. प्रेमसागर पाण्डेय जी के साथ मुलाकात हुई। इस मुलाकात का मजा तब दोगुना हो गया जब हम सबने मिंटू कुमार जी के ठेले से गरमा-गरम, चटपटा भुजा बनवाकर खाया।सच्ची बातें और देसी स्वाद... इससे बेहतर शाम और क्या हो सकती है! 😎

आज डुमरेजनी माई मंदिर, डुमरांव में परम मित्र श्री शशिरंजन तिवारी जी एवं आदरणीय डॉ. प्रेमसागर पाण्डेय जी के साथ दर्शन-पूज...
20/09/2026

आज डुमरेजनी माई मंदिर, डुमरांव में परम मित्र श्री शशिरंजन तिवारी जी एवं आदरणीय डॉ. प्रेमसागर पाण्डेय जी के साथ दर्शन-पूजन करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।माता के दरबार में शीश नवाकर क्षेत्र की सुख-समृद्धि, शांति और सभी के उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। मित्रों के साथ बिताए ये आध्यात्मिक पल अत्यंत सुखद और ऊर्जावान रहे।माई सबका कल्याण करें। जय माता दी! 🙏✨ #डुमरेजनी_माई #डुमरांव #आध्यात्मिक_यात्रा #मित्रता ाता_दी #बिहार_पर्यटन

छात्र वैकेंसी और परीक्षाओं के दौरान रेलवे स्टेशनों, फुटपाथों और ब्रिजों पर रात गुजारने की दर्दनाक हकीकतजब भी देश में कोई...
19/09/2026

