Narmada Natural Farms

Narmada Natural Farms Welcome to Narmada Natural Farms, where we are committed to nurturing nature and cultivating a sustainable future!

We practice and promote 100% natural farming methods that prioritize soil health, biodiversity, and chemical-free produce.

12/06/2026

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11/06/2026

जीवामृत का खेती में 3 प्रभावी तरीकों से प्रयोग किया जा सकता है:

1. सिंचाई के साथ: 250 से 1000 लीटर जीवामृत प्रति एकड़ सिंचाई के पानी के साथ दें।
2. फोलियर स्प्रे: 200 लीटर पानी में 10 से 30 लीटर जीवामृत मिलाकर पत्तियों पर छिड़काव करें।
3. ड्रेंचिंग: बिना पानी मिलाए 1 से 5 लीटर जीवामृत सब्जियों एवं फलदार वृक्षों की कैनोपी के बाहरी भाग में डालें। इस समय खेत में पर्याप्त नमी होना आवश्यक है।

सही तरीके से किया गया जीवामृत का प्रयोग मिट्टी की जैविक गतिविधि बढ़ाने और फसल के बेहतर विकास में मदद करता है।

09/06/2026

नीमास्त्र बनाने की विधि

सामग्री :
200 लीटर पानी
10 किलो नीम की पत्तियां/निबोली (कुटी हुई)
10 लीटर देशी गाय का गोमूत्र
2 किलो ताजा गाय का गोबर

बनाने की विधि:
सबको प्लास्टिक ड्रम में मिलाकर कपड़े से ढकें। 48 घंटे तक सुबह-शाम डंडे से हिलाएं। छानकर सीधे फसलों पर छिड़काव करें (पानी मिलाने की जरूरत नहीं)

09/06/2026

दशपर्णी अर्क एक अत्यधिक प्रभावी और प्राकृतिक कीटनाशक है जो फसलों को रस चूसने वाले कीड़ों, सुंडी और फफूंद से बचाता है। इसे 10 प्रकार की पत्तियों, गाय के गोबर, गोमूत्र और पानी के मिश्रण को लगभग 30 से 40 दिनों तक सड़ाकर तैयार किया जाता है।

09/06/2026

जीवामृत बनाने की सरल विधि

प्राकृतिक खेती में जीवामृत मिट्टी के सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ाने और फसल की वृद्धि को प्रोत्साहित करने का एक प्रभावी माध्यम है।

📌 आवश्यक सामग्री (200 लीटर जीवामृत के लिए):
✅ पानी – 200 लीटर
✅ ताज़ा गोबर – 10 किलोग्राम
✅ गाय का मूत्र – 5 से 10 लीटर
✅ गुड़ – 1 किलोग्राम
✅ बेसन – 1 किलोग्राम
✅ खेत की मिट्टी – 1 मुट्ठी

📌 बनाने की विधि:
1️⃣ 200 लीटर पानी में सभी सामग्री अच्छी तरह मिला लें।
2️⃣ मिश्रण को जूट की बोरी या किसी कपड़े से ढक दें।
3️⃣ हर 12 घंटे में लगभग 5 मिनट तक मिश्रण को अच्छी तरह हिलाएँ।
4️⃣ जीवामृत तैयार होने के बाद इसे छाया में ढककर रखें।

📌 महत्वपूर्ण नोट:
जीवामृत में जीवाणुओं की संख्या सातवें से लेकर दसवें दिन के बीच सबसे अधिक होती है। इस अवधि में प्रयोग करने से सबसे अच्छे परिणाम प्राप्त होते हैं।

📌 जीवामृत के लाभ:
✔ मिट्टी को जीवंत और उपजाऊ बनाता है।
✔ रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करता है।
✔ फसल की वृद्धि और उत्पादन

09/06/2026
09/06/2026

हम अक्सर कहते हैं कि फसल को नाइट्रोजन चाहिए। लेकिन एक दिलचस्प सवाल है — क्या सभी प्रकार की नाइट्रोजन पौधों के लिए एक जैसी होती हैं?

Soil Food Web पर अध्ययन करते समय मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि अलग-अलग पौधों की नाइट्रोजन की पसंद भी अलग होती है। सब्जियाँ और घास जैसी फसलें सामान्यतः नाइट्रेट रूप में नाइट्रोजन को बेहतर तरीके से उपयोग करती हैं, जबकि फलदार वृक्ष और बहुवर्षीय पौधे अमोनियम रूप को अधिक पसंद करते हैं।

यह अंतर मिट्टी में मौजूद सूक्ष्मजीवों से जुड़ा हुआ है। बैक्टीरिया प्रधान मिट्टी में नाइट्रेट अधिक बनता है, जबकि फफूंद प्रधान मिट्टी में अमोनियम अधिक समय तक उपलब्ध रहता है। यही कारण है कि एक ही पोषक तत्व अलग-अलग फसलों पर अलग प्रभाव दिखा सकता है।

शायद इसी वजह से प्रकृति में जंगलों की मिट्टी और सब्जियों के खेतों की मिट्टी की जैविक संरचना अलग होती है। प्रकृति हर पौधे के लिए एक जैसा वातावरण नहीं बनाती।

जितना अधिक मैं मिट्टी को समझ रहा हूँ, उतना ही महसूस कर रहा हूँ कि सफल खेती केवल पोषक तत्व प्रबंधन नहीं है, बल्कि मिट्टी के जीवों और उनके संतुलन को समझने की कला भी है।

06/06/2026

पिछले कुछ वर्षों में किसानों से बातचीत करते हुए मैंने एक बात बार-बार महसूस की है कि हम में से अधिकांश लोग मिट्टी को केवल पौधों को सहारा देने वाला माध्यम मानते हैं। लेकिन वास्तविकता इससे कहीं अधिक गहरी है। मिट्टी अपने आप में एक जीवित पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसमें अरबों सूक्ष्मजीव निरंतर सक्रिय रहते हैं।

एक मुट्ठी स्वस्थ मिट्टी में बैक्टीरिया, फफूंद, प्रोटोजोआ, निमेटोड, केंचुए और अनेक अन्य जीव मौजूद होते हैं। ये सभी मिलकर एक जटिल “Soil Food Web” बनाते हैं। यही जीव पौधों तक पोषक तत्व पहुँचाने, मिट्टी की संरचना सुधारने, जल धारण क्षमता बढ़ाने और रोग पैदा करने वाले जीवों को नियंत्रित करने का काम करते हैं।

दुर्भाग्य से, जब हम मिट्टी को केवल रासायनिक उर्वरकों के सहारे चलाने की कोशिश करते हैं, तो सबसे पहले यही लाभकारी जीव प्रभावित होते हैं। धीरे-धीरे मिट्टी की जैविक सक्रियता कम होने लगती है और खेती बाहरी इनपुट्स पर निर्भर होती चली जाती है।

मेरा मानना है कि भविष्य की सफल और टिकाऊ कृषि का आधार केवल पोषक तत्वों का प्रबंधन नहीं, बल्कि मिट्टी के जीवन का संरक्षण और संवर्धन है।

05/06/2026

रेड डायमंड अमरूद में अच्छी सर्दियों की फसल लेने के लिए सही समय पर कटिंग करना बहुत महत्वपूर्ण है।

हम मई के अंतिम सप्ताह से जून के पहले सप्ताह के बीच पौधों की कटिंग करते हैं। इस समय की गई कटिंग से नई बढ़वार अच्छी आती है, फूल सही समय पर आते हैं और सर्दियों में बेहतर गुणवत्ता के फल प्राप्त होते हैं।

क्या आपने अपने अमरूद के बाग में कटिंग शुरू कर दी है? कमेंट में जरूर बताए

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Vidisha
464001

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