छात्र वैकेंसी और परीक्षाओं के दौरान रेलवे स्टेशनों, फुटपाथों और ब्रिजों पर रात गुजारने की दर्दनाक हकीकतजब भी देश में कोई बड़ी सरकारी नौकरी (जैसे Railway, SSC, IBPS, या State Exams) की वैकेंसी आती है, तो सोशल मीडिया पर एक जैसी तस्वीरें और वीडियो तैरने लगते हैं। लाखों छात्र अपनी जान जोखिम में डालकर, भूखे-प्यासे, रेलवे स्टेशनों के फर्श पर, प्लेटफॉर्म के सेट के नीचे, फुटपाथों पर और यहाँ तक कि रेलवे ओवरब्रिज की सीढ़ियों पर रात गुजारते हैं।यह कोई शौक नहीं, बल्कि एक भारतीय छात्र के संघर्ष, मजबूरी और सपनों की वो कड़वी हकीकत है जिसे हर साल लाखों युवा जीते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये छात्र इन जगहों पर अपनी रातें कैसे और किन परिस्थितियों में काटते हैं: रेलवे स्टेशन के यात्री शेड और प्लेटफॉर्म का फर्शस्टेशन का प्लेटफॉर्म इन छात्रों का सबसे बड़ा 'बसेरा' बनता है।जगह की जंग: परीक्षा से एक दिन पहले ही स्टेशन छावनी में बदल जाते हैं। जहाँ जगह मिले—चाहे वह टिकट काउंटर की लाइन हो, वेटिंग रूम का फर्श हो, या प्लेटफॉर्म का खुला हिस्सा—छात्र अपनी किताबें या बैग बिछाकर बैठ जाते हैं। रातभर ट्रेनों की आवाजें, अनाउंसमेंट और मुसाफिरों की आवाजाही के बीच सोना नामुमकिन होता है। छात्र जागते-सोते अपनी कीमती किताबों, एडमिट कार्ड और सामान को सीने से लगाकर रात काटते हैं।गर्मी के दिनों में उमस और मच्छरों का आतंक होता है, तो सर्दियों में खुले शेड के नीचे कपकपाती ठंड में सिर्फ एक पतली चादर या गमछे के सहारे रात बितानी पड़ती है। फुटपाथ और खुले आसमान के नीचेजब स्टेशनों पर तिल रखने की जगह नहीं बचती, तो छात्रों का हुजूम स्टेशन के बाहर के फुटपाथों और सड़कों की तरफ रुख करता है। फुटपाथ की कठोर कंक्रीट पर ये छात्र अपने बैग को ही तकिया बना लेते हैं। आस-पास सुलभ शौचालय न होने या भारी भीड़ होने के कारण बुनियादी जरूरतों के लिए भी घंटों इंतजार करना पड़ता है। कई बार भूखे पेट ही फुटपाथ पर लेटना पड़ता है क्योंकि जेब में पैसे सीमित होते हैं।जोखिम: सड़क किनारे सोने में आवारा कुत्तों का डर और गाड़ियों की आवाजाही का खतरा हमेशा बना रहता है। रेलवे ओवरब्रिज (FOB) की सीढ़ियाँ और फर्शयह सबसे खतरनाक और दर्दनाक दृश्यों में से एक होता है। रेलवे के ऊंचे ब्रिजों पर जहाँ से लोग गुजरते हैं, वहाँ छात्र कतारों में सोए नजर आते हैं। ब्रिज ऊंचाई पर होने के कारण वहाँ हवा का बहाव तेज होता है। ठंड या बारिश के मौसम में यहाँ ठहरना किसी प्रताड़ना से कम नहीं होता।चलने की जगह नहीं: स्थिति यह हो जाती है कि ब्रिज से गुजरने वाले अन्य यात्रियों को इन सोते हुए छात्रों के ऊपर से या पैर बचाकर निकलना पड़ता है। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।यह मजबूरी क्यों? (The Root Cause)सीमित आर्थिक संसाधन: परीक्षा देने वाले अधिकांश छात्र ग्रामीण या मध्यमवर्गीय परिवारों से आते हैं। उनके पास इतने पैसे नहीं होते कि वे किसी होटल या लॉज में ₹1000-₹2000 खर्च कर सकें। उनके लिए यह पैसे बचाकर अगली परीक्षा का फॉर्म भरने के काम आते हैं।परीक्षा केंद्रों की दूरी: अक्सर परीक्षा केंद्र गृह जिले से 300 से 500 किलोमीटर दूर दे दिए जाते हैं। इतनी दूर अनजान शहर में उनके पास ठहरने का कोई दूसरा जरिया नहीं होता।प्रशासनिक कुप्रबंधन: एक ही दिन में लाखों बच्चों की परीक्षा होने के बावजूद शहरों में उनके ठहरने के लिए कोई कम्युनिटी हॉल या रैन बसेरों की विशेष व्यवस्था नहीं की जाती। यह सिर्फ संघर्ष नहीं, सिस्टम की नाकामी है सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को अक्सर "छात्रों का कड़ा संघर्ष" या "सपनों की उड़ान" कहकर रोमांटिक अंदाज में पेश किया जाता है। लेकिन असलियत में, यह सिस्टम की विफलता और बेरोजगारी का सबसे वीभत्स चेहरा है। एक युवा जो देश का भविष्य बनने की तैयारी कर रहा है, उसे अपनी परीक्षा से ठीक कुछ घंटे पहले पशुओं जैसी स्थिति में रात बितानी पड़ती है। ऐसे में वे मानसिक और शारीरिक रूप से थक चुके होते हैं, जिसका सीधा असर उनके परीक्षा के परिणाम पर पड़ता है।यह समय युवाओं की इस लाचारी को 'स्टोरी' बनाने का नहीं, बल्कि प्रशासन से यह सवाल पूछने का है कि "आखिर कब तक देश का टैलेंट फुटपाथों और स्टेशनों पर सोएगा?"

"फाइव स्टार होटल का बाथटब भी फेल है राजा! 😎 जब अपनी गाँव की नदी में केले के नाव पर लेटकर 'किंग साइज' आराम करने का मौका म...
19/09/2026

"फाइव स्टार होटल का बाथटब भी फेल है राजा! 😎 जब अपनी गाँव की नदी में केले के नाव पर लेटकर 'किंग साइज' आराम करने का मौका मिले। गाँव का मजा ही कुछ और है। 🔥🛶

शाहपुर (भोजपुर) के लोकप्रिय व ऊर्जावान युवा नेता भाई राकेश ओझा जी को अवतरण दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।जनता...
19/09/2026

शाहपुर (भोजपुर) के लोकप्रिय व ऊर्जावान युवा नेता भाई राकेश ओझा जी को अवतरण दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएं।जनता की सेवा और क्षेत्र के विकास के प्रति आपका समर्पण अनुकरणीय है। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और यशस्वी जीवन की मंगलकामना करता हूँ।

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